Chapter 20: chapter 20

Billionaire's Dark DesireWords: 29315

  अग्निहोत्री मेंशन......      राज्ञा रोते हुए त्रिहांश के रूम से बाहर निकल कर सीधे अपने रूम के तरफ भाग गई | त्रिहांश भी गुस्से से उससे पहले ही बाहर चला गया था | एक का दिल गुस्से में तमतमा रहा था तो दूसरे का दिल टूट कर बिखर चुका था |         वही रूम में जाते ही राज्ञा ने डोर क्लोज किया | फिर जा कर बेड के नीचे बैठ कर जोर जोर से रोने लग गई | उसे बहुत रोना आ रहा था | त्रिहांश का गुस्से से उस पर चिल्लाना , उस पर हाथ उठाना,उसे अपनी औकात दिखाना सब कुछ राज्ञा के दिल को टुकड़ा टुकुड़ा कर दिया था | वह अपने आपको पूरी तरह उसे सौंफ चुकी थी | बदले में उसने त्रिहांश से कुछ नही चाहा था ना पैसे,ना प्यार...कुछ भी तो नहीं ...फिर भी त्रिहांश ने उस पर सवाल उठाया ?क्यों ?       राज्ञा अपने में ही सिमट कर रोते बैठी थी | उसे बहुत तकलीफ मेहसूस हो रहा था | वह रोते हुए बोली,""_ बिना सोचे समझे कुछ भी कह देते है और तो और.....!! "   राज्ञा अपनी बात बीच में ही रोक कर अपने गाल पर हाथ रखी ,तो दर्द से उसके आंखे भींच गए | वह सुभकते हुए बोली,""_ और बेरहमी से मुझ पर हाथ भी उठा देते है,आप बहुत बुरे है त्रिहांश बहुत बुरे  मैं कभी माफ नहीं करूंगी आपको ....कभी नही | "     बोलते हुए राज्ञा अपने घुटनो में चेहरा छुपा कर फिर से रोने लग गई | उसकी आंखो से बेहिसाब से आंसू बहते ही जा रहे थे लेकिन अफ़सोस उसके पास इस वक्त उन आंसू को पोछने वाला या कोई मनाने वाला ही नही था |          राठौड़ निवास.....   माया का रूम....   माया करवट बदल बदल कर सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे इस वक्त अजीब सी बेचैनी मेहसूस हो रही थी | ऐसा लग रहा था की कोई उसका अपना दर्द में तड़प रहा है |   maya अपने दिल पर हाथ रख कर अपने मन में बोली,""_ मैं इतना बेचैन मेहसूस क्यों कर रही हू ? क्या मेरी lovey इस वक्त दर्द में है ? नही ,मुझे पता है वह उसके पास है तो वह safe होगी ही ? लेकिन....वह उसका इस्तेमाल कर रहा है | "    माया को अजीब सा डर सताने लगा था | वह अपना सर घुमा कर सुधर्व को देखी जो आराम से सो गया था | माया फिर उठ कर उस सीक्रेट रूम में गई,जहा उसने एक लड़की की बहुत सी तस्वीरों को इकट्ट किया था |     रूम में लाइट्स ऑन कर माया उस लड़की की एक फोटो उठाई | वह फोटो राज्ञा की ही थी | माया थोड़ी देर राज्ञा की तस्वीर को देखी फिर उसे अपने सीने से लगा कर कुछ सोचते हुए बोली,""_ सालो पहले मैंने तुम्हे खुद से दूर कर बहुत बड़ी गलती कर दिया है lovey, पता नही तुम उस पागल इंसान के साथ कैसे रह रही होगी ? अब बस...तुम्हे मै और तकलीफ में गुजरने नही दूंगी बच्चा,तुम्हे वापस अपने पास लाऊंगी और अब ऐसा करने से मुझे कोई नही रोकेगा | "   लास्ट लाइन बोलते हुए माया का चेहरा गुस्से से भर गया था | वह राज्ञा का तस्वीर वापस वही रख कर रूम से बाहर आ कर रूम का door close करने लगी तो उसे अपने पीछे किसी का होने का एहसास हुआ ...