Chapter 19: chapter 19

Billionaire's Dark DesireWords: 31398

   त्रिहांश गुस्से से राज्ञा को कॉफी का ऑर्डर दे कर जाने को मुड़ा तो उसे सामने वेदिका नजर आई | वेदिका ना समझी में त्रिहांश को देख रही थी | जो गुस्से में नजर आ रहा था |    वह एक नजर राज्ञा को देखी फिर कुछ सोचते हुए त्रिहांश से बोली,""_ राज्ञा को जाने दो, मैं तुम्हारे लिए coffee बना कर लाती हु | "   वेदिका इतना बोल कर वहा से किचन के तरफ जाने को हुई तो उसे त्रिहांश की बात ने रोक लिया |      "नही वेदु.......!!! "       त्रिहांश गुस्से से राज्ञा को घूरते हुए बेहद सख्ती से बोला था | राज्ञा और वेदिका अच्छे से समझ रहे थे की त्रिहांश यह गुस्से में आ कर बोला है | लेकिन यह गुस्सा किस लिए ..?    त्रिहांश बेहद cold look देते हुए राज्ञा के करीब गया | फिर अपने बात पर जोर देते हुए वेदिका से बोला,""_ coffee यही बना कर लाएगी वेदु....मुझे इस लड़की से बात करनी है..वह भी अच्छे से | "        त्रिहांश का जबड़ा गुस्से से सख्त था | वही राज्ञा अपने हिरण जैसे आंखो को टिमटिमाते हुए बेहद मासूमियत से त्रिहांश को देख रही थी | वह धीमी आवाज में पूछी,""_ आप गुस्से में क्यों है ? "    त्रिहांश बिना भाव के बस गुस्से से उसे देखे जा रहा था | वह अपने घड़ी में टाइम देखते हुए उससे बेहद सख्त लहजे में बोला,""_ just three minutes left...!! "  त्रिहांश फिर गुस्से में लंबे लंबे कदम रखते हुए अपने रूम के तरफ  जाने लगा | वही राज्ञा बस हैरानी से उसे जाता हुआ देख रही थी | वह फिर लाचारी में वेदिका को देख पूछी ,""_आपका बेटा ऐसे क्यों है आंटी..हर वक्त इन्हे मेरा खून चाहिए होता है चूसने.....| "     वेदिका भी लाचारी में उसे ही देख रही थी | वह फिर घड़ी में टाइम देखते हुए बोली,""_ hmm तीन मिनट में बीस सेकंड वेस्ट हो गया है राज्ञा,जल्दी जाओ ...!!! "      राज्ञा रोनी सी शकल बना कर वेदिका को देखी फिर भाग कर किचन में चली गई |  राठौड़ निवास.....    अहीरा का रूम......    "  मैं कितनी खूबसूरत हू ? लेकिन वह मुझे भाव क्यों नही दिया ? "        एक हार्ट शेप वाला पिलो को अपने सीने पर रख कर एक टक सीलिंग को देखते हुए आहिरा बड़बड़ाते हुए इशान के याद में यह सब कह रही थी |    पहली नजर में ही इशान उसे पसंद आ गया था | लेकिन आहिरा को ना उसका नाम पता था और नाही उसके बारे में कुछ | अहीरा इस वक्त यही सब याद करते हुए यह भी सोच रही थी की वह अब उसे मिले तो कैसे मिले ? वह उसे कहा ढूंढे अब ?          आहीरा ऐसे ही इशान के बारे में सोचते हुए कब सो गई उसे पता ही नही चला |          अग्निहोत्री मेंशन.....    इशान का रूम....इशान इस वक्त आहिरा के बारे में सोचते हुए उसके तस्वीर देख रहा था | उसके चेहरे पर इस वक्त बेहद दिलखुश करने वाला स्माइल था | और उस मुस्कान की वजह सिर्फ अहीरा थी |   वह फोन के स्क्रीन पर दिख रही आहिर की तस्वीर पर हाथ फेरते हुए धीमी आवाज में बुदबुदाया,""_ आहिरा.. कुछ पल के लिए ही सही तुम मेरी बाहों में तो थी.. तुम्हारे खुशबू को सूंघते हुए मैने उस पल में ही तुम्हे जी भर कर देखने की कोशिश की लेकिन एक पल में यह कहा मुमकिन है ? तुम्हे तो जिंदगी भर ऐसे ही देखता जाऊ तो भी मेरा मन नहीं भरने वाला |  "    उस गुजरे हुए पल को याद करते हुए वह बोले जा रहा था लेकिन बोलते हुए अजीब तरह की उदासी उसके चेहरे पर छा गई थी | वह एक टक आहिरा की होंठो को फोन के स्क्रीन पर सहला रहा था | वह धीरे से फिर बोला,""_ तुम्हे दिलों जान से चाहता हु आहि लेकिन कभी तुम्हारे करीब नही आ पाऊंगा ....