Chapter 40: chapter 40

Billionaire's Dark DesireWords: 30332

  अब आगे ........     अग्निहोत्री मेंशन.....    त्रिहांश का कार आ कर जोर से ब्रेक लगाते हुए मेंशन के सामने रुक गया | त्रिहांश कार से बाहर आ कर अंदर चला गया | हाल में इस वक्त अजय और विनोद आपस में ही बात करते हुए बैठे थे और उनके चेहरे पर बेहद सीरीयस एक्सप्रेशन नजर आ रहा था |    त्रिहांश गुस्से में था | तो वह उन्हें बिना देखे बिना कुछ कहे अपने रूम के तरफ चल पड़ा | तभी विनोद ने उसे आवाज लगाया ,""_ त्रिहांश.....!! "    त्रिहांश रुक कर उनके तरफ देखने लगा | वही विनोद उसके पास जा कर बोला,""_ तुम उस लड़की को राठौड़ मेंशन छोड़ आओ .....!!! "       त्रिहांश का औरा बेहद सर्द हो गया | वह अपने दांत टटोरते हुए विनोद को घूरने लगा | तभी अजय विनोद की बात में हामि भरते हुए बोला,""_ माया और सुधर्व मनाली गए हुए है त्रिहांश और बाबा सा तो......|  अजय अपनी बात पूरा करता उससे पहले ही त्रिहांश ने गुस्से से वहीं पास में रखे हुए एक वास उठा कर नीचे फर्श को दे मारा | वही अजय की आगे की बात उसके गले में ही अटक गए थे | वह गुस्से से त्रिहांश को देखने लगा जिसका औरा इस वक्त किसी शैतान से भी कम नहीं लग रहा था |    त्रिहांश गुस्से से अपने एक एक बात भी चबाते हुए बोला,""_ वह मुझसे एक पल के लिए भी अलग नही होगी अगर उसे कोई मुझसे अलग करना चाहा तो मैं बिना सोचे समझे उनकी सांसे छीन लूंगा मिस्टर अग्निहोत्री,आज आप लोगो ने कह दिया ..दुबारा मत कहिएगा | "     त्रिहांश गुस्से से अपने रूम के तरफ चला गया | वही अजय गुस्से से पास में रखे हुए सारे चीज़े उठा कर नीचे फेंकते हुए बोला ,""_ यह लड़का......इसे हो क्या गया है बाऊजी ? यह उस लड़की के लिए इतना पागल क्यों है ? "  "  उस लड़की के लिए नहीं उसकी जिस्म के लिए पागल है | " विनोद एक टक त्रिहांश को रूम में जाता हुआ दख बोला तो अजय फ्रस्ट्रेट हो कर उसे देखने लगा |   वह फिर वेदिका को आवाज लगा कर बोला,""_ वेदू.... समाना पैक करो हम मनाली जा रहे है |        अजय इतना गुस्से से बोल कर वहा से चला गया |     त्रिहांश का रूम......    त्रिहांश गुस्से से रूम में गया | वह अपने नज़रे इधर उधर दौड़ाने लगा उसे राज्ञा की पायल और चूड़ियो की आवाज बालकनी से सुनाई दे रहा था |       त्रिहांश फिर बालकनी में चला गया | राज्ञा इस वक्त रेलिंग को टिक कर चुपचाप खड़ी थी | त्रिहांश उसके पास आ कर उसे अपने तरफ घुमाया , राज्ञा के चेहरे पर कोई भाव नही था    और रो नही रही थी लेकिन उसके आंखे सूझ गए थे |      त्रिहांश को बहुत गुस्सा आ रहा था ,लेकिन वह उसे हर्ट ना करने का सोच कर,उसके गले लग कर उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपाया |       राज्ञा थोड़ा कसमसाने को हुई की तभी त्रिहांश उसे पूरी तरह अपने बाहों में जकड़ लिया तो राज्ञा कसमसाते हुए उसका नाम ली ,""_ mmm त्रिहांश ....| "    त्रिहांश उसे कमर से उठा कर रूम में ले जाते हुए बेहद सर्द आवाज में बोला,""_ शश्श.....No words राज्ञा...