Chapter 57: chapter 57

Billionaire's Dark DesireWords: 27565

अब आगे........,   माया अर्यांश और अहीरा को ले कर मंदिर से बाहर ले जा रही थी की तभी देविका उनके रास्ते के बीच में आ कर बोली,""_ इतना गुस्सा अच्छी बात नहीं है माया..,आओ यहां हमारे साथ बैठो,हमसे तो तुम्हारा कोई दुश्मनी नहीं है | "    देविका की बात सुन माया कुछ कहने को हुई की वहा एक दम से कुछ ब्लास्ट होने की आवाज गुंज उठा | अचानक से ऐसा ब्लास्ट होने से एक पल के लिए तो मंदिर भी हिल गया |     राठौड़ परिवार के सारे लोग वही मौजूद थे और अग्निहोत्री परिवारों में से सभी थे लेकिन त्रिहांश वहा नही था | वह तो कब का वहा से चला गया था |       अचानक से इस तरह गड़गड़ाहट का शोर सुन कर सब एक दम अपने जगह में जम गए थे | वही राज्ञा की नजर आस पास जा रही थी | क्यो की उसके बगल में उसका मॉन्सटर पति नही था | वह जल्दी से नीचे भागते हुए त्रिहांश का नाम ली,""_ त्रिहांश.....!! "     त्रिहांश का नाम सुन कर वेदिका,अजय,विनोद ,इशान,इशा धीरांश सबको ख्याल आया की इस वक्त वहा त्रिहांश नही है | सब लोग राज्ञा के पीछे भागने को हुए की तभी धीरांश उन्हे रोकते हुए बोला ,""_ सबको जाने की जरुरत नही है हम देखते है , | "    राज्ञा अभी एक ही सीढ़ी उतरी थी की तभी माया उसका बाजू पकड़ कर रोकते हुए बोली,""_ नही बच्चा,वह ठीक होगा तुम नीचे मत जाओ देखो नीचे कैसे अतरा पतरा हुआ है और बहुत सी धुआं उड़ रहा है | "   राज्ञा एक दम से सहम गई थी | त्रिहांश को वह कुछ भी होते हुए देख नही सकती थी | वह अपना सर ना में हिलाते हुए उससे अपना हाथ छुड़वा कर बोली,""_ नही .... मुझे देखना है वह ठीक है या नही ...., छोड़िए हमे.....!! "    रोते हुए राज्ञा ने माया का हाथ झटकाने को हुई की तभी आर्यंश ने कहा,""_ दी....आप रुकिए हम देख कर आते है ,आप मत जाइए | "      आर्यांश ने कह तो दिया था लेकिन सुनने का पेशेंस उस लड़की में अब कहा था ? वह जल्दी से माया से अपना हाथ छुड़वा कर नीचे के तरफ भाग गई | मंदिर में देविका, अभय,और सुहास खड़े थे | उनके चेहरे पर भी परिशान साफ साफ नजर आ रहा था लेकिन नीचे हुआ क्या है उन्हे अच्छे से खबर था ?     राज्ञा भागते हुए नीचे चली गई | वही माया भी उसके पीछे जाने को हुई की आर्यांश उसे रोकते हुए बोला,""_ मम्मा आप रुकिए मैं दी और जीजू को देख आता हू |"    आर्यंश राज्ञा के पीछे भाग कर गया और उसके पीछे ही ईशान भी | उन्हे बिलकुल समझ नही आ रहा था की नीचे क्या कहा ? अचानक से बॉम्ब कैसे ब्लास्ट हो गाया? किसी को पता नही चला था | और ऊपर से मंदिर के नीचे सिर्फ धुआं ही धुंआ उड़ रहा था |       राज्ञा त्रिहांश को आवाज लगाते हुए नीचे गई,""_ त्रिहांश.....? त्रिहा.....!!! "   ज्यादा धुंआ उड़ने से राज्ञा खांसते हुए आस पास देखने लगी लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन बहुत सी सायरन की साउंड सुनाई दे रहा था | राज्ञा आस पास त्रिहांश को ढूंढने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था |   मंदिर में इस वक्त वेदिका त्रिहांश के लिए रोए जा रही थी | वह भगवान से प्रे भी कर रही थी की उसके बच्चे को कुछ न  हो जाए और वह सही सलामत रहे | त्रिहांश को वह कुछ होते हुए नही देख सकती थी |    वही माया की बेचैनी बढ़ गई थी | राज्ञा को अब जा कर उसे अपने आंखो के सामने देखने का मौका मिल रहा था और पता नही क्यों उसके दिल में अजीब सी बेचैनी मेहसूस होने लगा था जैसे कुछ बुरा होने वाला हो ? वह रोते हुए सुधर्व से लिपट कर बोली,""_ सुधर्व कुछ अजीब सी बेचैनी हो रहा है ,कुछ बुरा तो....!! " "  कुछ नही होगा माया...