Chapter 28: chapter 28

Billionaire's Dark DesireWords: 30733

  अब आगे.....   अग्निहोत्री मेंशन....      वेदिका उठ कर अहीरा और अर्यांश के पास गई | वही अहीरा और आर्यंश,दोनो की नजर इस वक्त वेदिका पर ना हो कर कही और था | वह सिर्फ राज्ञा को ढूंढ रहे थे |     तभी वेदिका बोली,""_ राज्ञा इस वक्त रूम में है,तुम दोनो थोड़ा wait करो ,वह आ जाएगी | "    त्रिहांश का रूम....       लगादार door knock होने से राज्ञा की नींद खुली ,वह नींद में कसमसाते हुए अपने आंखे खोल कर door के तरफ देखने लगी |  " राज्ञा ma'am... राज्ञा ma'am....! " एक फीमेल सर्वेंट की आवाज door के उस तरफ से आ रही थी | राज्ञा उठ कर बेड से नीचे उतर कर door के पास गई,फिर door को खोला |     सामने एक फीमेल सर्वेंट खड़ी थी ,वह बोली,""_ ma'am आपसे मिलने आपके घर से कोई आया है | "   राज्ञा ना समझी में उस सर्वेंट को देखने लगी | उसे समझ नही आया की उसका अब कोनसा परिवार रह गया है ? खुराना परिवार.... राज्ञा को याद आया, उसका भी एक नाम का परिवार हैं , जो सिर्फ नाम का है | लेकिन वह लोग अब उससे क्यों मिलने आए ?    राज्ञा उस सर्वेंट से बोली, ""_ आप जाइए मैं आती हु | "    राज्ञा इतना बोल कर वाशरूम में चली गई | वही हाल में.. इशान, अहीरा और आर्यांश को देख रहा था |   वही वेदिका अहिरा को ध्यान से देख रही थी ,जो थोड़ा थोड़ा राज्ञा जैसे ही दिखती थी |     थोड़ी देर में राज्ञा नीचे आई | तभी वेदिका बोली,""_ राज्ञा इधर आओ,तुमसे मिलने कोई बुजर्ग आदमी आए है, और साथ में उनकी बेटी को भी लाए है ,तुम आ कर जरा बताना की यह तुम्हे क्या लगते है ? "       वेदिका बातो में ही टाउंट मार रही थी | क्यों की उसने आसानी से पहचान लिया था ,की उसके सामने खड़े हुए वह बूढ़ा आदमी बूढ़ा नही आर्यांश है |   वही वेदिका की बात सुन अर्यांश और अहीरा कभी एक दूसरे को देखते तो कभी वेदिका को,उन्हे भी समझ आ गया था की वेदिका उन्हे ताना मार रही है, लेकिन क्यों ? यह उन्हे समझ नही आया |     वही राज्ञा अपने जगह में रुक कर एक टक अर्यांश और अहीरा को देख रही थी | वह आज पहली बार उन्हें देख रही थी |    राज्ञा फिर उनके पास जा कर पूछी,""_ आ आप लोग कोन है ? "  आर्यंश और अहीरा बिना कुछ कहे राज्ञा को देखने लगे | वह दोनो अपनी बड़ी बहन को आज पहली बार देख रहे थे | उन दोनो को एक साथ अजीब सी खुशी और तड़प मेहसूस हो रहा था | वह दोनो हक से राज्ञा के करीब जा कर hug करना चाह रहे थे लेकिन अजीब सा जीजक भी था |    वही राज्ञा उनका जवाब का इंतजार कर रही थी | तभी वेदिका पूछी,""_ मतलब तुम इन्हे नही जानती  ? "  राज्ञा अपना सर ना में हिलाते हुए कुछ कहती तभी आर्यांश आगे आ कर राज्ञा के गले लगते हुए बोला,""_ हम आपके पापा के दोस्त है बेटा,उनसे पता चला की तुम यहां रहती हो तो बस एक बार मिलने आ गए | "   आर्यांश का इस तरह गले लगने से राज्ञा को थोड़ा अजीब लगा | वह उससे अलग हुई तो अहीरा आ कर उससे लिपट गई |       राज्ञा को आर्यांश की बात भी समझ नही आया था | क्यों की गौतम खुराना उसे किसी भी मिलवाना तो दूर उससे हमेशा गिन्न मेहसूस करते थे | और सबसे बड़ी बात गौतम को कैसा पता चला की वह अग्निहोत्री मेंशन में है ? पता नही.....!!  