Chapter 37 of 59

chapter 37

Billionaire's Dark Desire2,701 words~14 min read

अब आगे .....   राज्ञा रोते हुए त्रिहांश से अपना हाथ छुड़वाने की कोशिश कर रही थी लेकिन त्रिहांश का पकड़ बहुत मजबूत था और वह उसे छोड़ने के मूड में भी नही था |     त्रिहांश राज्ञा को ले कर मेंशन के पीछे के साइड जाने लगा जहा इस वक्त एक जेट खड़ा था | राज्ञा यह देख त्रिहांश को रोकते हुए गुस्से से बोली,""_  मुझे मम्मा के पास जाना है त्रिहांश ,उन्हे इस वक्त मेरी जरूरत है.. और मुझे आपके साथ कही नही आना  ..प्लीज.छोड़िए मुझे |     त्रिहांश का जबड़ा सख्त हो रहा था | वह रुक कर , उसपे चिल्ला कर बोला ,""_ वह तुम्हारी मां नही है राज्ञा,उनकी फिकर करना बंद करो | "      राज्ञा हैरानी त्त्रिहांश को देखने लगी,वह फिर उसे कुछ पूछती उससे पहले ही त्रिहांश उसे खींचते हुए ऐसे ही आगे ले बढ़ा |      वही राज्ञा त्रिहांश का हाथ कसके पकड़ कर पीछे की तरह खींच रही थी लेकिन वह रुका नही और नाही राज्ञा का हाथ छोड़ा | जेट के पास ही समर खड़ा था | वह त्रिहांश को देख बोला,""_ बॉस सब रेडी है | "   त्रिहांश अपना सर हा में हिला कर राज्ञा को ले कर अंदर गया लेकिन अचानक से उसका चेहरा एक दम से डार्क हो गया | वह बिना एक पल की देर किए ही राज्ञा को अपने बाहों में लिए बाहर की तरफ जंप मारा | अचानक से ऐसा होने से राज्ञा कुछ समझ नही पाई थी | वही त्रिहांश नीचे गिरते हुए समर को चिल्ला कर बोला,""_ भागो समर.....!!! "    समर जेट के पास ही था | त्रिहांश को इस तरह बाहर जंप करता देख और उसकी बात सुन वह फुर्ती से जेट से दूर भागा वही त्रिहांश और राज्ञा जमीन पर गिरते उसी वक्त वह जेट ब्लास्ट हो गया |        त्रिहांश ज्यादा हाइट से जंप नही मारा था लेकिन फिर भी उसके हाथ में चोट लगी थी | वही राज्ञा अभी भी उसके बाहों में लिपट कर गिरी थी | ब्लास्ट होने की आवाज सुन उसका तो रोम रोम कांप उठा था | वह इस वक्त किसी छिपकली की तरह  उससे लिपट गई थी |       वही त्रिहांश कसके अपने आंखे बंद कर एक राहत भरी सांस लेते हुए राज्ञा को देखा , राज्ञा उसके शर्ट को कसके पकड़ कर उसके सीने में ही अपना चेहरा छुपा कर लेटी थी |        त्रिहांश उसे ले कर ही उठ गया | तभी उसकी नजरे जेट पर टिक गया था जो पूरी तरह जलते हुए राक हो गया था | त्रिहांश फिर राज्ञा को खुद से दूर कर उसे चेक करने लगा कही उसे चोट तो नही लगी |    जंप करते वक्त त्रिहांश ने उसे ध्यान से पकड़ा था ,जिससे राज्ञा एक करोच भी नही आई थी | वही राज्ञा नम आंखों से त्रिहांश को ही देख रही थी | वह फिर उसके हाथ को पकड़ कर बोली,""_ यह सब मेरी वजह से हो रहा है त्रिहांश ,कोई मुझ पर बार बार अटैक कर रहा है और शिकार आप हो रहे है ,मुझे खुद से दूर कर अह्ह्ह्ह्ह...| "   राज्ञा अपनी बात पूरा भी करती उससे पहले ही त्रिहांश कसके उसका चेहरा पकड़ कर बेहद सर्द आवाज में बोला,""_ बकवास बंद करो राज्ञा,वरना अभी तुम्हे उठा कर उस आग में फेंक दूंगा | "     बोलते हुए गुस्से से त्रिहांश जेट को देखने लगा जो जल रहा था | वही राज्ञा उसके हाथ से अपना चेहरा छुड़वा कर उसके हाथ को अपने दुपट्टे से बांधते हुए बोली,""_ आप बहुत बुरे है त्रिहांश | "   त्रिहांश उसे ही देखने लगा | राज्ञा का चेहरा आंसुओ से भरा था और ऊपर से नीचे गिरने की वजह से उसके चेहरे पर थोड़ा मिट्टी भी लगा था | त्रिहांश उसके ही दुपट्टे की दूसरे कोने से उसका पूरा चेहरा साफ करते हुए सख्ती से बोला ,""_hmm कभी कभी कभार तो नया बोला लिया करो बीवी | "     राज्ञा उसे घूर कर देखने लगी,वही त्रिहांश उसके माथे पर किस कर उठ गया | वही राज्ञा उसके हाथ पकड़ कर उठ गई | अब तक सारे घरवाले भी वहा आ गए | क्यों की ब्लास्ट होने की आवाज सुन कर सबकी तो सांसे अटक गए थे  उन्हें पता था त्रिहांश आज उसी चापर में मनाली जाने वाला था |     " त्रिहांश....