Chapter 44: chapter 44

Billionaire's Dark DesireWords: 28416

अब आगे......    त्रिहांश का विला ....,       "   Hmmm..... तुम्हे मेरे साथ भीगने की क्या जरूरत थी बीवी ? " ठंड से कांप रही राज्ञा को अपने आगोश में लेते हुए त्रिहांश ने बेहद सख्ती से पूछा |      राज्ञा ने अपने दोनो हाथ को त्रिहांश के चारो और लपेट लिया था | त्रिहांश की बात सुन धीरे से वह अपना चेहरा ऊपर कर उसके आंखो में देखते हुए बोली,""_ आप क्यों भीग रहे थे ? "    त्रिहांश अपना सर टेढ़ा कर उसके आंखो में देखने लगा | वह फिर उसके कमर को कसके पकड़ कर अपना सर हेड्रेस्ट को टिकाते हुए बोला,""_ hmm तुम्हारा जानना जरूरी नही है राज्ञा...!! "   राज्ञा का मुंह बन गया | वह थोड़ी देर त्रिहांश को घूर कर देखी,जो इस वक्त एक टक सीलिंग को देख रहा था | राज्ञा फिर उससे अलग हो कर बेड के दूसरे कोने में खिसक कर सोते हुए बडबडा कर बोली,""_ हमेशा यही कहते है खडूस मॉन्स्टर कही के ,जब मेरी बारी आएगी न तब मै भी .... अअह्ह्ह्ह | "    " हिम्मत भी मत करना राज्ञा " त्रिहांश उसे एक ही झटके में अपने बाहों में वापस खींचते हुए गुस्से से बोला | त्रिहांश का इस तरह कमर को कसके पकड़ने से राज्ञा को बहुत दर्द मेहसूस हो रहा था और वह दर्द से छटपटाते हुए त्रिहांश को देखने लगी |      त्रिहांश उसे बुरी तरह घूर कर देख रहा था | वह लड़की उससे दूर जा कर कैसे सो सकती है ? उसे यह बिलकुल बर्दाश्त नही था और नाही उसे वह दूर जाने दे सकता था |      त्रिहांश बेहद कोल्ड लुक देते हुए उसे गुस्से से घूरने लगा | तभी राज्ञा बोली,""_ मुझे दर्द हो रहा है | "      त्रिहांश का जबड़ा कस गया | वह अपने दांत पीसते हुए कुछ बोलने को हुआ लेकिन वह बिना कुछ कहे चुप हो गया और उसका पकड़ भी राज्ञा के कमर में अपने आप ढीला हो गया | वही राज्ञा की आंखे अब तक नम हो गए थे ,वह वैसे ही नम आंखों से त्रिहांश को देखने लगी थी |   लेकिन राज्ञा को त्रिहांश का इस तरह शांत होना थोड़ा अजीब लगा क्यों की जब भी त्रिहांश गुस्से में आ जाता तो बिना सोचे समझे उसे हर्ट कर ही देता | लेकिन आज वह कुछ अलग ही नजर आ रहा था | राज्ञा धीरे से उसके ऊपर ही पूरी तरह लेटते हुए उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपा कर बोली,""_ आप ठीक है न त्रिहांश ?       त्रिहांश उसे ही हैरानी से देख रहा था ,वह फिर राज्ञा को अपने बाहों में भरते हुए बस गुनगुना कर बोला,""_ hmmmm | "        राज्ञा ने आगे कुछ नही पूछा | वही त्रिहांश की आंखो में इस वक्त कोई नींद नही था | वह बस एक टक सीलिंग को देखता रहा, उसके आंखो के सामने बार बार धीरांश का वह मुस्कान याद आ रहा था |    उसे जैसे जैसे धीरांश याद आ रहा था वैसे वैसे उसकी पकड़ राज्ञा के बाहों में कसते जा रहा था | वह उसे अपने आपसे चिपकाने की कोशिश कर रहा था | तभी राज्ञा नींद में ही कसमसाने लगी |     "  उम्मम्म, त्रिहांश.....! " त्रिहांश अपना सर झुका कर उसे देखा | राज्ञा की माथे पर शिकन आ गए थे और वह नींद में ही उसके पकड़ से छुटने की कोशिश कर रही थी | त्रिहांश अपना पकड़ ढीला कर, राज्ञा को देखा |      राज्ञा उसके बाहों में बेफिक्री से नींद ले रही थी | वही त्रिहांश झुक कर उसके माथे पर किस कर बोला,""_ कुछ भी हो जाए तुम मुझसे अलग नही होगी ,कभी नही | "        पूरी रात ऐसे ही निकल गया लेकिन त्रिहांश एक सेकंड के लिए भी अपने आंखे बंद नही किया या यू कहे की उसके आंखो में नींद कोसो दूर थी |    सुबह के 8 बजे की आस पास राज्ञा की आंख खुली | वह कसमसाते हुए इधर उधर हिलने को हुई लेकिन वह त्रिहांश के बाहों में फस चुकी थी | वह अपना सर उठा कर त्रिहांश को देखी,त्रिहांश बिना भाव के उसे ही देख रहा था |     राज्ञा थोड़ी देर उसे देखी फिर उठने कसमसाते हुए बोली,""_ hmmmm छोड़िए न त्रिहांश..!! "   त्रिहांश एक गहरी सांस लेते हुए उसे ले कर ही उठ गया | फिर उसके गाल सहलाते हुए बोला,""_ hmmm ..