कभी तुम्हे वह प्यार नही दे पाऊंगा जो तुम डिजर्व करती हो.....| "      इशान यही सब बड़बड़ाते हुए अपने फोन में आहिरा का नंबर डायल किया | लेकिन ग्रीन बटन प्रेस करने वह थोड़ा हिचकिचा रहा था |     तभी उससे गलती से ग्रीन बटन पर प्रेस हुआ | वह फिर जल्दी से कॉल कट कर बोला ,""_ यह क्या किया मैंने ? वह सो गई होगी ...!!! "         इशान खुद को ही डांटते हुए फोन साइड में रख कर अपने आंखे बंद करा | लेकिन आज उसे नींद नही आ रही थी तो वह फिर से अपना फोन ले कर आहिरा का तस्वीर देखता रहा |      त्रिहांश का रूम.....       राज्ञा इस वक्त त्रिहांश के लिए कॉफ़ी ले कर उसके रूम के बाहर खड़ी थी | जिस तरह त्रिहांश उससे गुस्से से बात कर रूम में आया था उससे राज्ञा को रूम में जाने का बिल्कुल हिम्मत नही हो रहा था |        लेकिन उसे तो जाना ही था | तो वह धीरे से door knock की | अंदर से उसे कोई जवाब नही आया | राज्ञा ने फिर से door knock किया, इस बार भी त्रिहांश ने उसे कोई जवाब नही दिया |          यह देख राज्ञा बड़बड़ाते हुए बोली,""_ शायद त्रिहांश सो गए होंगे....अच्छा हुआ सो गए ....| "    राज्ञा खुशी से वहा से जाने को मुड़ी तो उसे अंदर से त्रिहांश की आवाज सुनाई दिया |    " Come in....!! "         राज्ञा का शकल एक दम रोनी जैसा हो गया | उसे अब रूम में जाना ही था | तो वह बेमन से डरते हुए अंदर चली गई |     रूम में कोई लाइट्स ऑन नही था | और रूम में सिर्फ सिगार की धुआं ही धुआं उड़ रहा था | इससे रूम का माहौल बेहद भयानक सा हो गया था | राज्ञा डर रही थी क्यों की उसे अंदाज हो चुका था की यह त्रिहांश का गुस्सा है जो इस तरह बाहर आ रहा है | वह उस बेरहम इंसान को तीन साल से जानती थी और उसके गुस्से को भी....वह तीन साल से उससे भाग भी रही थी लेकिन उसे ऐसी कोई जगह नही मिला जहा त्रिहांश ना पहुंच पाए.....|      राज्ञा डरते हुए त्रिहांश का नाम लेना चाहा की तभी उसे अपने पीछे किसी का होने का एहसास हुआ ,तो वह जल्दी से मुड़ कर देखी | सामने त्रिहांश बेहद गुस्से से सिगार का कश लेते हुए उसे देख रहा था | गुस्से से उसके माथे के नसे उभर कर आए थे | और उसका जबड़ा अभी भी सख्त था और उसके आंखे गुस्से से लाल रंगत में बदल गए थे | उसके होंठो के बीच अभी अभी सिगरेट था |      वह राज्ञा के बेहद करीब आ कर अपने मुंह में रखे हुए सिगरेट ले कर राज्ञा को देखा |   राज्ञा डरते हुए उसे ही देख रही थी | त्रिहांश का यह रूप देख कर उसके माथे पर पसीना छूटने लगा था | वही त्रिहांश फिर उसके हाथ में पकड़े हुए coffee को देखने लगा |       राज्ञा के हाथ कांप रहे थे ,जिस वजह से ट्रे में रखे हुए वह काफी का कप भी कांप रहा