भगवान पर विश्वास रखो | "  माया को समझाते हुए सुधर्व ने कहा | लेकिन जब तक ragya को वह सही सलामत नही देखेगी उसे चैन कहा मिलने वाला था |    राज्ञा इस वक्त खांसते हुए आस पास देख रही थी | उसके आस पास अभी भी धूंआ ही था जिस वजह से वह कुछ देख नही पा रही थी लेकिन उसे किसी की कदमों की आहट अपने तरफ आते ही मेहसूस हो रही थी | वह त्रिहांश का नाम लेने को हुई की पीछे से उसके मुंह पर किसी ने कसके हाथ रख कर वहा से ले जाने लगा , राज्ञा छटपटाते हुए उससे खुद को छुड़वाने लगी लेकिन उस इंसान का पकड़ ज्यादा ही सख्त और मजबूत था |     राज्ञा दी.....? भाभी......? " ईशान और आर्यांश दोनो ही एक साथ राज्ञा को ढूंढते हुए आवाज लगाने लगे | उन्हे तो ना त्रिहांश नजर आ रहा था और नाही राज्ञा......,करीब आधा घंटे के बाद सब कुछ शांत होने लगा ,लेकिन एक के बाद एक पुलिस के वैन और एंबुलेंस आ रहे थे | उन लोगो को खबर तो मिला था कि वहा अभी अभी बॉम्ब ब्लास्ट हुआ है लेकिन वहा आस पास लोगो का आना जाना नही था क्यों की वह मंदिर शहर से बाहर था जिस वजह से बॉम्ब ब्लास्ट होने से ज्यादा लोगो को या यू कहे की ज्यादा से ज्यादा गिनती के लोगो को ही चोट आई होगी |  सब कुछ शांत हो चुका था | लेकिन वहा ना राज्ञा नजर आ रही थी और नाही त्रिहांश .....,अर्यांश और ईशान बिना रुके त्रिहांश और राज्ञा को ढूंढने लगे थे | सब कुछ शांत होने से सारे घरवाले भी वहा आ गए |    ईशान उन सबको देख कहा,""_ ना भाई नजर आ रहे है और नाही भाभी.....!! "     राग्य तो तुम्हारे साथ ही थी तो वह कैसे गायब हो सकती है ईशान ? " वेदिका आस पास देखते हुए ईशान से पूछी | त्रिहांश तो पहले से ही गायब था तो वह समझ जाते लेकिन राज्ञा के पीछे ही तो वह दोनो भाग कर गए हुए थे |      माया की सांसे ऊपर नीचे होने लगे थे | वह आस पास देखते हुए जोर जोर से राज्ञा को आवाज लगाने लगी | लेकिन राज्ञा का वहा कोई अता पता ही नही था | तभी माया की नजर देविका और उसका परिवार पर गया | वह लोग अब कार में बैठ कर वहा से जा रहे थे | वह चारो उसे थोड़ा अजीब लगे लेकिन राज्ञा की गायब होने की खबर उसे इस वक्त सदमे में डाल दिया था |   वह फिर अपना फोन निकाल कर त्रिहांश को कॉल लगाई ,पता नही उसे कुछ सूझ नही रहा था तो उसने त्रिहांश को कॉल किया | त्रिहांश का फोन वही आस पास रिंग होता सुनाई देने लगा तो सबकी नजर आस पास गई |    तभी वेदिका की नजर एक पत्थर के नीचे त्रिहांश का फोन गिरा हुआ दिखा | वेदिका का एक दम से दिल बैठ गया | वह रोते हुए आगे बढ़ कर उसका फोन उठाने को हुई लेकिन डर से वह चिल्लाते हुए पीछे हट गई,""_ त्रिहांश....!! "      त्रिहांश का फोन ही वहा गिरा हुआ था लेकिन उस पर खून की छींटे गिरे हुए थे | वेदिका की चिक सुन सारे घरवाले उसके पास भाग कर गए लेकिन फोन को खून से सना देख सबकी होश उड़ गए |     धीरांश या सारा नज़ारा बिना भाव के देख रहा था | उसे पूरा यकीन था त्रिहांश को कुछ हुआ नही है अगर त्रिहांश को कुछ हुआ नही तो उसकी जरूरत यानी उसकी डिजायर  जिससे है मतलब राज्ञा को भी कुछ नही हुआ है | लेकिन वह आदमी यह कहा इस वक्त ?   धीरांश गुस्से से वहा से निकल गया |   दूसरी तरफ ....