Chapter 52: chapter 52

Billionaire's Dark DesireWords: 29011

   अब आगे ........  " कोनसा सच ? कोनसा सच दादू ? उसे सब पता है लेकिन वह यह नहीं जानती है की उसका असली परिवार राठौड़ फैमिली है that's it | " धीरांश की बात को बीच में ही काटते हुए त्रिहांश ने गुस्से से कहा |    त्रिहांश की बात सुन धीरांश का चेहरा सख्त हो गया | वही माया की हाथो की मुट्ठी बन गई थी | वह त्रिहांश के बेहद करीब आ कर बेहद तंज भरी लहजे में बोली,""_ जिस्म का सच तो बता दिया त्रिहांश लेकिन उस जिस्म की डिजायर के पीछे असली राज़ छुपा है वह उसे कब बताओगे ? "       त्रिहांश की जबड़ा कस गया | वह माया को देखते बेहद कर्कश आवाज में चिल्लाते हुए राज्ञा को आवाज लगाया |   "  राज्ञा....... राज्ञा.........? "      रूम में....       राज्ञा इस वक्त अपने साड़ी की पल्लू ठीक करते हुए खुद को ही शीशे में निहार रही थी | आज कल उसका चेहरा बेहद ग्लो कर रहा था |           तभी उसे त्रिहांश की गुस्सैल आवाज सुनाई दी | वह हैरानी से door के तरफ देखते हुए बोली,""_ त्रिहांश....त्रिहांश इतना गुस्से में मुझे आवाज क्यों लगा रहे है ? "     राज्ञा जल्दी से रूम से बाहर चली गई |    हाल में माहौल एक दम से गंभीर हो गया था | त्रिहांश का गुस्सैल आवाज से उस हवेली में अजीब सी सन्नाटा फसर गया था |      विनोद,आरव,अजय,वेदिका ,दिया ,अहीरा,अर्यांश,इशान , ईशा,उर्मी सब इस वक्त हाल में आ गए थे | सबकी नजर त्रिहांश पर टिकी थी लेकिन त्रिहांश की नजर अपने रूम के तरफ था |      तभी वहा सबको राज्ञा की चूड़ी और पायलों की आवाज़ गूंजने लगी | वह सब मुड़ कर राज्ञा को देखे जो सीढ़ियों से उतर कर त्रिहांश के पास आ रही थी |     राज्ञा की नजर त्रिहांश सिर्फ त्रिहांश पर थी | वह जल्दी से उसके पास आते हुए बोली,""_ क्या हुआ त्रिहांश..? आ आप मुझे आवाज़ क्यों.....| "   राज्ञा अपनी बात पूरा करती उससे पहले ही त्रिहांश उसे माया के सामने खड़ा करते हुए बेहद गुस्से से बोला ,""_ यह को औरत तुम्हारे सामने खड़ी है यह तुम्हारी मां है ,माया सुधर्व राठोड़ ...| "    राज्ञा माया को एक नज़र देख कर मुड़ कर त्रिहांश को देखने लगी | वही त्रिहांश का औरा बेहद डार्क हो गया था | वह राज्ञा,माया और धीरांश तीनो के चारो और घुमाते हुए आगे बोला,""_ तुम्हारा और खुराना फैमिली से कोई लेना देना नही है बीवी,तुम उनके साथ इसीलिए थी क्यों की तुम्हारी मां चाहती थी | "    लास्ट लाइन बोलते हुए त्रिहांश की नजर गुस्से से माया पर टिक गई थी | वही माया की हाथो की मुट्ठी बन गई थी | वह राज्ञा से कुछ कहने को हुई की तभी त्रिहांश ने गुस्से से आगे कहा,""_अमीर बाप की बेटी होते हुए भी तुम्हे उस गरीबी में जीना पड़ा,गौतम खुराना के दिए हुए हर एक दर्द और बेजती को सहना पड़ा,उसके घर के इज्जत बचाने के लिए एक शादीशुदा आदमी से शादी के लिए राज़ी होना पड़ा,....