राज्ञा ना समझी में आर्यांश को देखने लगी | दरसल यहां एक बहुत बड़ी गलतफहमी हो रही थी | यहां अर्यांश सुधर्व राठौड़ की बात कर रहा था जो राज्ञा की असली बाप था लेकिन राज्ञा समझ रही थी की आर्यांश गौतम खुराना का दोस्त है और गौतम के कहने पर आर्यंश उससे मिलने आया है |      वेदिका और इशान एक टक अहीरा और अर्यांश को देख रहे थे | वेदिका को तो समझ आ गया था की आर्यंश और अहीरा क्यों आए है ? लेकिन इशान अभी भी कन्फ्यूज था |     राज्ञा अहीरा को खुद से अलग कर उन दोनो से बोली,""_ आ... आप दोनो का नाम क्या है ? और....? "    राज्ञा को सवाल करता देख अर्यांश फुर्ती से बोला ,""_ आ दी ..आ ..बिटिया अभी हमरा फ्लाइट का टाइम हो रहा है हम निकलते है | "     आर्यांश इतना बोल के अहीरा को ले कर जल्दी से बाहर चला गया | वही वेदिका की हंसी छूट गई थी | राज्ञा और इशान हैरानी से बस उन दोनो को जाता हुआ देख रहे थे |        रात का वक्त......         डाइनिंग एरिया में इस वक्त त्रिहांश को छोड़ कर सारे घरवाले मौजूद थे | वही राज्ञा ,दिया के साथ सबको खाना परोस रही थी |     तभी अजय दिया से थोड़ा सा सब्जी डालने कहा | सब्जी का बाउल इस वक्त राज्ञा के हाथ में था | तो वह एक नजर अजय को देखी,फिर खुद ही उसे परोसने आगे बड़ी |       अजय चुपचाप अपने जगह में बैठा था | लेकिन उसका चेहरा गुस्से से भरा था | राज्ञा ने जैसे ही सब्जी डाला उसी वक्त अजय उठ कर चला गया |          यह देख महोल एक दम से अवकार्ड हो गया | वही राज्ञा की आंखे अचानक से नम हो गए थे | वह वेदिका को देख बोली,""_ i am sorry मम्मा वह मैं....| "    वेदिका अपना सर ना में हिलाते हुए उसके पास गई | फिर आंसू पोछते हुए बोली,""_ कोई बात नही मै अजय के लिए खाना रूम में ही ले जाती हु | "    बोलते हुए वेदिका ने राज्ञा के हाथ में से बाउल लिया फिर एक प्लेट में खाना सर्व कर रूम में ले गई | आरव ,दिया ,इशा इशान और उर्मी राज्ञा का मुरझा हुआ सा चेहरा ही देख रहे थे | उन्हे राज्ञा के लिए बुरा लग रहा था |       इशान बोला,""_ राज्ञा भाभी.... मुझे एक और पराठा दो न ? पेट मैं चूहे भाग रहे है और आप है की मुझे सर्व ही नही किया....| "     राज्ञा एक नजर इशान के प्लेट को देखी ,उसके प्लेट में पहले से ही पराठा था | राज्ञा फिर अपने आंखे छोटी कर उसे देखने लगी तो इशान जल्दी से पराठे को इशा के प्लेट में रख कर बोला,""_ देखो अब नही है | "   राज्ञा की चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ गया | उसका माइंड डायवर्ट करने के लिए ही इशान जानबूझ कर ऐसा किया और राज्ञा का मूड भी ठीक हुआ था | राज्ञा उसे सर्व कर रूम के तरफ जाने लगी तो उसे विनोद की आवाज सुनाई दी और  वह रुक गई |    " तुम... बिना खाए क्यों जा रही हो ? "    राज्ञा मुड़ कर विनोद को देखी | विनोद आज पहली बार उससे बात कर रहा था | उसका टोन भले ही थोड़ा कड़वा था लेकिन केयरिंग भरा था |   राज्ञा एक नजर टाइम को देखी,फिर विनोद से बोली,""_ त्रिहांश अभी आते ही होंगे,उनके साथ खा लूंगी ..