Chapter 29 of 59

chapter 29

Billionaire's Dark Desire2,866 words~15 min read

  अग्निहोत्री मेंशन.......        इशान एक टक अपने फोन के स्क्रीन को घूर रहा था | वही उधर से अहीरा बिना रुके किस करने की आवाज निकाल रही थी ,ताकि इशान को समझ आए की वह उसे किस दे रही है | वह रुक कर बोली,""_ I love you my handsome boy......| "    इशान को उसका इस तरह किस करना, उसकी बाते सुकून पहुंचा रहा था ,लेकिन उसने उसे जवाब में कुछ नही कहा | वही उधर से अहीरा आगे बोली,""_ तुम कुछ क्यों नहीं कह रहे ? मैने तुम्हारे आंखो में अपने लिए प्यार और पोसेसिवेनेस दोनो देखी है,इसका मतलब तुम भी मुझसे प्यार करते हो ..तो तुम यह मत कहना की तुम मुझसे प्यार नही करते ? "     इशान थोड़ी देर चुप रहा,फिर उसकी बात को इग्नोर कर सख्ती से उससे पूछा,"" _तुम आज मेरे घर क्यों आई थी ? "    अहीरा एक दम से खामोश हो गई | उसे समझ नही आ रहा था की उसे इशान को बताना चाहिए या नहीं ...उसे अर्यांश ने इतना कहा था की वह राज्ञा से मिलने जा रहे है ..लेकिन इस तरह चुप चुप कर क्यों गए यह उन्हे भी नही पता था |    "  हम्मम....नही बताना चाहोगी तो मत बताओ,देर से ही सही मुझे पता चल ही जाएगा | " अहीरा को कुछ भी जवाब ना देता देख इशान थोड़ा सख्ती से बोला |  वही उधर से अहीरा धीमी आवाज में बोली,""_ वह हम...हम वहा कुछ लुटने या किसी को हर्ट करने नही आए थे बस ...वह...| "   अहीरा थोड़ा हिचकिचा रही थी | क्यों की उसे समझ नही आ रहा था की उसे इशान से कहना है या नही | वही इशान को समझ आ गया था की अहीरा को बताना नही है |    तभी इशान बोला,""_ कॉल क्यों किया तुमने ? "   उधर से अहीरा का चेहरा गुस्से से भर गया | उसने आज ही इशान से प्रपोज किया था तो ऑफकोर्स वह इस वक्त उससे बात करने ही की है | लेकिन यह आदमी समझे तब ना ?    वह गुस्से से बोली,""_ आपने कॉल क्यों पिक किया ? "     इशान की होंठ मुड़ गए,वह थोड़ी देर अहीरा का गुस्सैल  फेस याद करने लगा | वह फिर उसे और सताते हुए  बोला,""_ ठीक है अभी cut कर देता हु | "  बोलते हुए इशान ने कॉल काट दिया | वही उधर इशान की इस हरकत से अहीरा का मुंह बन गया था | वह गुस्से से फोन पटकते हुए बोली,""_ पता नही किस पागल इंसान से मेरा दिल लग गया,यह तो मुझे भाव ही नही दे रहा है |   अहीरा सोचते हुए ऐसे ही लेटी रही |     सुबह का वक्त.....      त्रिहांश का रूम...    त्रिहांश इस वक्त पेट के बल सोया हुआ था | वह शर्टलैस था |       त्रिहांश का एक हाथ उसके चेहरे के नीचे था ,तो दूसरा उसने राज्ञा के कमर में लपेट लिया था |      वही राज्ञा कब का नींद से जाग चुकी थी | और वह एक टक त्रिहांश के चेहरे को देख रही थी | जिसमे इस वक्त भी कोई भाव नजर नही आ रहा था |     "  मुझे ऐसे देखना बंद करो राज्ञा,नही तो मैं तुम्हे अभी खाने लग जाऊंगा | " राज्ञा को कमर से पकड़ कर ,अपने करीब खींचते हुए त्रिहांश ने कहा तो राज्ञा एक ही झटके में त्रिहांश के नीचे आ गई और त्रिहांश उसके ऊपर...