Chapter 54: chapter 54

Billionaire's Dark DesireWords: 28738

अब आगे.....    त्रिहांश इस वक्त अपना चेहरा राज्ञा के सीने में छुपा कर उसके ऊपर ही लेटा हुआ था | वह इस वक्त ज्यादा ही बेचैन था और उसका दिल और दिमाग पूरी तरह ब्लैक हो गया था | वह कुछ भी सोचने या समझने की हालत में नहीं था |    पता नही क्यों त्रिहांश का चेहरा यहां तक की उसका पूरा शरीर पसीने से भीग गया था और वह इस वक्त हल्के से कांप भी रहा था |    वही राज्ञा बेहद उदास हो गई थी उसका चेहरा इस वक्त पूरी तरह मुरझा गया था | प्यार करना उसके लिए कोई गुनाह नहीं था लेकिन त्रिहांश के लिए कोई गुनाह से कम नहीं था |      राज्ञा ऐसे ही चुपचाप लेटी रही, थोड़ी देर बाद त्रिहांश अपना चेहरा ऊपर कर राज्ञा को देखने लगा ,तो राज्ञा धीरे से त्रिहांश के माथे पर बिखरे हुए बालों को ठीक करते हुए उसे देखने लगी |   त्रिहांश की नजर अभी भी राज्ञा पर ही टिका था ,लेकिन त्रिहांश का छटपटानाz बेचैनी अभी भी बरकरार था |   राज्ञा उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर प्यार से उसके माथे पर चूमा तो त्रिहांश के आंखें अचानक से कस के बंद हो गए |      वही राज्ञा के होठों का स्पर्श पातें ही त्रिहांश के मुंह से हल्के से आह निकल गई | वह अब अपने अंदर अजीब सा सुकून महसूस करने लगा था ,अपने दिल में उठी हुई तूफान उसे अब शांत होता हुआ मेहसूस हो रहा था |      वह धीरे से अपने आंखें खोल कर राज्ञा को देखा ,वह  उसके गालों को सहलाते हुए अपने होंठो को उसकी पूरी चेहरे पर घुमाने लगी थी | त्रिहांश के आंखे फिर से अपने आप ही सुकून से बंद हो गए |    त्रिहांश के दिल में जो इतनी देर तक तूफान सा उठा था, वह तूफान पूरी तरह शांत हो गया था | पता नहीं उस लड़की की होठों में क्या ही जादू सा था वह धीरे धीरे उसके नशे में चूर सा होने लगा था |      वह धीरे से उसके ऊपर झुक कर बेहद भरी लहजे में बोला ,""_ i love you | "    राज्ञा जो उसे बिना रुके चूम रही थी वह त्रिहांश की कन्फेशन सुन कर एक दम से रुक गई |  उसने कभी नहीं सोचा था कि त्रिहांश उसे यह तीन शब्द कभी कहेगा भी, उसके चेहरे पर हैरान से भरी मुस्कान आ गया |       वह हकलाते हुए बोली ,""_ क....क्या कहा आपने ?        त्रिहांश अपने आंखे खोल कर उसे देखने लगा ,उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी शायद त्रिहांश ने उसे इतना खुश कभी देखा ही नहीं था |     अचानक से त्रिहांश को ख्याल आया कि उसने राज्ञा को अभी-अभी क्या कहा है ? त्रिहांश की आइब्रोज सिकुड़ गए, वह जल्दी से उससे अलग होने को हुआ कि तभी राज्ञा उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर उसे बेचैन भरी लहजे में पूछी,""_ आ आपने अभी अभी कुछ कहा ? दुबार कहिए न ? "    राज्ञा त्रिहांश के मुंह से उन तीन शब्दों को वापस सुनने के लिए कितना बेचैन हो रही थी यह त्रिहांश अच्छे से देख पा रहा था | लेकिन दुबारा कहने का उसका कोई इरादा नही था वह तो अपने आपको कोसने लगा था की उसने यह शब्द कह कैसे लिया |     त्रिहांश गुस्से से राज्ञा से अलग हो कर बेड के दूसरे कोने में जा कर लेटते हुए बेहद सख्ती से बोला,""_ मैने कुछ नही कहा है बीवी.....!!! "    नही त्रिहांश ...