जल्दी से रेडी हो जाओ हमे कही जाना है |   राज्ञा थोड़ी देर देखी फिर हा में सर हिलाते हुए उससे अलग हो कर वाशरूम में चली गई | वही त्रिहांश अपने फोन में कुछ करते हुए बालकनी में चला गया |   पुश्तैनी हवेली.....,          इशान इस वक्त अपने फोन चेक करते हुए बैठा था | उसके फोन में अब तक सौ से भी ज्यादा missed calls आहिरा के नंबर से आए थे | इशान के चेहरे पर इस वक्त हल्की सी स्माइल थी | वह जितना दूर जाए वह लड़की उसके पीछे ही भाग आने लगती |     इशान कुछ सोचते हुए अहीरा का नंबर डायल कर कॉल किया |     वही हवेली की बाहर एक ब्लैक कार आ कर रुका | ड्राइवर बाहर आ कर कार का door open किया तो आर्यांश कार से बाहर आया | उसके चेहरे पर इस वक्त अलग ही चमक था और यह चमक सिर्फ उर्मी के लिए था | आर्यंश उर्मी के लिए आया था वैसे उर्मी ने उसे अभी तक बताया नही था ,की वह मनाली में कहा टेहरी है ? बस अर्यांश ने सोचा था की वह एक बार माया और सुधर्व से मिल कर उर्मी को मिलने जाएगा |     वही बैक सीट पर बैठे हुए आहिरा का मुंह उतरा हुआ था | वह इशान को बताना चाहती थी की वह मनाली जा रही है लेकिन इशान उसके कॉल पिक करे तब ना ,वह कल से कॉल पे कॉल किया जा रही थी लेकिन इशान उसका एक कॉल पिक तक नही किया था |    आर्यांश विला के अंदर जाने को हुआ की तभी उसे मेहसूस हुआ की उसकी बहन कार से बाहर ही नहीं उतरी है | वह मुड़ कर अहीरा के तरफ देखा | अहीरा मुंह फूला कर चुपचाप फोन के स्क्रीन को घूरते हुए बैठी थी |   आर्यांश अहीरा के पास जाता की तभी आही का फोन रिंग होने लगा ,अहीरा ने एक नजर फोन के स्क्रीन को देखा कॉल उसका इशान का था |       इशान का कॉल देख कर उसे अब कोई खुशी नही हुई | वह गुस्से से कॉल काट कर बड़बड़ाते हुए बोली,""_ यह इंसान.. ज्यादा ही भाव खा रहा है,हम्मम अभी बताती हु इसे इग्नोर करना क्या होता है ? और कैसा लगता है ? "       " आही...बाहर आओ हम पहुंच गए है | " अर्यांश वापस कार के पास आते हुए बोला |    अहीरा ने अपना सर घुमा कर अर्यांश को देखी,फिर बिना कुछ कहे कार से बाहर आ कर अंदर चली गई |इशान का रूम....       इशान एक टक अपने फोन के स्क्रीन को घूर रहा था | आहिरा ने उसका कॉल काट दिया था | वह फिर से अहिरा को कॉल ट्राई करते हुए रूम से बाहर चला गया |     हाल में इस वक्त इशा और उर्मी बैठ कर आपस में बात कर रहे थे | वह दोनो इस वक्त कन्फ्यूज में लग रहे थे क्यों की कोई उन्हे अभी तक बता नही रहा था की वह लोग यहां क्यों आए है ? और हेविली में अखरी क्या हो रहा है ? उन्हे समझ नही आ रहा था |     तभी उन दोनो की नजर एक साथ door के तरफ गया और वह दोनो हैरानी से एक दूसरे को देखते हुए एक साथ बोले,""_ आर्यंश..? जीजू  ?      उर्मी हैरानी से अर्यांश को देखने लगी लेकिन अचानक से उसकी आंखे छोटी हो गई | वह गुस्से से आर्यंश को देखने लगी जो अहीरा के हाथ पकड़ कर उसके हाथ बात करते आ रहा था |  " दी ...