वह मुड़ कर देखी सामने सुधर्व खड़ा था |       सुधर्व एक टक माया की बेचैनी से भरी हुई चेहरा ही देख रहा था | वह फिर आगे आ कर उसे अपने गले से लगाते हुए बोला,""_ उसके लिए इतना तड़पने से अच्छा है उसे अपने पास ही बुला लेती ..जो होगा हम देख लेंगे ...| "    माया अपना सर ऊपर कर सुधर्व को थोड़ी देखी ,फिर अपना सर हा में हिलाते हुए उसे कुछ बताने लगी | सुधर्व के चेहरे पर बेहद सीरियस एक्सप्रेशन आ गया था | वह कुछ सोचते हुए बस hmm में जवाब दिया फिर माया को ले कर अपने रूम में चला गया |      आर्यांश इस वक्त उर्मी से बात कर उसे सताते हुए रूम से बाहर निकला था | तभी उसकी नजर माया और सुधर्व पर गई थी और उसे उनकी बात भी सुनाई दी थी जो उसके लिए एक दम शॉकिंग था |       वह एक टक रूम के तरफ देख रहा था | जिसे लॉक कर माया और सुधर्व अपने रूम में गए थे | अर्यांश थोड़ी देर अपने जगह में ही खड़ा रहा फिर विला के डुबलीकेट keys ले कर उस रूम का door open कर अंदर चला गया |   अग्निहोत्री मेंशन.....,          राज्ञा का रूम.......        रात भीत कर अब तक सुबह के चार बजने लगे थे | त्रिहांश इस वक्त गार्डन में बैठ कर एक टक सिगरेट का कश लिए जा रहा था | ना जाने वह अब तक कितने सिगेरेट की पैक्स को खाली किया था | लेकिन त्रिहांश को उसका होश नही था..उसके दिमाग में बस राज्ञा की बाते गूंज रही थी | या यू कहे की उसके कहे हुए एक एक बात भी उसे सोचने पर मजबूर कर रहे थे |     थोड़ी देर बाद वह उठ कर अपने रूम के तरफ जाने लगा तो उसकी नजर राज्ञा की रूम की तरफ गई | त्रिहांश के कदम अपने आप ही राज्ञा की रूम के तरफ गए | वह door open करने को हुआ लेकिन राज्ञा ने door अंदर से लॉक किया था |       यह देख त्रिहांश ज्यादा ना सोचते हुए अपने रूम के तरफ जाने मुड़ा तो उसे राज्ञा की वह बात याद आ गई |   " अब यह जान मुझे बोझ लगने लगी है त्रिहांश, मै सच में इस जिंदगी को जीना नही चाहती ,मार दीजिए न मुझे ....| "  राज्ञा की कही हुई यह बात याद आते ही त्रिहांश की कदम अपने जगह में ही जम गए | उसके हाथो की मुट्ठी बन गई थी | वह मुड़ कर रूम के door को देखते हुए बोला,""_ कही यह लड़की गलत कदम तो ......नही नही यह ऐसा बिल्कुल नहीं करेगी | "    बोलते हुए त्रिहांश की धमाधार आवाज लड़खड़ा रही थी | और उसके माथे पर भी शिकस्त आ गए थे | वह बिना देर किए ही जल्दी से अपने रूम के तरफ गया फिर एक ही मिनट में विला के keys ले आ कर राज्ञा की रूम का डोर ओपन कर अंदर चला गया |      राज्ञा इस वक्त बैठे बैठे ही सो गई थी | रोने की वजह से  उसका चेहरा और आंखे दोनो सूझ गए थे और उसके गालों पर त्रिहांश की हाथो की निशान बैठ गए थे और उन पर राज्ञा की कुछ आंसुओ की बूंदे भी टेहरे हुए थे |    त्रिहांश एक टक उस लड़की को ही देख रहा था | पता नही क्यों उस बेरहम इंसान का दिल उस लड़की की हालत देख कर इस वक्त दर्द मेहसूस कर रहा था | वह धीरे से उसके पास जा कर अपने घुटनों के बल बैठ गया |      त्रिहांश की नजरे सिर्फ राज्ञा की चेहरे पर टिकी थी जो हद से ज्यादा लाल हो गया था | त्रिहांश धीरे से अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसके उस गाल को छुआ जहा उसने उसे थप्पड़ मारा था |       त्रिहांश की छूते ही राज्ञा दर्द से हल्के से कराह उठी | यह देख त्रिहांश ने जल्दी से अपना हाथ पीछे लिया | फिर आराम से राज्ञा को अपने गोद में उठा कर बेड पर लेटा दिया | फिर उसे ब्लैंकेट से अच्छे से कवर कर उसके माथे पर बेहद प्यार से चूमा | उसके चूमते ही राज्ञा अपने में ही सिमट गई | वही त्रिहांश उसके सूझे हुए गाल को भी बेहद प्यार से चूमने लगा था | उसने सच में उसे बहुत ही बेरहमी से मारा था जिससे उसका गाल सूझ गया था |        त्रिहांश फिर धीरे से उसके दूसरे गाल को चूमते हुए बुदाबुदाय,""_ idiot.. कुछ भी बकवास करने से पहले एक बार सोच लेती,लेकिन नही बस मुझे गुस्सा दिलाना होता है madum को.!! "          त्रिहांश को उस पर अभी भी गुस्सा आ रहा था क्यों की राज्ञा उसके गुस्से को बढ़ाव देने की कोशिश की थीं और बदले में उसे थप्पड़ मिला .था.!!        त्रिहांश धीरे से उसके ऊपर झुक कर उसके पूरे चेहरे पर किस किया,ऐसा कर वह अपने गुस्से को शांत कर रहा था |  फिर वह उससे जल्दी से अलग हो गया | अगर वह ऐसे ही आगे बढ़ता तो राज्ञा की नींद खुल जाती ...|        त्रिहांश उसके बगल में ही बैठ कर उसके बालों पर हाथ फेरने लगा | उसके दिमाग में अभी भी राज्ञा की बाते चल रही थी | वह थोड़ी देर बाद अपना फोन उठा कर किसी को कुछ मैसेज किया फिर राज्ञा को एक नजर देख कर उठ के बाहर चला गया |     सुबह का वक्त......   सुबह के दस बजे की आस पास त्रिहांश रेडी हो कर रूम से बाहर निकला | घर के सारे लोग इस वक्त डाइनिंग एरिया में थे | त्रिहांश नीचे आ कर राज्ञा को ढूंढते हुए डाइनिंग एरिया में गया |      सारे घरवाले यहा तक की पलक और रूहान भी इस वक्त वही मौजूद थे लेकिन राज्ञा वहा नही थी | यह देख त्रिहांश की नजर राज्ञा की रूम के तरफ गया | उस लड़की ने दरवाजा भी नही खोला था |     त्रिहांश अपने घड़ी में टाइम देखा फिर बड़बड़ाते हुए बोला,""_ यह लड़की अभी तक बाहर क्यों नही आई | "     त्रिहांश राज्ञा से मिलने उसके रूम के तरफ जाने को हुआ तो उसे विनोद की आवाज सुनाई दी |     " त्रिहांश...