…             कार के डिक्की में इस वक्त एक लड़की को उसके हाथ पैर बांध कर फेंक दिया था | उसके मुंह पर भी इस वक्त पट्टी बांध दिया था और वह इस वक्त पूरी तरह बेहोश थी |          वही कार के ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए आदमी बेहद गुस्से से कार को बेहद फास्ट चला रहा था | थोड़ी देर बाद उसका कार आ कर एक फुराने फैक्ट्री के थोड़ी दूरी पर रुका | ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए वह लड़का कार से बाहर आ कर वह कार के बोनट को टिक कर अपने जेब में से एक सिगरेट निकाल कर ,जला कर उसका कश लेने लगा |      उस इंसान का औरा इस वक्त बेहद सख्त था | और गुस्से से उसके माथे पर नसे तक उभर कर बाहर आ गए थे | उसकी नजर उस फैक्ट्री पर टिकी थी |     फैक्ट्री के सामने दो ब्लैक कार खड़े थे | और अंदर इस वक्त कुछ लोगो की शैतानी हंसी सुनाई दे रहा था |     उस फैक्ट्री के बड़े से हाल में इस वक्त एक लड़की को एक चेयर पर बांध कर बैठाया था | उस लड़की को हाथ पैर बांध दिया था लेकिन उसके चेहरे पर काला मास्क डाल दिया था जिस वजह से उसका चेहरा ढका हुआ था |      वह लड़की छटपटा रही थी लेकिन उसकी मुंह से आवाज नही निकल रही थी क्यों की उसके मुंह पर भी पट्टी बांध दिया था | जिस वजह से वह आवाज तक निकाला नही पा रही थी |     उस लड़की के सामने विराज ,उसका भाई अभय,देविका और सुहास ....,और उनके आदमिया बस जोर जोर से हंसे जा रहे थे |    तभी अचानक से अभय अपनी हंसी को रोकते हुए बोला,""_उस त्रिहांश अग्निहोत्री को इतना आसनी से मौत का घाट उतार दिया मुझे तो यकीन नही हो रहा है मां,लेकिन अच्छा हुआ वह इंसान आखिर मर ही गया और उसकी बीवी......? "  अभय अपनी बात बीच में ही रोक कर उस लड़की को बेहद गंदी नजरो से देखते हुए आगे बोली,""_ आखिर उसकी बीवी....नही नही मेरी होने वाली बीवी मेरी हो ही गई | "    देविका अभय के पास आ कर ,उसके कंधा थपथपाते हुए बोली,"" _ जिस लड़की की वजह से उस त्रिहांश ने तुम्हारा यह हालत किया था आज उसका मौत हुआ अभय अब यह लड़की तेरा सेवा करते हुए पूरी जिंदगी तुम्हारे कदमों में गिर कर अपनी जिंदगी काटेगी | "   बोलते हुए देविका गुस्से से उस लड़की को देखने लगी ,जो छटपटाते हुए अपने आपको चेयर से छुड़वाने की कोशिश कर रही थी |          वही देविका की बात सुन अभय के कुछ पुराने यादें ताजा हो गए थे |     20 साल पहले .....        तुम वहा नही जाओगी ...!! " एक 12 साल का लड़का गुस्से से एक लड़की की बाजू को पकड़ते हुए गुस्से से चिल्लाया | वह लड़की बस 7 या 8 साल की थी या उससे भी कम, वह अपने मासूम सी आवाज में बोली,""_ लेकिन क्यों...? मुझे वहा जा कर खेलना है अन...श | "   " तुम्हे तो मेरा नाम भी बोलने नही आता और तुम बहस करना चाहती हो ? " वह लड़का गुस्से से उस लड़की की गाल पिंच करते हुए बोला | उस मासूम लड़की की आंखे नम हो गए | वह रोती उससे पहले ही वह लड़का उससे बोला ,""_ रोने से कुछ नही होगा lovey, तुम नही जाएगी मतलब नही  | "    वह लड़की रोते हुए वही खड़ी रही | उसे लड़के का दिमाग फिर गया था | वह गुस्से से चिल्लाया,""_ चुप....!! "  वह इरिटेट हो गया था | वही वह लड़की उससे शिकायत करते हुए बोली,""_ मै दादू से बताऊंगी आ आपने....!! "    वह लड़की रोते हुए इतना ही बोल पाई थी की तभी उसके कान में एक और लड़के की आवाज सुनाई दी ,""_ lovey...., ये देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हु | "     वह लड़की मुड़ कर देखी, उस लड़के के हाथ बहुत