जीजू के साथ यह लड़की कोन है ? " इशा ना समझी में अहीरा और अर्यांश को देखते हुए पूछी | उर्मि बस अर्यांश को देख रही थी | वह उसके पास जाने को हुई की तभी उसके कान में माया की आवाज सुनाई दी |   "   अंश....!! आही.....!! "  माया ,अहीरा और अर्यांश के पास जाते हुए उन्हे आवाज़ लगाई | वही अहीरा का मन पहले से ही उदास था लेकिन अपनी मां की आवाज सुन वह जल्दी से उनके गले लगते हुए बोली,""_ मम्मा...i Missed you so much | "   अहीरा को देख अर्यांश भी माया की गले लगने को हुआ की तभी उसकी नजर उर्मी पर गई | जो हैरानी से उन तीनो को ही देख रहे थे |     अर्यांश ना समझी में उर्मी को देखने लगा | उसे इतना पता था की उर्मी मनाली आई है और वह भी उसके लिए ही आया था लेकीन उर्मी उसे अपने ही घर में मिल जाएगी उसने नही सोचा था |     माया आहिरा से अलग हो कर अर्यांश को गले लगने आगे बढ़ने को हुई लेकिन आर्यंश का ध्यान उस पर था ही नही ,वह उर्मी को देख रहा था | माया उसकी नज़रे फॉलो करते हुए मुड़ कर देखी | उर्मी और अर्यांश एक दूसरे के देख रहे थे | माया का चेहरा गुस्से से भर गया,वह अर्यांशा का चेहरा अपने तरफ घुमा कर गुस्से से बोली,""_गलत जगह अपने नज़रे मत डालो अंश,अंजाम बहुत बुरा होगा |"        आर्यांश की आइब्रोज सिकुड़ गए | वह एक नजर उर्मी को देखा,जो माया की बात सुन अजीब सा रूवास सा हो गया था | आर्यंश बोला ,""_ क्या मतलब है mom... मै कहा गलत जगह .....!!! "  आर्यांश अपनी बात पूरा कर ही नही पाया क्यों की उसकी नजर बार बार उर्मी पर जा रही थी | उर्मी का चेहरा उतर गया था | क्यों की माया की बात सुन उसे समझने में देर नहीं लगा की माया उसे बिलकुल पसंद नहीं करती है |      माया गुस्से से आर्यांश को देख रही थी | जो अभी भी उर्मी को देख रहा था | माया गुस्से से आर्यंश से अपने दांत पीस कर बोली,""_ अर्यांश....!! "    आर्यांश माया को देखने लगा | वही माया बोली,""_ अग्निहोत्री परिवार के किसी भी शेक्स से हमे कोई रिश्ता नही रखना है अंश,इसीलिए बेहतर होगा तुम उससे दूर रहो | "    बोलते हुए माया किसी को कॉल करते हुए बाहर चली गई | वही माया की बात सुन अहीरा का चेहरा भी रोनी जैसा हो गया था | वह भी तो इशान से प्यार करने लगी थी हो अग्निहोत्री परिवार से शामिल था |     " भाई ,मम्मा यह क्या कह रही है ? हम अग्निहोत्री के साथ रिश्ता क्यों नही रखेंगे ? " अहीरा, आर्यंश का हाथ पकड़ कर रुंधली सी आवाज में पूछी | आर्यंश इस वक्त हैरानी से माया को देख रहा था | वह अहीरा के सर पर हाथ फेरते हुए कुछ कहता की तभी उसकी आंखे छोटी हो गए ,वह घूर कर अहीरा को देख पूछा ,""_ तुम.....तुम किसी से प्यार कर रही हो ? "   अहीरा रोनी सी शकल बना कर बोली,""_ इशान से...इशान अग्निहोत्री...और आप ?  "   अहीरा बोलते हुए उर्मी के तरफ देखने लगी | अर्यांश को उर्मी की तरफ देखता देख उसे समझ आ गया था की आर्यांश उर्मी से प्यार करने लगा है | सबकुछ यहां अजीब सा हो गया था |     उर्मी और अर्यांश ने अपना प्यार का इजहार एक दूसरे से कर गए थे लेकिन माया की बात सुन वह दोनो परिशान हो गए थे | वही अहीरा भी परिशान थी लेकिन उसे पहले पूरी तरह इशान को पटाना था , क्यों की वह इंसान उसे भाव ही कहा देता था ?       