वही राज्ञा हैरानी से उसे देखने लगी थी ,लेकिन अचानक से उसकी आंखे छोटी हो गई | और वह गुस्से से उसे देखते हुए पूछी,""_ आप सोए नही थे .....?      त्रिहांश के होंठो पर बेहद डेविल स्माइल था | वह उसकी सवाल को इग्नोर कर ,उसके चेरी जैसे होंठो को अपने होंठो के गिरफ्त में ले कर किस करने लगा | राज्ञा अपने आंखे बड़ी बड़ी कर उसे ही देखने लगी थी | वह फिर उसके गले में अपने दोनो बाहें डाल कर उसके बालो में उंगली फिराते हुए त्रिहांश के किस को फील करने लगी |     थोड़ी ही देर में राज्ञा की सांसे फूलने लगे तभी, त्रिहांश उसके होंठो को बेमन से छोड़ कर उसके माथे से अपना माथा जोड़ कर उसे देखने लगा | राज्ञा तेज़ तेज़ सांस लेने लगी थी | और इससे उसका चेहरा पूरी तरह लाल हो गया था |           वही त्रिहांश उसके होंठो को अपने अंगूठे से सहलाते हुए उसके आंखो मे देखने लगा था | राज्ञा एक टक त्रिहांश के बेजान सी आंखो में ही देख रही थी | त्रिहांश के चेहरे या आंखो में ऐसा कोई एक्सप्रेशंस नजर ही नहीं आ रहा था जो राज्ञा देखना चाहती थी | भले ही उसने यह मान लिया था की त्रिहांश उससे प्यार करे ना करे वह हमेशा उससे प्यार करते ही रहेंगी,लेकिन वह कही ना कही यह चाहती थी की त्रिहांश भी उससे प्यार करे....उसे चाहने लगे..|     त्रिहांश और राज्ञा एक दूसरे को देख रहे थे ,वह दोनो फिर से एक दूसरे के करीब आते की तभी रूम में त्रिहांश का फोन रिंग करने लगा |     राज्ञा अपना सर घुमा कर फोन को देखने लगी,वही त्रिहांश अभी भी उसे ही देख रहा था | वह धीरे से उसके माथे पर किस किया ,फिर राज्ञा से अलग हो कर ,अपना फोन चेक किया कॉल इस वक्त समर का था | त्रिहांश कॉल पिक करते हुए बालकनी में चला |   वही राज्ञा एक नजर घड़ी में टाइम देखी,अभी सुबह के बस 7 ही बज गए थे | वह उठ कर जल्दी से वाशरूम चली गई |        थोड़ी ही देर में राज्ञा रेडी हो कर बाहर आई ,उसने अब एक पिंक कलर की साड़ी पहना था | वह ड्रेसिंग टेबल के पास आ कर अपने पल्लू को ठीक कीया,फिर अपने मांग में हल्के से सिंदूर लगा कर अपने बाल बनाने लगी |      त्रिहांश अब तक रूम में आ गया था | और वह इस वक्त सोफे पर बैठ कर अपने फोन में कुछ मेल्स चेक कर रहा था | लेकिन राज्ञा के बाहर आते ही उसकी नजर राज्ञा पर गई थी |     वही राज्ञा बार बार टाइम देखते हुए जल्दी जल्दी से रेडी हो रही थी,वह फिर अपना पर्स ले कर जाने को मुड़ी तो उसकी नजर त्रिहांश पर गई |    , त्रिहांश की अब तक आइब्रोज सिकुड़ गए थे | अभी तक बस सुबह के 8 ही बज गए थे | और राज्ञा को देख ऐसा लग रहा था की वह कही बाहर जाने की फिराक में है | त्रिहांश उठ कर उसके पास जाते हुए उससे पूछा ,""_ कहा जा रही हो ? वह भी इतनी सुबह सुबह ? "     राज्ञा उसके करीब जा कर धीरे से बोली,""_त्रिहांश ...मैं टाइम पर आफिस पहुंच जाऊंगी त्रिहांश |   त्रिहांश का जबड़ा सख्त हुआ,वह अपने दांत पीसते हुए उससे फिर से पूछा,""_ मैने पूछा ,...