बड़ा toy था जो उस लड़की के पसंद का था | अचानक से उस लड़की की चहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गया | वह भागते हुए उसके पास जाने को हुई लेकिन वह पहले वाला लड़का जो त्रिहांश था,उसने कसके लवी यानी राज्ञा का हाथ पकड़ कर रोक लिया था |    राज्ञा रोते हुए त्रिहांश को देखने लगी ,त्रिहांश गुस्से से सामने खड़े लड़के को देख रहा था | वह लड़का अभय था | अभय गुस्से से त्रिहांश के पास आ कर गुस्से से बोला,""_ तुम उसे मेरे पास आने से क्यों रोक रहे हो ? "   "  क्यों की यह मेरी है !!!! " त्रिहांश गुस्से से अपने दांत पीसते हुए बोला |      लेकिन तभी राज्ञा बोली,""_ नही नही मैं आपकी नही... आप बुरे है .....आप .....!! "    चुप.....?? " त्रिहांश चिल्लाते हुए बोला तो राज्ञा का मुंह बन गया | वह सिसकते हुए अभय को देखने लगी जैसे कह रही हो की त्रिहांश को कुछ कहे | अभय भी गुस्से से त्रिहांश को घूर रहा था |    वह गुस्से से टॉय को वही फेंक कर त्रिहांश को मारने को आया | लेकिन उस छोटे उम्र में भी त्रिहांश बेहद रूढ़ और ढीट था | वह गुस्से अभय के मुंह पर एक पंच मारा ,जिससे अभय पीछे के तरफ जा गिरा |      लेकिन अभय भी कम नही था | वह गुस्से से उठ कर वही पास टेबल पर रखे हुए वास को उठा कर उसके ऊपर फेंक दिया | त्रिहांश इस वक्त राज्ञा के साथ खड़ा था | त्रिहांश फुर्ती से जा कर उस वास को उसके ऊपर ही फोड़ता राज्ञा बीच में आ गई ,उसे ऐसा लगा की वह वास उस पर ही आ गिर रहा है |    उसकी इस गलती की वजह से उसे और त्रिहांश दोनो पर ही वास गिरा | लेकिन त्रिहांश उसे बचाने के लिए अपने नीचे करा तो कांच की तुकूड़े उसके पीठ पर लगे लेकिन कुछ कुछ राज्ञा पर गिर गए थे | राज्ञा को दर्द बरदाश्त नहीं हुआ तो वह जोर जोर से रोने लग गई ,वही राज्ञा को चोट लगा देख त्रिहांश का गुस्से सा बढ़ गया |    दर्द तो उसे भी बहुत हो रहा था ,उसके पीठ पर कांच के टुकड़े भी चूब गए थे लेकिन राज्ञा को दर्द में देख वह बौंकला गया | के जल्दी से जा कर अभय के बालो को अपने मुट्ठी में भर कर बिना रुके मारने लगा | अभय भी उस पर हाथ उठा रहा था लेकिन त्रिहांश का सामना नहीं कर पा रहा था और और त्रिहांश उसे गुस्से से पीटते हुए सीढियों के पास ले आया था |     त्रिहांश गुस्से से मारते हुए उसे पीछे के तरफ दक्का मार दिया | घर पर कोई नहीं था बस कुछ सर्वेंट्स थे ,वह उनका झगडा देख उनके पास आते उससे पहले ही त्रिहांश गुस्से से  पास में। रखे हुए टेबल को नीचे के तरफ धक्का दे दिया जो लुढ़कते हुए जा कर अभय के पैरो पर गिर गया या कहे की पूरी तरह अभय के दोनो पैर उसके नीचे कुचल सी गए |     त्रिहांश का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ था | क्यों की अभी भी राज्ञा का रोना उसके कान में गूंजने लगे थे | त्रिहांश राज्ञा के पास आ कर उसे अपने गोद में लिए अपने रूम में चला गया |    वही अभय दर्द से चिल्लाने लगा था,"__ अह्ह्ह्ह अहहा...!! "  "  अभय...अभय.....क्या हुआ ? "  अभय को इस तरह चिल्लाता देख देविका उसका गाल पकड़ते हुए बोली |    अभय का पूरा चेहरा पल भर में ही पसीने से भीग गया था | वह अपना चेहरा साफ करते हुए आस पास देखने लगा | फिर वह अपने पैरो को देखने लगा जो 20 साल से पैरालाइज्ड हो गए थे सिर्फ त्रिहांश की वजह से हुआ था |    " क्या हुआ अभय ? " देविका अपने पल्लू से अभय का चेहरा पोचते हुए पूछी |    To be continued.......,   .....