अर्यांश ने अपना सर हिलाया | उर्मी के पास जाने को हुआ की तभी उर्मी अपने रूम के तरफ भाग गई | वही सीढ़ियों के पास इशान भी खड़ा था | माया की बात सुन उसे कोई हैरानी नही हुई क्यों की इशान जितना राठौड़ और अग्निहोत्री फैमिली की दुश्मनी के बारे में जानता था उतना आर्यांश ,अहीरा ,और उर्मी नही जानते थे | यहां तक की उन तीनो को यही लगता था की दोनो फैमिली बिजनेस राइवल है |    अर्यांश उर्मी के पीछे चला गया | वही अहीरा हवेली को देखते हुए आगे बढ़ने को हुई की तभी उसकी नजर इशान से जा मिली जो कबसे उस पर ही टिका का खड़ा था |     इशान को देखते ही अहीरा की चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गई थी ,लेकिन उतना ही जल्दी उसकी स्माइल गायब भी हो गई थी | वह एक टक इशान को घूरते हुए अपने मन में बोली,""_ प्यार तो मुझसे ही करते है लेकिन जनाब को ना इज़हार करना है और नाही मेरे किसी भी काल या मैसेज का रिप्लाई देना है ,बड़ा शौक चढ़ा है न इग्नोर करने का...रूको मैं बताती हु, इगनोर करना क्या होता है ? "   अहीरा इशान से नज़रे हटा कर सीडियो के पास गई | इशान उसे ही देख रहा था | आहिरा फिर बिना उसे एक नज़र देखे ही उसके पास में से ही गुजर कर रूम के तरफ चली गई | यह देख इशान की आइब्रोज सिकुड़ गए थे | उसे लगा था की वह लड़की उससे बात करेगी लेकिन आही तो उसे इग्नोर कर गई थी |    वही अहीरा मन ही मन हंसते हुए रूम के तरफ गई |   त्रिहांश का विला .....,       राज्ञा रेडी हो कर क्लोसेट रूम से बाहर आई | त्रिहांश इस वक्त बालकनी में खड़े हो कर फोन पर किसी से बात कर रहा था |    राज्ञा उसे एक नजर देखी फिर उसका wait करते हुए बेड पर बैठ गई | थोड़ी देर में त्रिहांश रूम में आया |      " Let's go....!! " त्रिहांश राज्ञा का हाथ पकड़ कर रूम से बाहर ले जाते हुए बोला |      " हम कहा जा रहे है त्रिहांश ? " राज्ञा त्रिहांश के पीछे जाते हुए पूछी | वही त्रिहांश की कदम अपने आप रुक गया थे ,वह मुड़ कर उसे घूरने लगा तो राज्ञा मुंह बनाते हुए बोली,""_ नही बताना है तो इग्नोर कर दीजिए न त्रिहांश,ऐसे घूरने की क्या जरूरत है ? "      त्रिहांश उसे ही अपने थीकी नजरों से देखता रहा ,वही राज्ञा का अब रोनी सी शकल बन गया | उसने उसे ऐसा भी क्या पूछ लिया था जो यह इंसान उसे ऐसे घूरने लगा ? राज्ञा अपना सर नीचे कर फर्श को घूरने लगी |     वही उसका इस तरह डरा हुआ चेहरा देख त्रिहांश के होंठ मुड़ गए थे | वह उसे ले कर विला से बाहर निकल गया |    हवेली में ......        धीरांश सोफे पर बैठा हुआ था | उनका चेहरा बेहद सख्त और बिना एक्सप्रेशन से भरा था | और उनकी नजर बार बार door के तरफ था | उन्हे देख ऐसा लग रहा था की उन्हे किसी के आने का इंतजार हो |       वही वेदिका,दिया,आरव ,अजय चुप चाप खड़े थे | विनोद इस वक्त धीरांश के बगल में ही बैठा था | और उसके चेहरे पर इस वक्त टेंशन साफ साफ नजर आ रहा था |   तभी माया वहा आते हुए धीरांश से बोली,""_ देखा बाबा सा ,वह उसे नही ले आया और मुझे लगता है वह आएगा भी नही | "    माया ने बस अपनी बात पूरा किया ही था की हेवीली की बाहर कार रुकने की आवाज सुनाई दी | वही धीरांश माया के तरफ देखने लगा | माया की नजर door के तरफ गई थी ,वह जल्दी से बाहर जाने को हुई की तभी धीरांश की आवाज ने उसे रोक लिया |      " रुक जाओ माया...| "  माया मुड़ कर धीरांश को देखने लगी | वही धीरांश आगे बोला,""_ भले ही वह तुम्हारी बेटी होगी लेकिन उस पर त्रिहांश का हक है क्यों की उसने उससे शादी की है,तो अब तुमसे ज्यादा तुम्हारी बेटी पर उसका हक है | "          माया की हाथो की मुट्ठी बन गई |     हवेली के बाहर..., त्रिहांश कार से बाहर आ कर पैसेंजर सीट का door open किया | राज्ञा बैठे बैठे ही उस हवेली को देख रही थी ,कुछ कुछ अपना सा लग रहा था |      त्रिहांश उसके हाथ पकड़ कर हल्के से दबाता है तो राज्ञा का ध्यान त्रिहांश पर गई | त्रिहांश उसे कार से बाहर आने का इशारा किया | To be continued......."