Chapter 58 of 59

chapter 58

Billionaire's Dark Desire2,703 words~14 min read

  अब आगे ........,         अभय अपनी पुराने यादों से बाहर आ कर हैरानी से आस पास देख रहा था | वह फिर सामने चेयर पर बांधे हुए लड़की को देख बेहद गुस्से से अपने दांत पीसते हुए बोला,""_ इस लड़की के लिए उस त्रिहांश अग्निहोत्री ने मेरे पैरो को कुचल कर रख दिया था और आज मैने उसके ही कार में बॉम्ब फिक्स कर उड़ा दिया अब.....!! "    अभय एक तक अपनी गंदी नजरे राज्ञा पर ही टिकाए गुस्से से बोला ,""_ अब इस लड़की की बारी.....,सब कुछ इस लड़की की वजह से ही तो मेरी जिंदगी में ऐसा हुआ ,अब में बैठे बैठे ही इसे नरक दिखाऊंगा | "      देविका,सुहास और विराज के चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ गया | वह एक टक उस लड़की को देखने लगे | वह अभी भी छटपटा रही थी |       अभय अपने व्हीलचेयर को मूव करते हुए उस लड़की की करीब गया | फिर उसके बाल कसके पकड़ कर अपने तरफ झुकाते हुए बोला,""_ lovey...., हर पल तुम्हे मौत का मंजर दिखाते हुए तुम्हारे पति का याद दिलाऊंगा,और तुम चिंता मत करो....., मैं तुम्हे उसके पास ही भेजूंगा | "    बोलते हुए जोर जोर से हंसते हुए उस लड़की के बाल छोड़ कर अभय एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर झाड़ दिया तो उस लड़की का चेहरा एक तरफ झुक गया और उसी के साथ उसके चेहरे से मास्क हट कर नीचे गिर गया |    जैसे ही उस लड़की का चेहरा देख उन चारो का होश उड़ गया | वह राज्ञा नही उनके ही घर की बेटी थी |        वह लड़की रोते हुए उन सबको देखने लगी | वही देविका जल्दी से उसके पास आ कर उसके मुंह पर बांधे हुए पट्टी निकालते हुए बोली,""_ ध्रुवी.....? "   द्रुवि जोर जोर से रोने लग गई |वही अभय और सुहास गुस्से से विराज को देखने लगे ,विराज हैरानी से ध्रुवि को देख रहा था | उसने तो राज्ञा को किडनैप किया था फिर उसकी जगह पर उसकी बहन कैसे आई ?    देविका चिल्लाते हुए विराज को आवाज लगाई,""_ विराज....? "    " मां..में......? " विराज ने इतना कहा ही था की वहा किसी की जोर जोर से हंसने की आवाज गूंजने लगी | बेहद भयानक और डरवाना तरीके से गूंज रही यह आवाज सुन कर किसी का भी रुह तक कांप जाता |        विराज ,अभय ,सुहास और देविका मुड़ कर देखे , सामने त्रिहांश खड़ा था ,जो बेहद खतरनाक हंसी हंसते हुए उन लोगों को देख रहा था | उसकी हंसी बिल्कुल ऐसा था कि जैसे वह उन लोगों पर हंस रहा हो ,वह उनकी बेवकूफी पर ही तो हंस रहा था |     त्रिहांश अग्निहोत्री कोई ऐसा वैसा आदमी नहीं था, वह अपने में ही एक ब्रांड था | वह अपना सर टेढ़ा कर अपना गर्दन रब करते हुए एक नजर अभय को देखा ,फिर उसकी बहन ध्रुवी को , ध्रुवी के गाल पर अब तक लाल निशान आ गए थे ,जिसे राज्ञा समझ कर अभय ने उसे थप्पड़ मारा था |      त्रिहांश के हाथों की मिट्टी बन गई, अगर धुवी की जगह में सचमुच उसकी ragya होती तो यह थप्पड़ उसे पड़ता और यह लाल निशान उसके गाल पर होते | यह सोच सोच कर त्रिहांश का चेहरा बेहद गुस्से से तपने लगा ,अभय सोचने की भी हिम्मत कैसे की वह उसकी बीवी पर हाथ उठाने की कोशिश भी करेगा ? हा ? "    त्रिहांश गुस्से से अभय के करीब बढ़ता तभी उनके आदमियों त्रिहांश के चारो और फैल गए | त्रिहांश बेहद गुस्से से उन सबको घूरते हुए बेहद सख्ती से बोला ,""_ लगता है मंदिर में मिला है वह आप लोगो के लिए काफी नही था ...