आपने अभी अभी मुझे i love you कहा...!! " राज्ञा उसके करीब जाते हुए बोली | वही त्रिहांश का जबड़ा सख्त हो गया था | वह गुस्से से दूसरे तरफ देखने लगा | वही राज्ञा की खुशी की कोई ठिकाना नहीं था | वह त्रिहांश को पीछे से हग करते हुए बोली,""_ त्रिहांश एक बार फिर से कहिए न ? प्लीज....? "       त्रिहांश उसके तरफ मुड़ते हुए बेहद गुस्से से थोड़ा तेज आवाज में कहा ,""_ मैने कहा न,मैने कुछ नही कहा | "    राज्ञा मायूस हो कर त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश बेहद गुस्से से उसे ऐसे घूरने लगा था की जैसे उसने उसे कुछ पूछ कर गुनाह कर दिया हो | वही राज्ञा को अब समझ आ रहा था की त्रिहांश उसके साथ ऐसा बिहेव कर रहा है ? वह उसे देखते हुए अपने मन में बोली,""_ मतलब इस खडूस इंसान के दिल में मैने कदम रख दिया है ,इन्हे मुझसे प्यार हुआ है लेकिन यह मानना नही चाहते ,...हम्मम | "   राज्ञा बेड के दूसरे कोने में जा कर लेटते हुए बोली,""_ ठीक है आपने कुछ नहीं कहा...बस मैने ही कुछ सुन लिया है | "   त्रिहांश का गुस्सा और बढ़ गया | जब उसने कुछ कहा ही नहीं है तो यह लड़की सुनी क्या ? और ऊपर उससे बार बार दूर जा कर सो रही है | त्रिहांश उसे एक ही झटके में अपने तरफ खींच कर गुस्से से अपने दांत टटोरते हुए बोला,""_ तुमने भी कुछ नही सुना है राज्ञा......जब मैंने कुछ कहा नहीं है तो तुम्हे क्या सुना दिया...? "   त्रिहांश ने गुस्से से अपना सवाल पूरा किया ही था कि तभी राज्ञा ने कहा,""_ I love you....!! "    त्रिहांश का जबड़ा कस गया | वह गुस्से से राज्ञा का बाजू पकड़ कर अपने करीब खींचा तो राज्ञा का चेहरा उसके चेहरे के बेहद करीब आ गया लेकिन उसका चेहरा दर्द से भींच गया था क्यों की त्रिहांश ने बेहद गुस्से से उसके बाजू को पकड़ लिया था |     राज्ञा को दर्द में देख त्रिहांश को दर्द मेहसूस होने लगा था | प्यार का इस एहसास को वह समझ नही पा रहा था या यू कहे की वह समझना ही नही चाहता था |       त्रिहांश का पकड़ राज्ञा की बाजू में अपने आप ही ढीला हो गया | राज्ञा की आंखे जो दर्द से भींच गए थे ,वह धीरे से अपने आंखे खोल कर देखी ,त्रिहांश का औरा एक दम से नरम पड़ गया था | यह देख राज्ञा बिना कुछ कहे उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपाते हुए उसके गले लग गई |    त्रिहांश के आंखे कसके बंद हो गए | वह कसके राज्ञा को अपने बाहों में भरते हुए लेट गया | वही राज्ञा को बेहद सुकून सा मेहसूस होने लगा था | सिर्फ उसके जिस्म को चाहने वाला त्रिहांश आज उस पर दिल लगा बैठा था | उसने उससे यह कभी उम्मीद नही किया था |    त्रिहांश उसके पीठ पर अपने दोनो हाथो को सरकाते हुए उसके चेहरे गर्दन में अपना चेहरा छुपा कर उसे किस कर रहा था | वही राज्ञा का एक हाथ त्रिहांश के गाल को सहलाने लगा था तो दूसरा त्रिहांश के सीने को.....