| "   विनोद ने कुछ नही कहा | वही राज्ञा रूम के तरफ चली गई | वह रोज त्रिहांश के बिना ही खाती थी लेकिन अजय के बर्ताव के वजह से उसका बिलकुल खाने का मन नही हो रहा था | इसीलिए वह बहाना बना कर रूम में चली गई |        रात के ग्यारह बजे की आस पास त्रिहांश घर आया | वह सीधे अपने रूम के तरफ चला | रूम में सारे लाइट्स ऑन ही थे ,त्रिहांश अपने नजरे इधर उधर दौड़ाते हुए राज्ञा को ढूंढा , राज्ञा रूम में नही दिखी, त्रिहांश फिर वाशरूम के तरफ जाने को हुआ की तभी उसे किसी की सुबक कर रोने की आवाज सुनाई दी |     त्रिहांश रुक के अपना सर घुमा कर बालकनी के तरफ देखने लगा |         राज्ञा रेलिंग को टिक कर एक टक काली आसमानों के तरफ देखते हुए खड़ी थी और उसके आंखो से आंसू बिना रुके बह रहे थे |     त्रिहांश लंबे कदम रखते हुए उसके करीब गया | फिर उसके बाजू पकड़ कर उसे अपने तरफ घुमाया | राज्ञा का रोना सुन कर उसे बहुत गुस्सा आ गया था | वही त्रिहांश को देख राज्ञा जल्दी से आंसू पोंछ कर अपने चेहरे झूठी मुस्कान लाते हुए उससे पूछी,""_ आ आप आ गए ?         त्रिहांश का चेहरा बेहद गुस्से से भरा था | वह उसे अपने आप से चिपका कर, अपने दांत पीसते हुए पूछा,""_तुम ऐसे रो क्यों रही हो ? "     त्रिहांश बेहद सख्ती से राज्ञा को पकड़ा था | जिससे राज्ञा को दर्द मेहसूस होने लगा था | वह छटपटाते हुए कराहने लगी तो त्रिहांश उसके दोनो कंधे पकड़ कर गुस्से से चिल्लाया ,""_अब बोल रही हो या उठा कर नीचे फेंकू ? "  त्रिहांश एक दम से भौकालया गया था | उसे पता नही क्यों राज्ञा का इस तरह रोना बिलकुल अच्छा नही लगा था वह भी उसकी गैरमौजूदगी में ..?| अगर कोई बात है तो वह उससे कह दे इस तरह उसे रोने की क्या जरूरत है ?        राज्ञा सहम गई थी | वह हैरानी से त्रिहांश को देख रही थी | वह फिर धीरे से बोली,""_ कुछ नही ,बस मुझे रोना आ गया तो मैं रोने लगी.....!!! "   त्रिहांश का जबड़ा सख्त हुआ | उसका पकड़ भी राज्ञा की बाजू में कस गया था |   त्रिहांश उसके ऊपर झुक कर उसके होंठो को हल्के से मगर गुस्से से काटा फिर अपने दांत पीसते हुए पूछा,""_ मैं तुम्हे बेवकूफ दिखता हू ? Hmmm ? या कोई अनपढ़ गवार ? "    अह्ह्ह्ह्ह्ह....!! " राज्ञा करहाते हुए अपने होंठो पर हाथ रखी | वही त्रिहांश अब भी उसे घूरे जा रहा था |  लेकिन राज्ञा का चेहरा ज्यादा ही मुरझा हुआ था और उसके आंखे थोड़े सूझे हुए थे मतलब वह बहुत देर तक रोई थी |    त्रिहांश अपना पकड़ ढीला कर उससे धीरे से मगर सख्ती से पूछा ,""_ क्या हुआ ?ऐसे रोते हुए यहां क्यों खड़ी थी? "     भले ही त्रिहांश धीरे से बोल रहा था, लेकिन उसमें उसका गुस्सा बरकरार था | वही राज्ञा जोर से उसके सीने से लगते हुए धीरे से बोली,""_ आज आसमान बिलकुल खाली है त्रिहांश ,ना चांद ना कोई तारा....बिलकुल मेरी तरह...मेरे पास मेरी मां, मिस्टर गौतम और नाम का भाई  ..