था | त्रिहांश उसके कांपती हाथ पकड़ कर उसके बेहद करीब झुक कर उसके चेहरे पर ही धुआं उड़ाते हुए सिगेरेट को काफी की कप में फेंक दिया |    राज्ञा खांसते इधर उधर अपना चेहरा घुमाते हुए उससे पीछे जाने को जैसे ही एक कदम पीछे रखती उसके मुंह से दर्द भरी आह निकल गई ,क्यों की त्रिहांश ने अपने पकड़ को उसके हाथ में इतना मजबूत किया था की वह एक दम से करहा उठी |         राज्ञा नम आंखों से फिर त्रिहांश को देखी जो काफ़ी की कप को घूर रहा था | राज्ञा फिर काफी की कप को देखी तो उसकी आंखे हैरानी से चौड़ी हो गई | फिर वह हैरानी से त्रिहांश को देखने लगी जिसका चेहरा इस वक्त किसी खुंकार भेड़िया की तरह हो गया था |        उर्मी का रूम....   उर्मी बार बार करवट बदल कर सोने की कोशिश कर रही थी | लेकिन उसे सिर्फ आर्यांश और उसका प्रपोजल याद आ रहा था | उसके किए हुए जबरदस्ती kisses याद आ रहे थे |       उर्मी का चेहरा चिढ़ गया था | वह उठ कर बैठते हुए बोली,""_ पता नही यह कोन है ? पहले दिन kiss किया और दूसरे दिन प्रपोज? क्या अब यह तीसरी मुलाकात में मुझसे शादी करेगा........? "   बोलते हुए उर्मी का चेहरा गुस्से से भर गया | और वह चिढ़ते हुए बोली,""_ अगर उसने ऐसा किया भी न तो उसका सर फाड़ दूंगी मैं ? वह कैसे मुझसे जबरदस्ती शादी करेगा ? उसे मुझे मनाना होगा, अपने प्यार में गिराना.....oh God!! उर्मी की बच्ची क्या बकवास करते जा रही है तू ? "   उर्मी खुद को कोसते हुए डांटने लगी | वह क्या बड़बड़ाए जा रही है उसे ही पता ही चला था | तभी उसका फोन बजने लगा | उर्मी ने फोन चेक किया कॉल इस वक्त unknown number से आ रही थी |       उर्मी की आंखे सिकुड़ गए | वह जल्दी से बोली,""_ यह मुझे इस वक्त कोन कॉल कर रहा है ? "       उर्मी ने कॉल पीक किया तो उधर से आर्यंश की बेहद प्यार भरी आवाज सुनाई दी,""_ love you my sweet heart...!! "     उस आदमी की आवाज सुनते ही उर्मी की आंखे छोटी हो गई |     त्रिहांश का रूम....           त्रिहांश का कसके हाथ पकड़ने से राज्ञा दर्द से करहाते हुए उसे ही देखे जा रही थी | उसकी आंखो से आंसू बहने लगे थे लेकिन त्रिहांश को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा |     त्रिहांश इस वक्त अंदर ही अंदर जल रहा था क्यों की राज्ञा का रूहान के साथ बात करना उसे बिलकुल बर्दाश्त नहीं हुआ था | रूहान की हरकते और उसकी आंखो मे दिख रही इमोशंस से त्रिहांश को अच्छे से समझ आ गया था की रूहान राज्ञा से आखिर चाहता क्या है ?        राज्ञा दर्द से करहाते हुए अपना हाथ उससे छुड़वाने की कोशिश में उसके हाथ से काफी का कप नीचे गिर गया | coffe गरम था और लगभग coffee उन दोनो के पैरों पर ही गिरा था लेकिन त्रिहांश को इससे कोई फरक नही पड़ा लेकिन राज्ञा....? उस मासूम लड़की की मुंह से दर्द से चिक निकल गई थी |    वह रोते हुए नीचे बैठ गई | उसके गोरे पैर गरम काफ़ी गिरने से पल भर में पूरी तरह लाल हो गया था | वही त्रिहांश गुस्से से तेज तेज सांस लेते हुए उसे घूरे जा रहा था |     वह थोड़ा झुक कर राज्ञा का बाजू कसके पकड़ा फिर उठा कर दीवार को सटा देता है तो राज्ञा की आंखे दर्द से भींच गए | वह रोते हुए करहाते हुए उससे बोली,""_ अह्ह्ह्ह त्रि....