| दोनो ही इस वक्त एक दूसरे के बाहों में होते हुए भी उनके बीच अजीब सी बेचैनी ने जगह ले लिया था |      राज्ञा इसीलिए बेचैन हो रही थी की त्रिहांश अफसोस कर रहा था की उसने उससे प्यार की ...वही त्रिहांश अपने ही सोच में घूम अपने ही जज्बातों से लड़ रहा था | उसका मकसद अलग था , लेकिन इन बीच वह इस तरह उस लड़की से प्यार कर बैठेगा उसने सोचा नहीं था |     थोड़ी देर बाद त्रिहांश चुपचाप राज्ञा के बाहों में लेटा रहा | वही राज्ञा उसके सीने में अपना सर रख कर उसके त्रिहांश हाथ में अपना हाथ फसाते हुए उसके हथेली को रब कर रही थी |      रात के तीन बजने को हुआ था |और वह दोनो सोई ही नही पा रहे थे | राज्ञा ने त्रिहांश को आवाज लगाते हुए बोली,""_ त्रिहांश....!!! "   " हम्मम्मम..." त्रिहांश ने बस गुनगुनाते हुए कहा | जिसे सुन कर राज्ञा ने कुछ नही कहा | वही त्रिहांश उसे चुप देख अपना सर ऊपर राज्ञा को देखा , राज्ञा टिमटिमाते हुए उसे ही देख रही थी | त्रिहांश ने कहा,""_ क्या हुआ ? "      राज्ञा ने अपना सर ना में हिलाते हुए उसके सीने में अपना चेहरा छुपाते हुए उसके गले लग गई |     त्रिहांश उसके बालो में हाथ फेरते हुए उसे वैसे ही लेट कर लेट गया | थोड़ी देर बाद त्रिहांश को अपने सीन में राज्ञा की धीमी सांसे मेहसूस होने लगे | वह अपना सर झुका कर देखा, राज्ञा अब सो गई थी |      त्रिहांश उसे आराम से अपने नीचे लेटा कर उसके चेहरे को देखने लगा | उस लड़की ने उसे आखिर अपने प्यार में फसा ही दिया था |   त्रिहांश झुक कर उसके पूरे चेहरे पर किस करते हुए बोला,""_ पगली कही की...!! "    त्रिहांश बोलते हुए हंस पड़ा | उसके होंठो पर बेहद खुबसूरत सा मुस्कान तैर गया था | वह झुक कर उसके माथे पर किया ,फिर उसे अपने बाहों में ले कर सो गया |      सुबह का वक्त............. " भाभी.... राज्ञा भाभी.....!! " डोर को बार बार नॉक करते हुए इशान ने आवाज लगाया |   रात में देर से सोने के वजह से त्रिहांश और राज्ञा ज्यादा ही गहरी नींद में थे | थोड़ी देर तक इशान राज्ञा और त्रिहांश को आवाज लगाता रहा,जब उनसे कोई रिस्पॉन्स नही आया तो वह वापस चला गया |   सुबह के ग्यारह बजे की आस पास राज्ञा कसमसाते हुए अपने आंखे खोल कर देखी,तो उसे सामने ही त्रिहांश का चेहरा दिखा | राज्ञा इस वक्त त्रिहांश के ऊपर ही लेटी हुई थी | त्रिहांश ने उसे एक हाथ से अपने गले से लगाया था तो दूसरे हाथ में वह अपने फोन में कुछ कर रहा था |   राज्ञा उठते हुए पूछी,""_ टाइम कितना हुआ त्रिहांश ? "   " क्यों...? तुम्हे कही जाना है ? "  त्रिहांश ने सख्ती से कहा |        वही राज्ञा अपना सर घुमा कर त्रिहांश को देखी,त्रिहांश अपना आईब्रो रेंज कर उसे ही घूर रहा था | राज्ञा ने कहा,""_ इशान ने कहा था की...!!! "   बोलते बोलते राज्ञा की नजर घड़ी पर गई | अब तक साढ़े ग्यारह बज गया था | राज्ञा का चेहरा रोनी जैसा हो गया | वही त्रिहांश राज्ञा की चेहरे के हाव भाव को ही देख रहा था लेकिन राज्ञा का चेहरा अब रोनी जैसा होता देख उसका औरा सख्त हुआ | वह गुस्से से उससे पूछा ""_क्या हुआ ? तुम रोने क्यों लग गई ? "  " आपकी वजह से मैं लेट गई त्रिहांश...!! " बोलते हुए वह लड़की उठ कर जल्दी से वाशरूम में भाग गई | वही त्रिहांश की आंखे छोटी हो गई थी | उसकी वजह से वह लेट हो गई ? लेकिन उसे जाना कहा था ?     त्रिहांश उठ कर सीधे वाशरूम में घुस गया | राज्ञा इस वक्त अपने कपड़े खोलने को हुई थी की तभी त्रिहांश उसे दीवार को सटा कर घूरने लगा | राज्ञा को पता ही नही चला था की त्रिहांश उसके पीछे पीछे कैसे आ गया |    राज्ञा हैरानी से त्रिहांश को देख रही थी | वही त्रिहांश उसके एक हाथ में अपना एक हाथ फसा कर उसे दीवार को सटाते हुए बोला,""_ कहा जाना था तुम्हे ? तुम मेरे वजह से लेट कैसे हो गई ? "    राज्ञा अपने आंखे नीचे झुका कर धीरे से बोली,""_ मंदिर.....आज वहा बहुत बड़ा पूजा रखा गया है तो मम्मा ने कहा था की वह आज सुबह हमे एक स्वामीजी से मिलवाएगी|     त्रिहांश एक टक उसके झुकी हुई पलके ही देख रहा था | वह थोड़ा उसके ऊपर झुक कर उसके पलके पर चूमते हुए बोला,""_ hmmm तुम फ्रेश हो जाओ, मैं तुम्हे मंदिर ले चलता हु | "  " सच्ची...?? " राज्ञा चहकते हुए उससे सवाल की | तो त्रिहांश अपने पलके झपकाते हुए शॉवर ऑन करते हुए बोला,""_ हां...!! "    राज्ञा की चेहरे पर स्माइल आ गई,वह उसे कुछ कहती उससे पहले ही त्रिहांश उसके होंठो को अपने होंठो के गिरफ्त में ले कर किस करने लगा | राज्ञा को इसकी बिलकुल उम्मीद नही थी |      उसकी आंखे एक दम से चौड़ी हो गई थी | वही त्रिहांश अपने आंखे बंद कर राज्ञा को अपने आप से सटा कर बेहद शिद्दत से चूमने लगा था |      राज्ञा भी त्रिहांश को रिस्पॉन्स देते हुए उसके कमर के चारो और अपने हाथ लपेट कर उसके करीब चली गई | उन दोनो के ऊपर इस वक्त शॉवर की पानी गिर रहा था | दोनो ही भीग रहे थे लेकिन फिर भी उनके अंदर अजीब सी आग सा लग गया था |      त्रिहांश पूरी तरह राज्ञा को अपने आपसे चिपका कर उसके पीठ को सहलाते हुए उसे किस करने लगा था | लेकिन कुछ ही देर में राज्ञा की सांसे फूलने लगे | वह छटपटाने लगी तो त्रिहांश उसके होंठो को छोड़ कर उसके पूरे चेहरे पर बेहद desperatily किस करने लगा |       राज्ञा अब तेज तेज सांसे लेते हुए हाफने लगी