तुम अभी कहा जा रही हो राज्ञा? "      राज्ञा त्रिहांश का गुस्सैल आवाज सुन थोड़ा सहम गई | वह अपने कदम थोड़ा पीछे लेते हुए बोली,""_ त्रिहांश..वह मैं.... मैं.....? "      त्रिहांश गुस्से से उसका बाजू पकड़ कर अपने करीब खींचते हुए गुस्से से देखने लगा ,वही राज्ञा दर्द से छटपटाने लगी | त्रिहांश का पकड़ बहुत ही मजबूत था,वह गुस्से में आ रहा था और उसकी यह बीवी उसे जवाब ही नहीं से रही थी |     त्रिहांश राज्ञा की टुडी पकड़ कर उसके चेहरा ऊपर उठाते हुए बोला,""_ अब जवाब दे रही हो या मैं अपनी हैवानगी दिखाते हुए तुम्हे.....!! "  " मिस्टर गौतम से मिलने जा रही हू | " राज्ञा त्रिहांश की बात को बीच में ही काटते हुए जल्दी से बोली | वही त्रिहांश उसे अजीब नज़रों से देखने लगा |     उसका पकड़ भी राज्ञा के बाजू में ढीला हो गया था | वह राज्ञा से पूछा,""_ उस आदमी से अभी क्यों मिलना है तुम्हे ?"   राज्ञा ने उसे एक नजर देखी,फिर वह अपना सर नीचे झुका कर बोली,""_ कल मुझसे मिलने वह किसी को भेजे थे न त्रिहांश,बस मुझे उनके बारे में जानना है ! "   त्रिहांश अपना माथा रब करने लगा | वही राज्ञा बोली,""_ वैसे भी उनसे मिले हुए बहुत दिन हो गया, मैं उनसे मिल कर....| "  " कही नही जा रही तुम | " त्रिहांश गुस्से से राज्ञा की बात को बीच में काटते हुए ऑर्डर भरी लहजे में बोला |    वही राज्ञा का माथा टनका,वह जिद्द करते हुए बोली,""_ मैं ऑफिस ,टाइम पर पहुंच जाऊंगी त्रिहांश,बस एक बार मुझे उनसे मिलना है | "     त्रिहांश उसे पूरी तरह इग्नोर कर क्लोसेट रूम में चला गया | वही राज्ञा को उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था | यह आदमी उसे कही जाने ही नहीं दे रहा था | वह बड़ाबड़ाते हुए बोली,""_ मिस्टर गौतम ने उस अंकल को मेरे पास क्यों भेजा होगा ? क्या उन्हे फिर से मेरी जरूरत पड़ी ? कही मां की तबियत...? Hmmm....कुछ तो बात है तभी तो मिस्टर गौतम ने उन्हें मेरे पास भेजा था. लेकिन क्या ? "     राज्ञा त्रिहांश का बाहर आने का wait करने लगी | त्रिहांश थोड़ी देर में फ्रेश हो कर बाहर आया | और वह क्लोसेट रूम में जाने को हुआ तो राज्ञा उसके पास जाते हुए बोली,""_ त्रिहांश...आप समझ क्यों नहीं रहे ,मुझे बस उनसे एक बार मिलना है ,मैं कह रही हू ना में जल्द ही ऑफिस आ जाऊंगी | "   त्रिहांश इस वक्त सिर्फ टॉवल में था और वह दूसरे तौलिया से अपने बाल पोंछ रहा था | उसे देख ऐसा लग रहा था की वह राज्ञा की बात ही नही सुन रहा हो |     वही राज्ञा बस बोले जा रही थी या यू कहे की वह रिक्वेस्ट करते हुए उससे परमिशन मांग रही थी लेकिन त्रिहांश का मूड ही अलग था |      त्रिहांश को कुछ भी रिएक्ट ना करता देख राज्ञा थोड़ी देर चुप हो कर उसे देखने लगी,तभी त्रिहांश के सवाल ने उसे थोड़ा हौरान कर दिया |    " उस चिराग से तुम शादी क्यों कर रही थी ? " राज्ञा हैरानी से त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश अचानक से उसे चिराग के बारे में क्यों पूछ रहा है |    वही त्रिहांश राज्ञा के बेहद करीब आ कर उसके खुले कमर पर अपने ठंडे हाथ रख कर थोड़ा झुका, फिर राज्ञा के होंठो को अपने दांतों के बीच दबाते हुए उसके कमर को भी प्रेस किया |     अचानक से ऐसा होने से राज्ञा एक दम से उसके बाहों में सिमट गई | वह त्रिहांश से अलग होने की कोशिश करने लगी ,तभी त्रिहांश उसके निचले होंठ को जोरो से काटते हुए उससे अलग हुआ |    "आह्ह्ह्ह्ह् , त्रिहांश....!!! " राज्ञा अपने होंठ सहलाते हुए त्रिहांश को गुस्से से घूरने लगी |   वही त्रिहांश अपने दोनो हाथ उसके कमर में रख कर उसे अपने आप से चिपकाते हुए पूछा ,""_ तुम्हे पता भी है, वह आदमी पहले से ही शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी है | "    त्रिहांश का आवाज यह बोलते हुए बेहद सख्त और गुस्से से भरा था | वही राज्ञा बस उसके गुस्से से भरा हुआ चेहरा देख रही थी | वह फिर अपने पलके नीचे कर उससे बोली,""_ I knew it ( मैं पहले से ही जानती थी )| "   त्रिहांश की आइब्रोज सिकुड़ गए | राज्ञा की जवाब उसे थोड़ा चौंका दिया था क्यों की उसे लगा था की राज्ञा को इसके बारे में बिल्कुल पता नही है और वह चिराग से ऐसे ही शादी कर रही थी | लेकिन अब कुछ और ही नजर आ रहा था |    त्रिहांश राज्ञा को कमर से उठा कर वही रखे हुए एक टेबल पर बैठाया,फिर उसके इर्द गिर्द अपने हाथ रख कर उससे बेहद सख्ती से पूछा,""_ तुम्हे पहले से ही पता था ? और तुम जानबूझ कर शादी शुदा इंसान से शादी कर रही थी ? "   राज्ञा उसे एक नजर देखी,फिर अपना सर ऊपर नीचे करते हुए हा में जवाब दी | वही त्रिहांश की आइब्रोज सिकुड़ गए थे | वह गुस्से से पूछा ,""_ और तुम उससे शादी करके खुद का इतना बड़ा बलिदान क्यों कर रही थी ? जरा बताना "     राज्ञा अपने दोनो हाथ आपस में उलझा कर रब करने लगी | उसे समझ नही आ रहा था की त्रिहांश को यह बात बताना चाहिए या नही ? अगर बता दी तो त्रिहांश उसके परिवार को तकलीफ तो नही देगा न ? भले ही खुराना परिवार से उसे जरा भी प्यार नही मिला था ,लेकिन वह कभी उनके लिए बुरा नही चाहती थी |    राज्ञा को बताने इतना सोचता देख त्रिहांश उसके टुडी को पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर उठाते हुए बोला,""_ अगर तुम् बताना नही चाहोगी तो कोई बात नही राज्ञा, मैं खुद पता करूंगा | "    त्रिहांश का चेहरा गुस्से से भर गया था | उसने राज्ञा का चेहरा झटका कर रूम में जाने को हुआ की तभी राज्ञा ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया |    वही त्रिहांश उसका हाथ झटका कर उसे घूरते हुए सख्ती से पूछा,""_अब बोलोगी भी ...? "  राज्ञा ने अपना सर हिलाया | फिर धीरे से बोली,""_ मिस्टर गौतम ने मुझे मजबूर किया था | "    त्रिहांश की हाथो की मुट्ठी बन गई | वही राज्ञा आगे बोली,""_ मिस्टर गौतम जिस कंपनी में काम करते है,उस कंपनी के बॉस से उन्होंने मां के ऑपरेशन के लिए कुछ पैसे उधार लिए थे ,लेकिन उस कंपनी का बॉस जो की चिराग है ,उसने पैसे के बदले मिस्टर गौतम से मुझे मांगा और गौतम ने बिना सोचे समझे हा कह....