चलो आ जाओ ....!! "   बेहद गुस्से से दहाड़ते हुए अपने शर्ट के स्लीव्स को फोल्ड करने लगा | वही देविका के आदमियों का फसीना छूट रहा था | उन लोगो को खड़े खड़े ही त्रिहांश ने मौत का मंजर दिखा दिया था |        त्रिहांश उन आदमियों के करीब बढ़ता की तभी वह आदामिया खुद ही उसके सामने घुटने टेक दिया | यह देख त्रिहांश की चेहरे पर बेहद तिरछी मुस्कान आ गया |    त्रिहांश अपने नजरे उठा कर माया को देखा,माया, विराज सुहाश,अभय सब उसे ही बड़े ही नफ़रत भरी नज़र से देख रहे थे, लेकिन अब उन लोगों को अपने ही आदमियों पर गुस्सा आ रहा था |      त्रिहांश गुस्से से अभय को देखते हुए उनके करीब आया की तभी विराज उसे मारने हाथ उठाया , तभी त्रिहांश गुस्से से उसके हाथ पकड़ कर मरोड़ते हुए देविका को देख कर बेहद तंज कसते हुए बोला,""_ कितनी बेवकूफ बेटे को जन्म दिया है तुमने देविका मल्होत्रा ? इन्हे देख कर मुझे तुम पर ही तरस आ रहा है ,एक का ना अकल ठीक है और नाही पैर....,और दूसरा ? खुला सांड की तरह बेवकुफो की तरह काम करने लगता है |     बोलते हुए त्रिहांश गुस्से से विराज के मुंह पर दो-तीन पंच मारते हुए उसे दूर फेंक दिया ,त्रिहांश ने यह सब इतनी जल्दी में किया था कि वहां खड़े किसी भी इंसान को समझ नहीं आया था कि अभी-अभी विराज के साथ त्रिहांश ने क्या किया |     अअह्ह्ह्ह्ह.....? " त्रिहांश का इस तरह गुस्से से फेंकने से विराज दूर तक जा कर गिर गया | उसके मुंह में से खून निकलने लगा था ,पता नहीं त्रिहांश का मुक्का मारने से उसकी कितने दांत गिर गए उसे तो अंदाजा भी नहीं था |।     " त्रिहांश ...? "  अपने बेटे को इस तरह मार कर दूर फेंकता देख, देविका गुस्से से त्रिहांश का नाम चिल्लई , त्रिहांश का औरा अब बेहद सख्त और गुस्से से भरा हुआ था | क्यों की देविका का यह हमला न सिर्फ उसे चोट पहुंचाने वाली थी बल्कि उसकी असली टारगेट त्रिहांश की बीवी थी |       त्रिहांश किसी भी हालत में अपनी बीवी को कुछ भी होते हुए नहीं देख सकता था, क्योंकि वह इंसान उस लड़की के लिए इंसान कम साइको ज्यादा था | उसके लिए हर पार करने वाली हैवानगिरी दिखाने वह कभी पीछा नहीं हटता था |      त्रिहांश के दिल में अब राज्ञा के लिए प्यार पनप रहा था और यह प्यार उस साइको इंसान के दिल में प्यार का नाम नहीं जुनून और पागलपन का नाम लेने वाला था | बचपन से ही वह उस लड़की के लिए पागल था लेकिन उसने कभी उस पागलपन को प्यार नही समझाता या यू कहे की उसे प्यार क्या होता है पता ही नही था |          देविका चिलाते हुए विराज के पास गई,विराज अब मुंह के बल गिरा था और त्रिहांश का इस तरह जोर-जोर से मांरने से वह आदमी इस वक्त अधमरा होने की हालत में पहुंच चुका था |      वही अभय का गुस्सा बढ़ते जा रहा था | त्रिहांश की वजह से उसने अपने दोनों पैर खो दिया था और आज विराज पर भी हमला कर रहा था और त्रिहांश के वजह से ही वह अपनि बहन पर आज हाथ उठाया था, सब की वजह सिर्फ और सिर्फ त्रिहांश था |    सुहास को भी इस वक्त बहुत गुस्सा आ रहा था| वह बिना सोचे समझे त्रिहांश पर हाथ उठाने को हुआ कि तभी त्रिहांश उसे रोकते हुए बोला ,""_ गलती से भी मुझ पर हाथ उठाने की हिम्मत मत करना मिस्टर मल्होत्रा, अगर मैं हाथ उठाने पे आ गया तो आप इस दुनिया से हाथ उठा देंगे |    सुहास के हाथों की मिट्टी बन गई वही देविका बेहद नफरत से त्रिहांश को देखते हुए विराज को उठा रही थी | वहीं त्रिहांश जा कर एक चेयर पर बैठते हुए बोला,""_ मै कोई आप लोगो को चपरी जैसा लगता हु ? अगर मुझे मारना है तो कुछ अच्छा प्लान