पता है आज सारा नाश्ता तुम्हारे पसंदीदा चीज ही है और यह सब पलक ने बनाया है ,चलो आओ बैठो....!! " विनोद अपने बगल में ही बैठी हुई पलक के सर पर हाथ फेरते हुए बोला  |    पलक शर्मा रही थी और वह उसे छुपाने की पूरी कोशिश भी कर रही थी लेकिन उससे नही हो रहा था | वही इशान,इशा और उर्मी खाना बुरी तरह चबाते हुए पलक को देख रहे थे | उन तीनो का खाना चबाना ऐसा था की वह खाना नही पलक को चबा रहे हो | उन्हे पलक बिलकुल पसंद नहीं आई थी |    वही विनोद की बात को पूरी तरह इग्नोर कर त्रिहांश इशान से बोला,""_ आज से राज्ञा भी ऑफिस join कर रही है ,उसे अपने साथ ऑफिस ले आना ....!!! "     त्रिहांश इतना बोल कर वहा से जाने को मुड़ा तो उसकी नजर रूहन पर गई जो बेमन से खाते हुए राज्ञा की रूम के तरफ देख रहा था | यह देख त्रिहांश की हाथो की मुट्ठी बन गई |     वही रूहान का पूरा ध्यान राज्ञा की रूम के तरफ ही था | लेकिन तभी उसे अपने ऊपर किसी की नजर मेहसूस हुई तो वह अपना सर ऊपर कर सामने देखा | सामने त्रिहांश उसे बेहद गुस्से से निंगल जाने जैसा घूर रहा था | रूहान को समझ नही आया की त्रिहांश उसे ऐसे क्यों घूरने लगा | रूहान फिर ना समझी में आस पास देखने लगा |   वही सबकी नजर त्रिहांश पर गई थी | त्रिहांश गुस्से से उसके पास बढ़ता उससे पहले ही विनोद ने त्रिहांश का हाथ पकड़ कर इशारों में ही मना किया तो त्रिहांश की दांत भींच गए |फिर वह ऑफिस के लिए निकल गया |    वही रूहान असमजंस में विनोद को देख रहा था | वह उसे कुछ पूछता उससे पहले ही विनोद जल्दी से उठ कर वहा से चला गया | विनोद को समझ नही आ रहा था की वो इस तरह के हालत को कैसे ठीक करे ? एक तो त्रिहांश उसकी बात नही मान रहा था और ऊपर से रूहान राज्ञा पर नजर डाल रहा था |         त्रिहांश का इस तरह गुस्से से रूहान को देखने से वहा का माहौल बहुत ही अवकार्ड हो गया था | सब अपना नाश्ता कर बिना कुछ कहे वहा से उठ कर चले गए | वही इशान को राज्ञा को ले कर ऑफिस जाना था तो वह उसके रूम के तरफ गया |        वह रूम का door knock करते हुए राज्ञा को आवाज लगाया |     " राज्ञा..... राज्ञा हमे ऑफिस के लिए देर हो रही है ? "       राज्ञा इस वक्त ड्रेसिंग टेबल के पास खड़ी थी | वह दो घंटे से अपने गाल पर दिख रही त्रिहांश की हाथो की निशान छुपाने की कोशिश कर रही थी | अब तक उसका मेकअप एक दम हेवी हो गया था लेकिन वह त्रिहांश की हाथो की निशान छुपा ही नही पा रही थी |       राज्ञा अपने आपको देखते हुए बोली,""_ ऐसे मेकअप कर कोई शादी में भी जाता नही होगा ,और मैं... मैं कैसे ऑफिस जाऊ ? "    " राज्ञा.....!!! " तभी राज्ञा को इशान की आवाज सुनाई दिया तो वह मुड़ कर door के तरफ देखी |     वह थोड़ी देर कुछ सोची फिर अपने चेहरे को एक स्कार्फ से ढक कर door open करने चली गई |    " आ रही हू इशान..!! " राज्ञा बोलते हुए door open की | वही इशान घड़ी में टाइम देखते हुए डोर को फिर से ओपन करने को हुआ ही की तभी उसे door खुलता हुआ नजर आया | वह राज्ञा से कुछ कहते कहते रुक गया | क्यों की राज्ञा ने अपने पूरे चेहरे को कवर किया था जिससे सिर्फ राज्ञा की आंखे ही नजर आ रहे थे |        इशान ना समझी में राज्ञा से बोला,""_ तुम..