सब है फिर भी कोई नही,बस यही सब याद आया तो मैं रोने लग गई | "     बोलते हुए राज्ञा जोर से त्रिहांश से लिपटी हुई थी | वही त्रिहांश उसे गोद में उठा कर रूम में जाते हुए पूछा ,""_ और तुम्हे अचानक से यह लोग क्यों याद आ गए ? "    त्रिहांश राज्ञा को अपने गोद ले कर ही बैठ गया | वही राज्ञा उसके गोद में एडजस्ट हो कर बैठते हुए बोली,""_ आज मुझसे मिलने दो लोग आए थे त्रिहांश, उस आदमी ने कहा की उन्हें मेरे पापा ने कहा की मैं यहा़ हु ? लेकिन मिस्टर गौतम को कैसे पता चला की मै यहा हु ? और सबसे बड़ी बात वह कभी किसी के सामने भी मुझे अपनी बेटी जैसा ट्रीट नही करते थे और किसी को बताते भी नही थे ,की उन्हें कोई बेटी भी है |    लास्ट लाइन बोलते हुए राज्ञा की चेहरे पर बेहद उदासी छा गई थी |  इतना बोल कर उसने त्रिहांश के कंधे पर सर रखा | वही त्रिहांश का खून खौल रहा था, उसे गौतम पर नही माया पर गुस्सा आ रहा था | क्यों की उसी ने अपनी बेटी को वानी तक पहुंचाया था ताकि त्रिहांश राज्ञा तक ना पहुंचे |      राज्ञा त्रिहांश के कंधे पर सर रख कर उसके शर्ट के बटन के साथ खेल रही थी | तभी त्रिहांश बोला,""_ hmm और कोई बात .जो तुम मुझसे कहने झिझक रही हो..? "        राज्ञा अपना चेहरा ऊपर कर त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश उसे ही बिना एक्सप्रेशन के साथ देख रहा था | राज्ञा धीरे से डायनिंग एरिया में अजय का बर्ताव उसके साथ कैसा था ? कैसे वह उसके वजह से बिना खाए चला गया ? वह सब बताते हुए त्रिहांश का जवाब का इंतजार करने लगी |     त्रिहांश उसे कोई जवाब नही दिया | वह उसे अपने आप से चिपका कर उसके गाल सहलाते हुए राज्ञा की आंखो में देखने लगा | उसका इस तरह प्यार से सहलाने से राज्ञा मदहोश हो रही थी | और उसके पलके भारी भारी हो रहे थे |      वही त्रिहांश धीरे से उसके ऊपर झुकते हुए उसे बेड पर लेटा कर खुद उसके ऊपर झुका | राज्ञा के दोनो हाथ अपने आप ही त्रिहांश के गले में आ गए थे | वह धीरे से उसके बालो में अपने उंगलियां भी फिरा रही थी | वही त्रिहांश उसके माथे पर बेहद शिद्दत से किस करते हुए अपने एक हाथ को राज्ञा के कमर में रखा |       राज्ञा धीरे धीरे आहे भरते हुए अपने आंखे बंद कर लेती है | वही त्रिहांश उसके टी शर्ट में अपने ठंडे हाथ ले जा कर राज्ञा की कमर को सहलाने लगा | उसका टच बेहद सेंशुअल था जिससे राज्ञा की सिसकियां भी तेजी से निकल रहे थे और उसका त्रिहांश के बाहों में मचलना भी तेज था |     वही त्रिहांश के होंठ राज्ञा की बंद पलकों पर थे | वह धीरे से उसके पलको को किस किया,फिर थोड़ा नीचे सरकते हुए अपने होंठो को राज्ञा की होंठो पर रखा | त्रिहांश के होंठो का स्पर्श मेहसूस करते ही राज्ञा की आंखे कसके बंद हो गए थे | वह भी त्रिहांश के किस का रिस्पॉन्स देने लगी |       थोड़ी देर दोनो ही बेहद शिद्दत से एक दूसरे को किस करते रहे लेकिन राज्ञा की सांसे धीरे धीरे फूलने लगे थे, तो त्रिहांश उसके होंठो को छोड़ कर उसके गर्दन में अपना चेहरा छिपा कर उसे स्निफ करते हुए उसके पूरे बॉडी को सहलाने लगा | आखिर उसे सुकून राज्ञा के जिस्म को छुने से ही मिलता था | उसका हाथ उसके जिस्म के हर एक हिस्से को छू रहा था |    वही राज्ञा अपने निचले होंठो को चबाते हुए अपने दोनो पैर आपस में रब कर रही थी | उसका वह चुवन ही ऐसा होता था जिससे राज्ञा खुद को सिहरने से रोक नही सकती थी | वह धीरे से त्रिहांश का नाम ली...""