सबकी जिम्मेदार तुम्हारे सामने खड़े हुए औरत की वजह से हुआ| "     राज्ञा हैरानी से कभी त्रिहांश को देखती तो कभी माया को ....वही त्रिहांश की बात सुन माया की चेहरे हाव भाव बदल गए थे | वह त्रिहांश को रोक कर पूछी,""_ यह तुम क्या कह रहे हो त्रिहांश...!! "  त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह माया को ठीक राज्ञा तरफ खड़ा कर बोला,""_ अपनी बेटी से पूछ लो....| "     माया राज्ञा की बाजू पकड़ कर उससे दर्द भरी आवाज में पूछी,""_ त्रिहांश जो कह रहा है क्या वह सच है बच्चा ? तुम्हे यह सब सहना पड़ा ...? "    अचानक से वहा त्रिहांश के जोर जोर से हंसने की आवाज गूंजने लगी | सब हैरानी से त्रिहांश को देखने लगी,वही राज्ञा को पता नही अजीब सी बैचेनी मेहसूस होने लगा था | उसकी आंखे भी नम सी होने लगे थे | उसने जो जिंदगी खुराना निवास में जिया था वैसे जिंदगी कोई नही जी सकता ,पल पल गौतम की बाते उसे नरक दिखाया था |      त्रिहांश अपने हंसी को अचानक से रोकते हुए माया को देख बेहद ठंडे लहजे में बोला,""_ आपने अपनी बेटी को मुझसे अलग करने के चक्कर में अपने हाथो से ही एक दलदल में फेंक दिया था | पल पल गौतम की ताने,वानी खुराना की मजबूरी से बहते हुए आंसू,और जिंदालाश जैसा भाई मानव...तीनो ने उसे कही का नही छोड़ा था ...| "   माया जब से राग्या को वाणी की हाथो मैं सौंपा था तब से वह उन्हे पे कर रही थी लेकिन फिर भी उसकी बेटी के साथ इतना बद्दसलुकी की ? क्यों ? माया की आंखे नम हो गए थे |    वही दूर से खड़े सुधर्व का भी यही हाल था | वह इसीलिए निश्चिंत था की माया ने राज्ञा के लिए सब इंतजाम किया है ? वह भले ही दूर है उनसे लेकिन सुकून का जिंदगी जी रही है ? लेकिन नही वह गलत थे असल में तो उसकी जिंदगी त्रिहांश के पास आने से सुधरा था | त्रिहांश का रूडनेस उसे तकलीफ तो दिया था लेकिन उसकी सुकून नहीं छीना था |  राज्ञा रोते हुए माया को ही देख रही थी | उसे समझ नही आ रहा था की इस वक्त वहा हो क्या रहा है ? वह त्रिहांश के पास जाने को हुई की तभी माया उसके चेहरे को हाथो में भरते हुए बोली,""_ बच्चा तुम......,मुझे सच में नही पता था की वानी...गौतम तुम्हारे साथ ऐसा सलूक.....| "  राज्ञा माया को खुद से दूर कर त्रिहांश के पास जा कर उससे लिपटते हुए रोने लगी | उसे समझ नही आ रहा था की वहा क्या हो रहा है ? उसके साथ क्या हो रहा है ? कोन अपना है कोन नही ?     त्रिहांश अभी भी माया को देख रहा था | माया राज्ञा को त्रिहांश से अलग करने को हुई की तभी राज्ञा त्रिहांश को कसके पकड़ते हुए बोली,""_ मुझे यहां नही रहना त्रिहांश..