ऑफिस आ रही हो या कही लुटने जा रही हो ,यह क्या हुलिया बनाया है अपना ? "   राज्ञा को त्रिहांश पर बहुत गुस्सा आ रहा था | उसी के वजह से आज उसे किसी को मुंह देखने लायक नही बची थी | वह धीरे से बोली,""_ ऑफिस...? ""  ऐसे ...? " इशान ने सवाल किया तो राज्ञा धीरे से अपना सर हा में हिलाते हुए बोली,""_ आज एक दिन,कल से मैं अपने रूप में आ जाऊंगी इशान | "   इशान को समझ नही आ रहा था की राज्ञा क्या बोल रही है ? और क्यों ? वह उसका मास्क उतारने आगे बढ़ते हुए बोला,""_ लेकिन आज ऐसा क्यों ? तुम्हारे चेहरे को कुछ हुआ है क्या ? "   बोलते हुए इशान ने राज्ञा का मास्क उतार ही दिया | वह फिर हैरानी से राज्ञा को देखते हुए बोला,""_ यह तुमने किस तरह का मेकअप किया है राज्ञा,तुम सच में बंदरिया लग रही हो "   राज्ञा का शकल गुस्से से भरा तो वही इशान की हंसी छूट गई थी | वह गुस्से से इशान का कान पकड़ते हुए बोली,""_ तुमने मुझे बंदरिया कहा ..? "   "वह सही कह रहा है राज्ञा,आपने ज्यादा मेकअप कर लिया है जो आपकी खुबसूरती को छुपा रहा है | "       तभी वहा रूहान की आवाज सुनाई दी तो राज्ञा और इशान मुड़ कर रूहान को देखे | रूहान एक टक राज्ञा को ऊपर से नीचे तक देख रहा था | राज्ञा ने आज पिंक कुर्ती और ब्लू जींस पहना था जो उस पर अच्छे से दिख रहा था लेकिन उसका मेकअप उसका लुक को डाउन कर रहा था |      रूहान की बात ना राज्ञा को अच्छी लगी नाही ईशान को | कल रात राज्ञा उसकी वजह से ही त्रिहांश की गुस्से की शिकार हो चुकी थी | और वही इशान... राज्ञा को उसने त्रिहांश की बीवी मान लिया था | और उसने मन ही मन सोच भी लिया था की वह त्रिहांश को इसके लिए मनाएगा भी ,तो उसे बर्दाश्त नहीं था की राज्ञा पर अब कोई भी नजर डाले |       रूहान बस राज्ञा की जवाब का इंतजार कर रहा था | वही राज्ञा उसे कुछ जवाब देती उससे पहले ही इशान उसका हाथ पकड़ कर बाहर ले जाते हुए बोला,""_ चलो भी ...हमे देर हो रही है राज्ञा..? "    वही रूहान बस जाता हुआ राज्ञा और इशान को देख रहा था |   " आप उस लड़की को पसंद करने लगे हो भाई ? " रूहान के पास आते हुए पलक ने कहा तो रूहान अपने बालो में हाथ फेरने लगा | फिर वह एक गहरी सांस लेते हुए उससे बोला,""_ जैसे ही तुम्हारी शादी त्रिहांश अग्निहोत्री से तय होगा वैसे ही मैं डैड से कह दूंगा......मुझे राज्ञा से शादी करना है | "     पलक को इससे कोई ऐतराज़ नहीं था | लेकिन उसे कही न कही राज्ञा उतना अच्छी नही लगी थी | पलक ने हा में सर हिलाया फिर रूहान के साथ बाहर चली गई |    वही वेदिका और दिया उन दोनो के थोड़ी ही दूरी पर खड़े थे | उन दोनो ने रूहान और पलक की सारे बाते सुन लिया था | उन्हे समझ नही आ रहा था की किसे क्या कहे ? त्रिहांश को कहे तो वह किसी की बात नही सुनने वाला था अगर राज्ञा को कुछ कहने का सोचे तो त्रिहांश के गुस्से का सामना करना पड़ता ? और पलक और रूहान को कुछ कहना चाहे तो अजय उन पर बरस पड़ता | अजीब तरह का सिचुएशन था | To be continued......     Â