बनाओ यार यह क्या है। ? "    त्रिहांश चिड़ते हुए देविका और अभय को देखने लगा | उन लोगो का प्लान कुछ खास नही था | बस उन्हे उनकी फैमिली को मंदिर में बहकाना था और मौके का फायदा उठा कर राज्ञा को उठाना था | हुआ भी कुछ ऐसा ही था | उन लोगो को पहले ही पता था की राठौड़ और अग्निहोत्री परिवार आज उस मंदिर में आएगा क्यों की हर साल इसी दिन उनकी परिवार के तरफ से पूजा रखा जाता था और मलहोत्रा फैमिली भी इससे शामिल ही था लेकिन वह लोग अलग से पूजा कर लेते थे लेकिन धीरांश के वजह से इस साल अग्निहोत्री और राठौड़ परिवार के पूजा एक साथ हो रहा था |         इस बारे में देविका को उस मंदिर के पुजारी से पता चला था | तो वह भी उसी वक्त मंदिर आ गए थे | और राज्ञा पर वह बार बार हमला कर रहे थे लेकिन त्रिहांश के वजह से वह बार बार ना कामयाब हो रहे थे तो आज के प्लान में पहले त्रिहांश को मारना था और उसके बाद राज्ञा को ....,लेकिन त्रिहांश अग्निहोत्री को बेवकूफ बनाना कोई खेल नहीं था, कोई आसान बात नहीं था |     वह इंसान बेहद शातिर और अपने में है उलझे हुए एक सुलझा सा इंसान था | उसे समझना हर किसी के बस में नहीं था या यूं कहे कि उसे समझने वाला इंसान इस दुनिया में ही नहीं था | वह बेहद खतरनाक था उसका हर एक मूव ,हर एक कदम बेहद परफेक्ट होता था |   देविका और विराज के प्लान के मुताबिक वह पहले त्रिहांश के पास में ही पार्क किए हुए कार में बॉम्ब fix किया था ,ताकि त्रिहांश को अधमरा कर उसी कार में फेंके | और आस पास अपने आदमियों को चौकन्ना रहने कहा था क्यू की जैसे ही त्रिहांश उन्हे दिखेगा उस पर एक साथ ही हमला करना है ,विराज के अदामिया वेल trained बॉडीगार्ड्स थे तो वह त्रिगंश पर भारी पड़ गए थे ,लेकिन त्रिहांश को हराना इतना आसान नही था | वह लोग उस पर टूट पड़े थे लेकिन त्रिहांश बेहद ट्रिक यूज करते हुए बस हर एक को एक ही पंच पर मारा डाला था |    त्रिहांश ने उन लोगो को ऐसा मारा था की उन्हे दर्द तो बेहिसाब हो गया था लेकिन वह समझ नही पाए थे की त्रिहांश ने आखरी मारा कहा था ? त्रिहांश ने उसे ऐसा पीटा तो  उनके बदन में दर्द हो रहा था ,अंदर की हड्डी टूट रही थी लेकन उनके शरीर पर घाव नजर नहीं आ रहा था | विराज का पूरा ध्यान राज्ञा पर था जैसे ही त्रिहांश का अंत होगा तो वह राज्ञा को ले जा कर अभय के कदमों में फेंक देगा |   सारे आदमियों को मारते हुए त्रिहांश ने अपने बॉडीगॉर्ड को कुछ इशारा किया ताकि बॉम्ब को defuse करे लेकिन बॉम्ब डिफ्यूज होने वाला नही था | यह देख उसे दूर जा कर फेंकने का इशारा किया लेकिन दूर ले जाने तक का समय नहीं था उस बॉडीगार्ड ने पास में ही फेंक दिया था क्यू की मंदिर में इतना भी भीड़ नही था बस गिनते के कुछ कुछ  लोग थे जिन्हे त्रिहांश के बॉडीगार्ड ने दूर भगा दिया था |    बॉम्ब ब्लास्ट हुआ ही था की त्रिहांश विराज के पास जाने को हुआ की तभी उसे राज्ञा का रंग का आवाज सुनाई दिया तो त्रिहांश रुक गया | राज्ञा का बेचैन भरा आवाज सुन वह एक पल के लिए अपने जगह में जम गया था | उसे नही लगा था की राज्ञा उसे दूंढते हुए आयेगी भी|    त्रिहांश उसके तरफ जाने को हुआ ही था की त्रिहांश के कुछ अदामिय धूंआ उड़ाने का मशीन ला कर पूरी तरह उस जगह को धूंआओ से भरने लगे | राज्ञा उस धूंआ में फस गई थी | वह कुछ समझ पाती उससे पहले ही त्रिहांश पीछे से आ कर उसके मुंह पर हाथ रख कर उसे साइड में ले जाता तो उसी वक्त त्रिहांश के आदमी द्रुवी को ला कर वहा खड़ा किया |    