_ ummm त्रिहांश..| "     त्रिहांश हल्के से उसके गर्दन में बाइट किया फिर से उसके होंठो पर अपना होंठ रखने को हुआ की तभी वह रुक कर उससे पूछा,""_ तुमने कुछ खाया ? "      राज्ञा उसे थोड़ी देर देखती रही,फिर अपना सर ना में हिलाई तो त्रिहांश उसे घूर कर देखने लगा | तभी राज्ञा बोली,""_ मेरा मन नही था त्रिहांश ,वैसे भी आपने मुझे ज्यादा ही टूस टूस कर खिला दिया था तो मुझे भुख ही नही लगी | "   त्रिहांश थोड़ी वैसे ही राज्ञा पर पड़ा रहा फिर उसे अपने गोद में ले कर रूम से बाहर चला गया |    वही दूसरी तरफ....    एक बड़े से विला में एक औरत पागलों की तरह चिल्लाते हुए आस पास की चीज़े उठा कर तोड़ फोड़ कर रही थी | उसका चेहरा इस वक्त उसके घने बालों से ढका हुआ था | और गुस्से की तेज तेज सांसे ले रही थी |      " शांत हो जाओ देवी ..वह लड़की मरेगी जरूर मरेगी " उस औरत के पास एक आदमी आ कर, उसे अपने गले से लगा कर ,उसके चेहरे से उसके बाल हटाते हुए बोला |   वही वह औरत जिसका नाम देवीका मल्होत्रा था | वह गुस्से की घूंट पीते हुए बोली,""_ उसे मरना होगा तभी तो मेरा बदला पूरा होगा ....राठौड़ और अग्निहोत्री डोर तो टूट गई बस अब उसी डोर से उनके गले में फसा कर सांसे रोकना है | "      " यही होगा देविका,तुम शांत रहो " वह आदमी जिसका नाम सुहास मलहोत्रा जो देवी का पति था | उसने कहा |       देविका का चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था | वह गुस्से से काफी टेबल के पास गई | जहा एक तस्वीर पड़ी थी जिसमे दो बच्चे की तस्वीर थे | एक लड़की जो बेहद प्यारी सी स्माइल के साथ खड़ी थी तो उसके बगल में उसी का एज का एक लड़का  बेहद एरोगेंट लुक के साथ उस लड़की को देख रहा था |   अग्निहोत्री निवास.....     त्रिहांश राज्ञा को अपने गोद में बैठा कर खुद भी खाते हुए उसे खाना खिला रहा था | वही राज्ञा बस त्रिहांश को निहार रही थी | त्रिहांश इन दिनों उसके साथ ज्यादा ही softly फेश आ रहा था | वजह क्या है यह वह भी नही जानती थी |   इशान का रूम....      इशान देर रात तक बैठ कर अपने लैपटॉप में काम कर रहा था | दो दिन में ही त्रिहांश ने उसे बहुत काम दे दिया था | वह थोड़ी देर बाद ऐसे ही काम करा फिर उठ कर बेड के पास गया की तभी उसका फोन रिंग होने लगा |    इशान ने अपना फोन ले कर देखा | तो मानो उसका दिल जोरो से धड़क रहा हो | कॉल अहीरा की थी | इशान की होंठो पर अचानक से स्माइल आ गई ,वह बेड पर गिरते हुए कॉल पिक करा तो इशान को उधर से अजीब सी आवाज गूंजने लगी | इशान ने फोन के स्क्रीन को घूरा फिर अपने कान को लगाया |   To be continued....Â