| "   बोलते हुए त्रिहांश उसे बेड पर आराम से लिटा कर उसके ऊपर आ गया | राज्ञा को कुछ समझ ही नही आया था वह उसे कुछ कहती उससे पहले ही त्रिहांश उसके दोनो हाथो में अपने हाथो को फसा कर उसके गर्दन को चूमते हुए उसके ऊपर ही लेट गया |    राज्ञा इधर उधर हिलने को हुईं तभी त्रिहांश ने कहा,""_ मुझे पता है तुम्हारे पीरियड चल रहा है ,लेकिन मैं तुमसे दूर नही रह सकता ,मुझे अभी तुम्हे फील करना है राज्ञा...चुपचाप ऐसे ही लेटी रहो ..| "     राज्ञा ने कुछ नही कहा और नाही अब वह हिलने की कोशिश करने लगी | वही त्रिहांश उसके दोनो हाथो को बेड में ही दबाते हुए उसके गर्दन को किस करते हुए उसके चहरे तक आ गया |    राज्ञा की मुंह से आह निकलने लगे थे | वही त्रिहांश बहुत ही बेचैनी से उसे किस कर रहा था | राज्ञा धीरे से उसके आंखो में देखते हुए पूछी,""_ आ.. आप ठीक तो है न ? "    त्रिहांश अपना चेहरा ऊपर कर राज्ञा को देखा, राज्ञा उसके जवाब का इंतज़ार करते हुए उसे ही देख रही थी | त्रिहांश ने उसे कुछ भी नही बताया | बस वह उसे देख रहा था |     N  तभी राज्ञा उसके गालों पर उंगलियां फेरते हुए बोली,""_ आप इतना बैचैन क्यों लग रहे है ? "   त्रिहांश बिना भाव के उसे देख रहा था | वह फिर उसे ले कर पलट गया | जिससे राज्ञा अब उसके ऊपर आ गई | वहीं त्रिहांश उसके लटो को कान के पीछे सरकाते हुए बोला ,""_ मेरी इस बेचैनी की वजह तुम हो राज्ञा, | "    राज्ञा ना समझी में उसे देख पूछी,""_ मैं....!!! "  " हा तुम ...!!! " बोलते हुए त्रिहांश उसे ले कर फिर से पलट गया तो राज्ञा फिर से त्रिहांश के नीचे आ गई | वही त्रिहांश उसके पूरे चेहरे पर भारी भारी से किस करते हुए बोला,""_ हम अभी मनाली जा रहे है !! "     राज्ञा अपनी बड़ी बड़ी पलके बार बार जपकाते हुए उसे ही देखने लगी | वही त्रिहांश अपने होंठो को राज्ञा के होंठो के करीब ले गया था | वह धीरे से उस लड़की की होंठो को अपने होंठो के गिरफ्त में ले लिया |     वही त्रिहांश के होंठो को मेहसूस करते ही राज्ञा की पकड़ त्रिहांश के शर्ट में कस गए थे | वह अपने आंखे बंद कर उसे फील करने लगी | वही त्रिहांश उसके होंठो को चूमते हुए उसे ही देख रहा था | भले ही उसने राज्ञा को अपने साथ रहने के लिए मजबुर किया था ,लेकिन वह उसके तरह बेचैन नही थी वह उसके साथ अब बहुत कंपरटेबल फील करते हुए रहने लगी थी | आस पास के चीज़े उसकी वजह से किस हद तक बिगड़े है यह राज्ञा को अंदाज ही नही था या यू कहे की त्रिहांश उसे अपने में ही पूरी तरह उलझा कर रख दिया था |    कुछ ही देर में राज्ञा की सांसे फूलने लगे | वह छटपटाते हुए त्रिहांश के सीने पर हाथ रख कर उसे खुद से दुर करने को हुई की तभी त्रिहांश ने उसके होंठो को छोड़ कर उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपाया |       राज्ञा के दोनो हाथ अब त्रिहांश के कंधे में ही कस गए थे | वह हल्के से आहे भरते हुए त्रिहांश के कान को चूमने लगी | त्रिहांश उसे मदहोश कर रख दिया था और वह त्रिहांश