विराज को अपने आस पास यह होने का खबर ही नही मिला शायद वह ज्यादा ही ओवर कॉन्फिडेंट में था | ध्रुवी खांसते हुए बोलती की तभी विराज आ कर उसके मुंह पर किसी बेहोश की पाउडर का दावा से लगा काला मास्क लगा कर उसे उठा कर अपने कार में फेंक कर,,,....!! ड्राइविंग सीट बैठ गया था  |       त्रिहांश राज्ञा को अपने साथ साइड में ले गया था लेकिन वह लड़की इतना पैनिक करने लगी थी की वह खुद ही उसके बाहों में बेहोश हो गई थी |         देविका,सुहास ,अभय गुस्से से त्रिहांश को देखने लगे थे | त्रिहांश की भी नजर उन पर ही था लेकिन वह बड़े ही बोरियत से उन्हे देख रहा था |     अभय अपने दांत टटोरते हुए त्रिहांश से कुछ कहता की तभी त्रिहांश बेहद गुस्से से चिल्लाते हुए बोला,""_ अबे चुप......!! "   अभय उसे बेहद गुस्से से घूरने लगा की तभी तभी त्रिहांश आगे बोला,""_ मुझे लगा था की तुझ बचपन ही तुम्हे अकल आ गया होगा लेकिन नही ,तुझे तो अब पूरी तरह मार कर ही दम तोड़ना है | "     त्रिहांश उठ कर अभय के करीब जात की तभी की सुहास आ कस खड़ा हो गया | विराज को मार कर त्रिहांश ने अब तक अधमरा कर दिया था लेकिन वह अब अभय के साथ भी वही हाल करने आगे बढ़ रहा था |       सुहास गुस्से से बोला ,""_ अब नही त्रिहांश तुमने मेरे बच्चो के साथ बहुत कुछ कर लिया | _    त्रिहांश के होंठो पर मुस्कान आ गया और वह जोर जोर से हंसते हुए एक दम से  सुहास पर वार कर दिया | सुहास को इसका बिलकुल उम्मीद नही था | वह जा कर मुंह के बल गिर गए थे|    त्रिहांश...!! " देविका चिल्लाते हुए आगे बढ़ने लगी की एक साथ वहा त्रिहांश के बॉडीगार्ड्स अंदर घुस गए | त्रिहांश का ध्यान सिर्फ अभय पर था | अभय ने राज्ञा समझ कर ध्रुबी को मारा था मतलब वह इंसान उसकी राज्ञा पर हाथ उठाने वाला था | वह आज बिलकुल नही छोड़ने वाला है |      त्रिहांश झटके से आभार पर हमला करते हुए उसे व्हीलचेयर से नीचे गिरा कर उसे मारने लगा | त्रिहांश की नजर बार बार ध्रीवी की गालों पर जा रही थी | अगर उसने देविका और उसके प्लान को ट्रैप नही करता तो ध्रुवि की जगह में उसकी राज्ञा होती |        त्रिहांश.....प्लीज मेरे बेटे को छोड़ दो...प्लीज त्रिहांश....आज के बाद कभी मुड़ कर तुम्हारे तरस देखेंगे भी नही .... प्लीज त्रिबंश...!!  " देविका चिल्लाते हुए बोली,उससे देखा नही जा रहा  था | क्यों की त्रिहांश बहुत ही बेरहमी से अभय के उस हाथ को कुचला रहा था |      देविका की बात सुन त्रिहांश एक पल के लिए रुक गया लेकिन अगले ही पल त्रिहांश जोर जोर से अभय के पेट पर लात मारते हुए गुस्से से बोला,,""_ बचपन से समझा रहा हु वह मेरी है वह मेरी है ...लेकिन साले तेरे दिमाग में घुस ही नही रहा है | "    बोलते हुए त्रिहांश उसे और मारने को हुआ की तभी वहा कुछ शूट होने की आवाज गूंज उठी | त्रिहांश के बॉडीगॉर्ड से गन छीन कर सुहास ने गोली त्रिहांश पर गोली चलाया था लेकिन गोली त्रिहांश के बाजू से जा कर गुजरा था लेकिन उसके बाजू से अब खून निकलने लगा था |     त्रिहांश गुस्से से मुड कर सुहास को देखा ,सुहास अब उस पर ही प्वाइंट किया था लेकिन वह ट्रिगर दबता तभी त्रिहांश गुस्से अभय को लाता मारा जो सीधे जा कर सुहास के पैरो के सामने गिर पड़ा |    त्रिहांश ने बहुत ही बेरहमी से अभय पर हमला किया था | वह पूरी तरह से खून से सन गया था | यह देख सुहास फिर से त्रिहांश पर गन प्वाइंट कर दिया |    To be continued........Â

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