मुझे यहा से ले चलो | "    त्रिहांश राज्ञा को खुद से दूर करते हुए बेहद sarcastic way में पूछा,""_ सच से भागा कर सच पता कराना चाहती हो बीवी ? "    राज्ञा उसे बार बार यहां से ले जाने की बात कह रही थी लेकिन क्यों ? उसने त्रिहांश को भले ही बताया नही था लेकिन त्रिहांश से कुछ भी छुपना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन था |   राज्ञा रोते हुए अपना सर ऊपर कर त्रिहांश को देखने लगी | वही त्रिहांश उसके आंसू पोछते हुए बोला,""_ तुम जिनके पास जा कर सच जानना चाहती हो उन्हे कुछ नही पता ...वह बस पैसों के लिए तुम अपने साथ रखा था ,पाला था that's it....| "   राज्ञा वानी से मिल कर सच जानना चाहती थी लेकिन वानी को कुछ पता ही नही था | वह बस माया के दिए हुए पैसों के लिए अपने साथ राज्ञा को रखी थी ,वैसे माया जैसा चाहती थी बिलकुल वह राज्ञा को वैसे ही रखना चाहती थी लेकिन गौतम की कारण उसने माया को दिए हुए वादा निभा नही पाई थी | राज्ञा को वानी भी अपनी बेटी की तरह ही सच्चे दिल से माना था लेकिन कभी उसके लिए कर ही नही पाई थी |     राज्ञा मुड़ कर माया को देखते हुए त्रिहांश से पूछी,""_ यह मेरी असली मां है ? ""  हा ....!! " त्रिहांश ने बस इतना ही कहा | तभी राज्ञा उससे फिर से पूछी,""_ अगर में राठौड़ फैमिली से जुड़ी हु तो मैं खुराना निवास में क्यों रह रही थी त्रिहांश? "    मुझसे दूर रहने के लिए....!!!" त्रिहांश माया को देख कहा |   जब जब माया त्रिहांश का फर्दा फाश करना चाहती तब तब त्रिहांश राज्ञा के सामने माया की एक एक गलती रख रहा था जिससे राज्ञा को सच भी पता चल रहा था और उनकी बीच की दूरियां भी बरकरार रह रही थी | "   राज्ञा ना समझी में त्रिहांश को देखने लगी , त्रिहांश उसे ही बिना भाव के देख रहा था | तभी राज्ञा ने कहा,""_ आपको तो में सिर्फ तीन साल से जानती हु त्रिहांश,लेकिन खुराना निवास में तो मैं तो तब से रह रही हू जब मैं.......| "  बोलते हुए राज्ञा एक दम से चुप हो गई | उसकी यादें अच्छी ही नही रहे थे तो वह कुछ भी ठीक से याद ही नहीं रखी थी,लेकिन जब से उसे समझ आया था तब से वह खुराना निवास में ही थी |    त्रिहांश राज्ञा के गाल को सहलाते हुए बोला,""_ तुम मुझे बचपन से ही जानती हो बीवी लेकिन तुम्हे याद नही ,या यू कहे की तुम्हे मुझे पहचानने का समझ आता उससे पहले ही तुम्हे मुझसे अलग कर दिया था |      राज्ञा ना समझी में माया को देखने लगी | माया एक कमजोर मां की तरह उसके सामने खड़ी थी |    धीरांश अपने चेहरे पर तिरछी मुक्सना लिए एक टक त्रिहांश को देख रहा था | त्रिहांश का औरा बेहद एक्सप्रेशन लेस था लेकिन उसकी नजर भी धीरांश पर ही टिकी थी | सच का खुलासा तो हो रहा था लेकिन ऐसा भी लग रहा था की सच के पीछे एक और सच चुप रहा हो |        राज्ञा के करीब आते हुए माया ने कहा,""_ मैने जो किया तुम्हारे लिए अच्छा सोच कर किया लेकिन गौतम खुराना इतना हरामि निकलेगा मैने नही सोचा था बच्चा | "   " आ आप अब क्या चाहते है,मुझसे ? " राज्ञा ने माया से पूछा तो माया का दिल