के बाहों में खुद को खोने से रोकना भी नही चाहती थी लेकिन वह उस हाल में नही थी ? उसके पीरियड चल रहे थे |         त्रिहांश धीरे से उसके कमर को सहलाते हुए उसके दोनो पलकों पर किस करते हुए अपने होंठो को उसके गालों तक ले आया | वही राज्ञा उसके बाहों में मचलते हुए उसके बाहों में उंगलियां फिराने लगी थी | उसके दोनो पैर आपस में रब कर रहे थे |           त्रिहांश धीरे से उसके होंठो को अपने दांतो के बीच फसाते हुए उसे देखने लगा तो राज्ञा छटपटाते हुए आवाज निकाली,""_ अह्ह्ह् mmmmm | "    त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह उसके होंठो पर जोर से किस किया फिर उससे अलग होते हुए बोला,""_ चलो तुम रेडी हो जाओ हमे निकलना है | "    राज्ञा उठ कर बैठ गई | फिर वह अपने ड्रेस ठीक करते हुए त्रिहांश से पूछी ,""_ हम कैसे जा रहे है त्रिहांश ? "   पूछते हुए राज्ञा की आवाज में डर और बेचैनी साफ साफ नजर आ रहा था | वही त्रिहांश को अच्छे से समझ आ रहा था की राज्ञा क्यों डर रही है ?     त्रिहांश उसके गालों पर उंगलियां फिराते हुए बोला ,""_कुछ नही होगा तुम.....| "  " नही ..मुझे डर लग रहा है त्रिहांश ..हम कार मे चलते है ना ? " त्रिहांश की बात को बीच में ही रोकते हुए राज्ञा कहती है | त्रिहांश उसे बिना भाव के देख रहा था | आज सुबह ही उनका जेट ब्लास्ट हुआ था | अगर त्रिहांश जल्दबाजी करते हुए उसे ले कर बाहर जंप नही मारता तो इस वक्त दोनो भगवान के प्यारे हो जाते |    राज्ञा आस भरी नजरों से उसे ही देख रही थी | त्रिहांश बेड से उठते हुए बोला ,""_ सिर्फ दस मिनट है तुम्हारे पास ...जल्दी से रेडी हो आना | "    बोलते हुए त्रिहांश रूम से बाहर निकल गया | वही राज्ञा का मुंह बन गया था | वह तो भूल गई थी..की उसके पति को उसकी बात मानने की आदत ही कहा थी ? वह खडूस इंसान वही करता था जो वह करना चाहता था |      राज्ञा क्लोसेट रूम में चली गई |     मनाली....      सुधर्व और माया हवेली की बाहर खड़े थे | वही ज़िप में से एक बूढ़ा आदमी बाहर आया | उस आदमी का चेहरा बेहद सख्त और बिना एक्सप्रेशन के था | वह इस वक्त काला कुर्ती और काला पैजाम पहना हुआ था | उसके हाथ में एक स्टिक था ,जिसके सहारे वह चलते हुए आगे आया तो उसकी नजर माया और सुधर्व पर गई |     वह दोनो उसे बूढ़े आदमी को ही देख रहे थे | वह बूढ़ा आदमी उन्हे थोड़ी देर देखा फिर बिना कुछ कहे अंदर चला गया | उसके चेहरे पर अब नाराज़गी ने जगह ले लिया था | वह कुछ ना खुश सा लग रहा था |      वही माया और सुधर्व एक दूसरे को देखे फिर अंदर चले गए | दुसरी तरफ........        