त्रिहांश.......| "        त्रिहांश कसके उसके चेहरे को दबाते हुए गुस्से से बोला,""_ त्रिहांश... त्रिहांश और त्रिहांश का खौफ तुम्हे थोड़ी देर पहले उस आदमी के सामने याद नही आया ? हा ? तुम्हारी हिम्मत कैसी हुई उस लड़के से हाथ मिला कर बात करने की ? "     त्रिहांश के हाथो में राज्ञा का चेहरा एक दम से फसीज गया था | वह सांस भी ठीक से नही ले पा रही थी | वह छटपटाते हुए उससे अलग होने लगी | वही वह बेरहम इंसान उसे गुस्से से घूरे जा रहा था | वह फिर उसी लहजे में आगे  बोला,""_ कहा था न इस जिस्म पर सिर्फ मेरा हक है ? तो फिर तुमने उसे छूने कैसे दिया ? How dare you राज्ञा ?"    बोलते हुए त्रिहांश राज्ञा को साइड में दकेल देता है तो वह लड़की मुंह के बल नीचे गिर गई | वही त्रिहांश गुस्से में अपने आप खो चुका था | उसे होश ही नहीं रहा था की राज्ञा की छोटी सी वह भी अंजाने में किए हुए गलती का कितना बड़ा सजा दे रहा है |     राज्ञा रोते हुए अपना सर ऊपर कर उसे देखने लगी | उसने उसे छूने दिया ? कब ? बस वह लड़का अपना परिचय दे रहा था ? यह तो कैजुअल है ?     अचानक से राज्ञा को याद आया की त्रिहांश भी पलक से हाथ मिलाया था | वह गुस्से से मगर धीमी आवाज में बोली,"_ मैं उसके साथ सो कर नही आई हू त्रिहांश....| "     राज्ञा की यह बात सुनते ही त्रिहांश का चेहरा एक दम से भेड़ियों की तरह गुस्से से फुफकार भरने लगा | वह गुस्से से राज्ञा के तरफ बढ़ कर उसके बाजू पकड़ कर ऊपर उठाते हुए ,अपने एक एक बात भी चबाते हुए बोला ,""_ क्या कहा तुमने ? "    राज्ञा को बहुत तकलीफ हो रहा था | लेकिन यह उसकी किस्मत थी | वह गुस्से से बोली,""_ गलत तो नही कहा ? "    त्रिहांश का पकड़ उसके बाजू में कस गया | जिससे राज्ञा की आंखे भींच गए |लेकिन वह अपनी बात जारी रखते हुए बोली,""_ बस वह लड़का मुझसे हाथ मिला कर अपना परिचय दे रहा था लेकिन आप मुझ पर ऐसे गुस्सा करने लगे  है ? जैसे मैं उसके साथ रात बिता कर आई हु | "       गुस्से से त्रिहांश की माथे पर नसे उभर कर बाहर आ गए | वह अपने दांत पीसते हुए कुछ कहता उससे पहले ही राज्ञा उसे खुद से दूर कर थोड़ा तेज आवाज़ में पूछी, ""_ आप भी तो उस पलक से हंसते हुए अपना परिचय दे रहे थे ? उसका हाथ पकड़ कर बात कर रहे थे ? मैने आपसे पूछा ......की आपने उसे छूने क्यों दिया ? पूछा मैंने ? नही ना अह्ह्हह....| "      राज्ञा आगे कुछ भी कहती उससे पहले ही त्रिहांश गुस्से से उसका चेहरा दबाते हुए जोर से उसके साइड के दीवार में मुक्का दे मारा |   राज्ञा की एक एक बात त्रिहांश को बहुत गुस्सा दिला रहा था | उसे अब ऐसा लगने लगा था की वह गुस्से में आ कर आज राज्ञा के साथ कुछ कर ही देगा |     वह गुस्से से अपनी जलती नजरो से राज्ञा को देख रहा था | वही राज्ञा रोते हुए अपने आंखे खोली तो त्रिहांश बेहद ठंडे लहजे में बोला,""_ तुम्हे मुझ पर सवाल उठाने का हक किसने दिया ? और तुम्हारा औकात ही क्या है the त्रिहांश अग्निहोत्री से सवाल करे ? मैं जो भी करु जिसके साथ भी करु ? तुम्हे