मानो रुक सा ही गया हो | राज्ञा का कहने का टोन नाराजगी से भरा था |      राज्ञा बोली,""_ अपका मकसद मुझे त्रिहांश से अलग करना क्यों है ? क्यों चाहते है आप ऐसा ? "   " क्यों की त्रिहांश तुम्हे इस्तेमाल कर रहा है सिर्फ अपने मतलब के लिए ......!! " राज्ञा को जवाब देते हुए सुधर्व सामने आया तो राज्ञा मुड़ कर उसके तरफ देखने लगी |      वही सुधर्व गुस्से से एक नजर अजय को देख त्रिहांश को देख आगे बोला,""_ त्रिहांश अग्निहोत्री की डिजायर से बचाने,जिस्म का डिजायर ,जिस्म का जो लत त्रिहांश को तुम्हारे लिए लगी है,उससे बचाने के लिए ......| "    राज्ञा की चेहरे पर व्यंग भरी मुस्कान बिखर गया | वह सुधर्व को देखते हुए पूछी,""_ मिस्टर गौतम ने मुझे एक शादी शुदा आदमी जिसके पहले ही दो बच्चे रहे उससे शादी करने के लिए मजबूर किया तब आप कहा थे ? तब आपको ख्याल नही आया की मेरी जिंदगी को कोई अपने फायदे के लिए दबा रहा है ? तब आपको मुझे बचाने का ख्याल नही आया ? तब आप लोग कहा थे ?  "   राज्ञा की इन सवालों का जवाब सुधर्व के पास नही था | वह तो माया के भरोसे राज्ञा को वानी के पास छोड़ा था | वानी माया की बचपन की सहेली थी और राज्ञा को वानी के पास छोड़ने का यही रीजन था ,लेकिन उन लोगो ने वाणी और गौतम पर विश्वास कर बहुत बड़ी गलती कर दी थीं | वैसे वह लोग त्रिहांश के वजह से ही राज्ञा से मिलने नही जा पाते थे यह सोच कर की उनके जाने से त्रिहांश को राज्ञा का पता चल जाती थी जो बह बिलकुल नही चहरे थे l   राज्ञा की नजर त्रिहांश पर ही टिकी थी | वह मूड कर जवाब में पूछी,""_क्या हुआ मिस्टर राठोड़ ? आपके पास कोई जवाब नही है ? कोई बात नही मैं ही आपको जवाब देती हु |     माया और सुधर्व, राज्ञा दर्द से भरी हुई नजरों से देखने लगे थे | तभी राज्ञा मुड़ कर त्रिहांश के बाजन से आंखो में देखते हुए बोली,""_ मुझे पता है त्रिहांश मुझे इस्तेमाल कर रहे है,मुझे पता है यह सिर्फ मेरे जिस्म को चाहते है ,मुझे पता है हमारी शादी का कोई मतलब नहीं है ,मुझे पता है त्रिहांश के लिए मैं कुछ नही ही.....मुझे पता है अगर मुझसे कुछ छूटता जा रहा है तो i don't care...| "     बोलते हुए राज्ञा त्रिहांश के और करीब जा कर उसके आंखो में देखते हुए बोली,""_ आपको याद है कुछ दिन पहले मैंने आपसे अपना प्यार का इजहार किया था,सिर्फ नाम का नही किया था त्रिहांश ,दिलो जान से यह मेरा दिल आपको चाहने लगा है, जिस्म से मतलब आप रखते होंगे लेकिन मुझमें आप रूह रूह में शामिल है,मेरी धड़कती इस दिल की हर एक धड़कन भी आपके नाम लिए धड़कता है | "    त्रिहांश जो इतनी देर ढीठ बन कर खड़ा था वह राज्ञा की लफ्ज़ सुन एक दम से नरम पड़ गया था | वही राज्ञा उसके दोनो हाथ पकड़ते हुए त्रिहांश से बोली,""_ आपकी हु त्रिहांश..