| "        राज्ञा का गला भर आया था | वह आगे बोल ही नहीं पाई,....वही त्रिहांश की हाथो की मुट्ठी बन गई थी | उसे राज्ञा की आगे की बात भी समझ आ गई थी |    त्रिहांश को इस वक्त तीन लोग पर बहुत गुस्सा आ रहा था ..पहला माया...इन सबकी जिम्मेदार माया राठौड़ थी | और दूसरा गौतम खुराना, जो हद से ज्यादा गिरा हुआ हरकत उसकी राज्ञा के साथ किया था और तीसरी खुद राज्ञा थी...उसे पता था त्रिहांश पीछे तीन साल से पागल है, फिर भी इस लड़की ने चिराग से शादी करने की फैसला किया था |      त्रिहांश गुस्से से राज्ञा के करीब आ कर उसके चेहरे को अपने हाथो में भरा फिर उसके आंसू पोछते हुए जोर से उसके गाल पर काटा ,तो राज्ञा की मुंह से दर्द भरी चीख निकली |     अअह्ह्ह्ह्ह....!!      वही त्रिहांश उससे अलग हो कर उसके गाल सहलाते हुए उसे घूर कर देखने लगा |  राज्ञा नम आंखों से उसे ही देख रही थी | वह फिर रुंधली सी आवाज में बोली,""_ मुझे दर्द हो रहा है त्रिहांश...आ आप ऐसे अअह्ह्ह्ह...| "      राज्ञा आगे अभी बोल ही रही थी ,की तभी त्रिहांश गुस्से से उसके होंठो को बेहद हारशाली रब करने लगा |    राज्ञा की आंखे दर्द से भींच गए  | वह त्रिहांश का हाथ पकड़ कर रोकते हुए बोली,""_ बहुत दुख रहा है त्रिहांश...!!    बोलते हुए राज्ञा त्रिहांश के सीने में अपना चेहरा छुपाई | वही त्रिहांश गुस्से से अपने हाथो की मिट्टी बना लिया था | राज्ञा रोते हुए बोली,""_ आप मुझसे इतना नफरत क्यों करते है त्रिहांश ? "    त्रिहांश राज्ञा को खुद से अलग कर उसके चेहरा कस कर पकड़ के दबाते हुए बोला ,""_ मै तुमसे नफरत नही करता राज्ञा,तुम इतना खास नही हो जो तुमसे दुश्मनी निभाते हुए अपना कीमती वक्त बर्बाद करु ,सुना तुमने ? "   बोलते हुए त्रिहांश गुस्से से राज्ञा का चेहरा झटकाया,फिर क्लोसेट रूम में चला गया | वही राज्ञा नम आंखों से उसे जाता हुआ देखने लगी |     थोड़ी देर में त्रिहांश रेडी हो कर क्लोसेट रूम से बाहर आया | राज्ञा अभी भी अपने जगह में ही बैठी थी | वही त्रिहांश उसे पूरी तरह इग्नोर कर बाहर जाने लगा ,लेकिन वह रुक कर बेहद सख्ती से उससे बोला,""_ तुम यहां से सीधा ऑफिस आओगी और वहा से सीधा घर और याद रखना तुम्हे इस तरह साड़ी में नही आना है |    त्रिहांश गुस्से से रूम से बाहर चला गया | वही त्रिहांश की लास्ट लाइन सुन कर राज्ञा हैरानी से खुद की साड़ी को देखने लगी थी | उसे समझ नही आया था की इस साड़ी में क्या प्रोब्लम है ? राज्ञा का मुंह बन गया ,वह त्रिहांश को कोसते हुए क्लोसेट रूम में जा कर चेंज करने चली गई |     दरसल राज्ञा साड़ी में बहुत हॉट लग रही थी | उसने स्लीवलेस ब्लाउज पहना था और ऊपर से उस साड़ी में राज्ञा की पतला सा कमर त्रिहांश बेहद अट्रैक्टिव कर रहा था | इसीलिए उसने सख्त मना कर गया था |          To be continued........

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