सवाल उठाने का हक नहीं है समझी ? "   राज्ञा का दिल बैठ गया | उस आदमी की यह जो जहर से भरे हुए लफ्ज़ अभी अभी उसके मुंह से जो निकले थे वह उसके दिल को ऐसे चिर कर चुरू कर दिया था की अब उसका जुड़ने की गुलजाइश ना बचा हो |        वह एक दम कमज़ोर पड़ गई | वही त्रिहांश आगे अपनी बात जारी रखते हुए बोला ,""_ तुम्हारे जिस्म पर सिर्फ मेरा नजर होगी और उसे छूते हुए अपने बाहों में दबोचना भी मुझे ही है सुना तुमने ? "   त्रिहांश लास्ट लाइन लगभग चिल्लाते हुए बोला तो राज्ञा के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कान बिखर गया | वह धीमी आवाज में उससे बोली,""_ सुना मैने और अच्छे से समझा भी लिया की आपने मुझे वो बना दिया | "    त्रिहांश की आइब्रोज सिकुड़ गए | वह गुस्से से पूछा ,""_ वो मतलब क्या ...? "       राज्ञा त्रिहांश के करीब जा कर अपने एक एक बात पर भी जोर देते हुए बोली,""_ वो....आप जैसे अमीर लोग अपने स्टेटस बचाने उन्हे अपनी भाषा में मिस्ट्रेस कहते है और हम जैसे गवार गरीब लोग किसी की रखैल....| "    " चटाक......| " राज्ञा के गाल पर त्रिहांश ने जोर से एक चांटा मारा तो राज्ञा फिर से फर्श पर गिर गई | वही त्रिहांश गुस्से से तेज तेज सांस लेते हुए उसे घूरे जा रहा था | वह कैसे यह बात कह सकती है ?   वह गुस्से से चिल्लाते हुए बोला ,""_ इतना बकवास करने की हिम्मत कैसे की तुमने हा ? "    राज्ञा को आज बोलना ही था तो वह रोते हुए उठ कर उससे बोली,""_ मैने कोई बकवास नही कहा है त्रिहांश ? सच कहा ? जिस तरह आपने मुझे इस घर में ला कर रखा है ना उससे कही ना कही सबके दिल में यही बैठा की मैं आपकी रखैल औरत हु....!!! "    त्रिहांश का मन कर रहा था की वह इस लड़की को और जोर जोर से थप्पड़ मारे ? लेकिन राज्ञा किस हद तक कमजोर है और वह कितना टॉलरेट कर सकती है ? उसे अच्छे से पता था |   वह गुस्से से उसका नाम चबाते हुए लिया ,""_ राज्ञा....? "    राज्ञा रो रही थी | उसे ऐसा लग रहा था की उसका दिल टूट गया है अब उसकी जिंदगी में कुछ बचा ही नहीं है | वह बोली,""_ सब आपसे डर कर कुछ नही कहते लेकिन मुझे समझ आता है ,और वह पलक जिससे आपकी शादी हो रही है ना वह भी कहेगी एक दिन देख लेना,सबके मुंह से अपने लिए ऐसे word सुन कर मैं उसी वक्त.....| "  "  Just shut up......| "  त्रिहांश गुस्से से चिल्ला उठा तो राज्ञा रोते हुए अपना सर नीचे झुका ली | वही त्रिहांश उसके दोनो बाजू पकड़ कर फिर से चिल्लाते हुए बोला ,""_ अगर एक शब्द भी तुम्हारी मुंह से अभी निकला न तो तुम्हारा जान ले लूंगा |    रोते हुए राज्ञा ने अपना सर ऊपर कर उसे देखा | फिर बेहद दर्द भरी आवाज में बोली,""_ ले लो त्रिहांश,अब यह जान मुझे बोझ लगने लगी है , मै सच में इस जिंदगी को जीना नही चाहती ,मार दीजिए न मुझे ....| "    त्रिहांश की आंखे कसके बंद हो गए | उसे बहुत गुस्सा आ रहा था और वह राज्ञा को और तकलीफ नही देना चाहता था  वह राज्ञा खुद से दूर धखले कर वहा से बाहर चला गया |    वही राज्ञा रोते हुए थोड़ी देर वही पड़ी रही | फिर रूम से बाहर चली गई |         To be continued.................,    Â