हक से मुझे और मेरे जिस्म को इस्तेमाल कर सकते है आखिर यह सब आपका ही तो है,प्यार का जुनून सा सवरने लगा है ,मेरे बेरंग दुनिया में आपका रंग चढ़ चुका है,आपके लिए तो यह जिस्म ही क्या जान भी कुर्बान है | "    बोलते हुए राज्ञा ने उसके दोनो हथेली पर किस किया फिर अपने रूम के तरफ भाग गई | वही त्रिहांश एक टक उसे अपने रूम के तरफ जाता हुआ देखने लगा था पता नही क्यों ? राज्ञा की बात आज उसे हिला कर रख दिया था | वह बिना कुछ कहे विला से बाहर चला गया |         माया और सुधर्व कुछ समझ नही आ रहा था की वह कहा फस गए है ? यहां वह अपने बेटी को वापस पाना चाहते थे लेकिन उन दोनो ने तो उसी वक्त खो दिया जब वह दोनो उसे वाणी और गौतम को सौंफ दिया था |      त्रिहांश के जाते ही वहा सब कुछ शांत हो गया था लेकिन माया, सुधर्व और अजय के दिल में तूफान सा उठ गया था | उन्हे पता नही चल रहा था की यह कैसा परिस्थिति हैं ?     धीरांश चुपचाप door कै तरफ देख रहा था जहा से अभी भी त्रिहांश गया हुआ था | उन्हे ऐसा लग रहा था की त्रिहांश ने जो जाल बिछाई है उसमे वह माया और सुधर्व को तो फसा दिया था लेकिन राज्ञा की बात सुन वह खुद भी उसी जाल में गिर गया था |   प्यार पनपने लगा या प्यार.....उस बेरहम की दिल में रौंध कर रह जाएगा पता नही ...लेकिन इस वक्त त्रिहांश के दिल और दिमाग दोनो में राज्ञा और राज्ञा की हरकते असर कर गए थे |       शाम का वक्त.....    ऊंची पहाड़ों में ठंडी हवा का झोंका इस वक्त त्रिहांश के बदन से टकरा रही थी | वह इस वक्त बेहद शांत नजर आ रहा था लेकिन ना उसका दिल शांत था और नाही उसका फोन.....त्रिहांश का फोन लगादार बज रहा था | उसे काम से कही दो दिन तक जाना था लेकिन आज जो कुछ भी राज्ञा ने उससे कहा वह एक दम कमजोर सा फील करने लगा था |     उसकी बीवी ने उसके दिल पर ऐसे वार कर दिया था की वह चाह कर खुद को स्ट्रॉन्ग फील नहीं कर रहा था |    शाम से रात होने को आया लेकिन त्रिहांश अपने जगह से हिला ही नही | ठंड का मौसम था ,तो वहा हल्का हल्का सा बर्फ भी गिर रहा था लेकिन त्रिहांश को इसका कोई होश ही नहीं रहा था | वह ना जाने कब तक ऐसे ही दूर तक अपने नज़रे गड़ाए खड़ा था |     सुबह के तीन बजे की आस पास त्रिहांश अपने जगह से हिला,और वापस हवेली लौटा | वैसे अभी भी उसके दिल का हाल ऐसा ही रहा था लेकिन उसका दिल राज्ञा को इस वक्त देखना चाह रहा था |    करीब एक घंटे बाद त्रिहांश का कार जोर से ब्रेक लगाते हुए हेवली के सामने रुका | त्रिहांश कार से बाहर आ कर सीधे अंदर चला गया |     त्रिहांश का रूम...       राज्ञा बेड के एक कोने में बैठे बैठे ही सो गई थी | उसका चेहरा मुरझा हुआ और आंखे थोड़ा सूझ गए थे ऐसा लग रहा था की वह पूरा वक्त रोती ही रही |     त्रिहांश रूम का DOOR OPEN कर अंदर आया | लेकिन राज्ञा को बैठे ही बैठे ही सोया देख वह अपने जगह में ही रुका ,इस लड़की ने इसे पल भर में कमजोर कर रख दिया था |   Â