आर्यांश के कार में इस वक्त अजीब सी आवाज गूंज रही थी | और वह आवाज उर्मी के थे ,जो मदहोशी से निकल रहे थे |      आर्यांश उर्मी को अपने बाहों में लिए ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ था | और आर्यंश के हाथ उर्मी के खुले पीठ पर सरक रहे थे तो वही उसके होंठ उर्मी की गालों पर ,वही उर्मी डरते हुए बस नम आंखों से देख रही थी |      विराज की वजह से ,उसकी गंदी निगाहों को अपने बदन पर मेहसूस कर उर्मी खुद में ही अजीब सी गिन्न मेहसूस कर रही थी | अर्यांश उसे इस तरह चूमते हुए उसका माइंड डायवर्ट करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह लड़की एक घंटे से बस उस लड़के के बारे में ही बोले जा रही थी |       तभी उर्मी का फोन रिंग होने लगा | उर्मी ने फोन चेक करते हुए कहा,""_ मम्मा का कॉल है ? "   उर्मी ने कॉल पिक किया तो उधर से वेदिका बोली,""_ उर्मी बच्चा ...कहा हो तुम ? जल्दी से घर आ जाओ बच्चा ,हमे कही जाना है | "    उर्मी ना समझी में उससे पूछी ,""_ कहा मम्मा ?"  मनाली......!! " वेदिका ने इतना बोलते हुए कॉल काट दिया | उर्मी ना समझी में फोन के स्क्रीन को देखते हुए बोली,""_ मनाली.....…लेकिन अचानक से क्यों ? !"       अर्यांश उसे ही देख रहा था | वह फिर उसके चेहरे को अपने तरफ घुमा कर उसे सवालिया निगाहों से देखते हुए पूछा,""_ क्या हुआ उर्मी ? "  उर्मी उसके बाहों में लिपटते हुए बोली,""_पता नही मम्मा कह रही है की अभी घर आ जाए ,मनाली जाना है | "    आर्यांश की आइब्रोज सिकुड़ गए | वह ना समझी में उर्मी को देख बोला,""_ अब तुम मनाली जा रही हो ? मेरा क्या होगा ? "  उर्मी की चेहरे पर स्माइल आ गई | वह उसके नाक पिंच करते हुए बोली,""_ hmmm मेरे वापस आने तक आप देवदास बने रहिए ..!! "    आर्यंश अपना नाक रब करते हुए उसे घूर कर देखने लगा लेकिन तभी उसे याद आया की उसकी मां बाप भी इस वक्त मनाली में ही है  | वह कुछ सोचते हुए अपने मन में बोला,""_hmm mom डैड भी इस वक्त मनाली में ही है ...मै भी आही को ले कर आज ही मनाली चलता हु ताकि मुझे उर्मी से दूर भी न रहना पड़े | "    अर्यांश ...? " किसी सोच में घूम आर्यंश को देख उर्मी उसके गाल को सहलाते हुए उसका नाम लीया | वही अर्यांश उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए बोला,""_ चले ...? "   उर्मी अपना सर हा में हिलाते हुए बोली,""_हा ...लेकिन वापस आने तक आप मुझे भूल कर किसी और के पीछे तो नही भागेंगे न ?.      अर्यांश की बाहें तन गए | वह सख्ती से बोला ,""_ मै उन लड़कों में से नही हु उर्मी जो कपड़ो की तरह लड़कियोंको बदल लेते है ,अगर एक बार किसी पर दिल आ गया है तो जिंदगी भर मैं सिर्फ उसी का हाथ थाम कर रहूंगा | "  आर्यंश का चेहरा बेहद सख्त था | यह देख उर्मी उसके गाल पर किस करते हुए बोली,""_ मैं बस मज़ाक कर रही थी अर्यंश सॉरी ..!! "   अर्यंश उसके माथे पर किस कर बोला,""_दुबारा मत करना | "    बोलते हुए आर्यांश उर्मी को अपने बाहों में भर लिया| थोड़ी देर बाद वह उससे अलग होते हुए पूछी,""_ तुम उस आदमी को ढूंढ कर पनिश....? "      उर्मि अभी अपनी बात पूरा भी करती उससे पहले ही आर्यांश उसके होठों पर उंगली रख कर उसके बात को बीच में ही रोक लिया | उर्मि उसे ही डरी सी , सेहमी सी नजरों से देखने लगी थी | तभी आर्यंश उसके गाल को सहलाते हुए बोला,""_तुम्हे इतना डरने की जरूरत नही है उर्मी,वह जो कोई भी होगा मुझसे बच कर नही जाएगा | "   उर्मी ने बस अपना सर हा में हिला कर उसके गले से लगी | तभी एक बार फिर से उसका फोन रिंग होने लगा | उर्मी और अर्यांश दोनो ही फोन के स्क्रीन को देखने लगे | कॉल फिर से वेदिका का ही था |    यह देख आर्यंश उर्मी को पैसेंजर सीट पर बैठाते हुए कार स्टार्ट किया | वही उर्मी वेदिका का कॉल पिक कर बात करने लगी |     अग्निहोत्री मेंशन.....     