थी | लेकिन उसके दोनो हाथ त्रिहांश के शर्ट के बटंस खोलने में लगे थे | त्रिहांश उसे पीछे के तरह झुका कर अब अपने हो था को उसके गर्दन से हो कर सीने तक ले आया |              अअह्ह्ह्ह्ह त्रिहांश.....!!! " राज्ञा ने आह भरते हुए कहा |     त्रिहंश का कोई होश नही था | वह पूरी तरह मदहोश होने लगा था यह देख राज्ञा उससे बोली,""_ त्रिहांश हम देर हो रहे है...? "   त्रिहांश रुक कर राज्ञा को देखने लगा | उसके अंदर अब आग लग चुका था | वही राज्ञा तेज तेज सांस लेते हुए खुद को नॉर्मल करते हुए बोली,""_ please त्रिहांश... मुझे वहा जाना है....!! "    त्रिहांश ने बस सर हिला दिया | थोड़ी देर बाद दोनो साथ में ही नहा कर बाथरूम से बाहर आए | त्रिहांश को समर को कॉल करना था तो वह रूम में आया वही राज्ञा क्लोसेट रूम में चली गई |     समर से बात करने के बाद त्रिहांश क्लोसेट रूम में गया | उसकी बीवी इस वक्त साड़ी पहन रही थी | लाल रंग का वह साड़ी इस वक्त उस पर बहुत जज रहा था लेकिन उसमे उसका कमर और पीठ अच्छे से रेवल हो रहा था |    त्रिहांश जा कर उसका वार्डरोब खोल कर कुछ ढूंढने लगा | वही राज्ञा की नजर भी उस पर ही गया था | वह उसे ना समझी में देखते हुए पूछी,""_ क्या हुआ त्रिहांश ? आपको कुछ चाहिए .... अह्ह्ह्ह | "    राज्ञा अभी अपनी बात पूरा कर ही रही थी की तभी त्रिहांश ने उसे अपने आप से चिपका कर उसके साड़ी को खींचते हुए बोला,""_ तुम्हे इस तरह रिवीलिंग कपड़े पहनने के इजाजत नही है राज्ञा..साड़ी में तुम्हारा कमर और पीठ सब दिख रहा है जो मुझे बिल्कुल बर्दाश्त नही है | "             त्रिहांश का पकड़ राज्ञा के कमर में कस गया था | वही राज्ञा हैरानी से त्रिहांश को देखने लगी थी | साड़ी में कमर और पीठ तो दिखेगा ही ..? लेकिन त्रिहांश को समझाना बेकार था | राज्ञा ने कुछ नही कहा ,वह उससे अलग हो कर ,उसके सामने ही साड़ी खोल कर त्रिहांश को देखी,जैसे कह रही हो की उसके लिए अब ड्रेस खुद ही सेलेक्ट कर दे...!! "  त्रिहांश उसे एक अनारकली सूट निकाल कर दिया तो राज्ञा पहन कर बाहर चली गई | वही त्रिहाश आंखे फाड़े उसे ही देख रहा था | उस लड़की ने बिना शर्म किए ही उसके सामने ही कपड़े चेंज कर बाहर चली गई थी,जिससे त्रिहांश पूरी तरह सेड्यूस हो गया था |    वह अपना सर झटका कर चेंज कर बाहर चला गया | राज्ञा अपने बाल बना रही थी | त्रिहांश उसके पीछे जा कर अपने बाल सेट करते हुए बोला,""_ हो गया तुम्हारा...!! "   Hmm बस पांच मिनट त्रिहांश..!!! " बोलते हुए राज्ञा अपने मंगलसूत्र ठीक कर चूड़ियां पहनने लगी | त्रिहांश अपना फोन ले कर उसे ही देख रहा था | वह फिर उसे ले कर रूम से बाहर चला गया |     क्या होगा आगे इस कहनी में ? त्रिहांश सच में राज्ञा को प्यार करने लगा है ? अगर हां तो वह अफसोस भी क्यों कर रहा है ? जानने के लिए पढ़ते रहिए  Â