त्रिहांश हाल में अपने फोन में कुछ करते हुए खड़ा था | उसका चेहरा इस वक्त बेहद सीरीयस था तभी उसके कान मे राज्ञा की पागलों की आवाज सुनाई दी तो वह अपना सर ऊपर कर राज्ञा को देखा |      राज्ञा उसे ही अपने आंखे टिमटिमाते हुए देख रही थी | लेकिन उसके चेहरे पर डर साफ साफ नजर आ रहा था | वह इस वक्त इसीलिए डर रही थी की कही त्रिहांश उसे फिर से जेट में ले कर ना जाए |    त्रिहांश उसके पास जा कर उसके तरफ अपना हाथ बढ़ाता है तो राज्ञा धीरे से उसके हाथ को पकड़ते हुए उसका नाम लि,""_ त्रिहांश....!! "    त्रिहांश बिना कुछ कहे उसे ले कर अपने साथ बाहर चला गया | वही सारे घरवाले उन्हे ही देख रहे थे | वह लोग भी निकलने वाले थे लेकिन वह सब उर्मी और इशान का आने का वेट कर रहे थे | जो अभी तक घर नहीं आए हुए थे |     मेंशन के पीछे ही समर चॉपर रेडी किया था | त्रिहांश राज्ञा को ले कर आगे बढ़ा तो राज्ञा का रोनी सा शकल बन गया | वह रूंधली सी आवाज में उसका नाम लेते हुए अपने जगह में रुकी तो त्रिहांश मुड कर उसे घूरने लगा |     उसे घूरता देख राज्ञा डरते हुए अंदर जा कर बैठ गई | वही उसके पीछे ही त्रिहांश और समर भी अंदर जा कर बैठ गए तो उनका चॉपर मनाली के लिए उड़ान भरा |    राज्ञा अपने दोनों हाथों को आपस में ही उलझ कर अजीब  सी बेचैनी मेहसूस करते रब कर रही थी | क्योंकि वह डर रही थी कि कही यह चॉपर भी जेट की तरह ब्लास्ट ना हो जाए |     त्रिहांश उसके बगल में ही बैठा था | राज्ञा को इतना डरा हुआ देख वह उसे अपने गोद में बैठा कर अपने बाहों में भरते हुए उससे बोला,""_ मेरे रहते हुए तुम्हे और तुम्हारे इस जिस्म को कुछ नही हो सकता राज्ञा,just relax | "      राज्ञा की माथे पर शिकन आ गए थे | वह उसके गले लगते हुए बोली,""_ लेकिन मुझे डर लग रहा है त्रिहांश ..!!! "   त्रिहांश ने आगे उसे कुछ नही समझाया | वह उसके हाथ को अपने हाथ में फसा कर झुक कर उसके माथे को किस किया फिर उसके उंगलियों से खेलते हुए अपना सर सीट को टिका कर अपने आंखे बंद किया | त्रिहांश बाहर से ही इतना शांत नजर आ रहा था लेकिन वह अंदर ही अंदर बिना पानी की मछली की तरह बैचैनी मेहसूस कर रहा था |       राज्ञा भी अपने आंखे बंद कर उससे लिपटी थी | उसका चेहरा त्रिहांश के गर्दन में छुपा हुआ था | वह अपने नाक के नोक से उसे छूते हुए इधर उधर अपना चेहरा घुमाने लगी थी | वही उसकी इस हरकत से त्रिहांश की चेहरे पर शैतानी हंसी आ गई थी | वह उसे कमर से पकड़ कर अपने आपसे चिपकाया फिर अपने आंखे खोल कर उसे देखा , राज्ञा का चेहरा अभी भी उसकी गर्दन में ही छुपा था |      To be continued......