त्रिहांश तुम ठीक हो ना ? " वेदिका त्रिहांश के पास आ कर उसे अपने तरफ घुमाते हुए पूछी | तभी वहा उर्मी,इशा और इशान भी आ गए थे |    विनोद और अजय दूर खड़े थे और उनकी नजर कभी त्रिहांश पर जाती तो कभी त्रिहांश पर...| वही समर वहा से चला गया था क्यों की उसे पता करना था की आखिर यह सब हुआ कैसे ? किसने किया ? उसे पता करना ही था, वरना उसका कैर नही था |      वेदिका को पैनिक करता देख त्रिहांश बोला,""_ मैं ठीक हु वेदु,बस थोड़ा सा चोट लग गया |    वेदिका फिर उसका हाथ देखने लगी | इशान,इशा और उर्मी राज्ञा के गले लगे थे | वह तीनों फिर त्रिहांश को देखते हुए उसके गले लग गए |      त्रिहांश एक टक राज्ञा को देख रहा था | वही राज्ञा की नजर भी उस पर ही था | थोड़ी ही देर में सारे घर में चले गए |        दुसरी तरफ.....    मलहोत्रा निवास ....        देविका इस वक्त बेचैनी से बार बार इधर से उधर टहलते हुए अपने फोन को चेक कर रही थी, जैसे वह किसी का कॉल का इंतजार कर रही हो |     वही उसका पति सुहास मलहोत्रा भी इस वक्त किसी का फोन कॉल का ही इंतजार था | तभी वहा देविका का फोन रिंग हुआ , देविका ने जल्दी से कॉल पिक कर बोली,""_ काम हो गया ? वह दोनो जल कर राख हो गए थे ? बोलो जल्दी ,में कब से इंतजार कर रही हू....त्रिहांश अग्निहोत्री और उसकी वह लड़की मर गए ना ? "    देविका बिना रुके एक के बाद एक सवाल करते जा रही थी लेकिन उधर से किसी का जवाब ही नहीं मिला | देविका फिर फोन के स्क्रीन को देखी ,फोन के स्क्रीन पर इस वक्त अननोन नंबर शो हो रहा था और देविका को जिस कॉल का इंतजार था वह यह नंबर बिलकुल नही था |  वही सुहास भी आस भरी नज़रों से उसे ही देख रहा था,जैसे उसे अभी कुछ खुश खबरी सुनने को मिलेगा लेकिन देविका की चेहरे पर बदलती हाव को देख उसे कुछ हड़बड़ा लगा और वह उठ उसके करीब आया |         तभी देविका फिर से फोन को कान को लगा कर बोली,""_ हेलो कोन है ? "        " मौत की खबर सुनने बड़ा ही उतावला हुए जा रहा है  ? Hmmm चलो तुम्हारी यह मुरात पूरी कर ही देता हु,3 ..2 ...1 बूम 💥 | " बोलते हुए फोन के उस तरफ त्रिहांश बेहद खतरनाक तरीके से हंसने लगा | वही देविका और सुहास का चेहरे का रंग उड़ गया था | देविका के हाथ से तो फोन ही निचे गिर गया था |    त्रिहांश ने जैसे ही बूम कहा था | उसी वक्त देविका और सुहास को घर के बाहर ही किसी बॉम्ब ब्लास्ट होने की आवाज गूंजा था | वह दोनो जल्दी से भाग कर बाहर गए | जहा एक कार ब्लास्ट हो कर जल रहा था |     " विराज...? " देविका चिल्लाते हुए कार के पास जाने को हुई की तभी उसे सुहास रोकते हुए आस पास घबरा कर देखने लगा जैसे वह किसी को ढूंढ रहा हो | उनके आंगन में इस वक्त वह कार बिलकुल उसी तरह जल रहा था जो थोड़ी देर पहले त्रिहांश का जेट ब्लास्ट हुआ था |    देविका अपने बेटे का नाम ले कर चिल्लाए जा रही थी क्यों की उसे लग रहा था की उस कार के साथ साथ उसका बेटा भी जल गया हो |   "  मां....डैड ....? " विराज उनके पास दौड़ते हुए आया | वही विराज को सही सलामत देख कर देविका और सुहास के सांस में सांस आ गए | वही देविका विराज के चेहरे पर हाथ फेरते हुए उसके गले लग कर रोने लगी, एक पल के लिए उसे ऐसा लगा की उसने अपने बेटे को खो दिया है | तभी वहा सुहास का फोन रिंग होने लगा | सुहास ने कॉल पिक किया तो उधर से त्रिहांश की जोर जोर से हंसने की आवाज गूंज उठी |      जिसे सुन देविका,सुहास और विराज की हाथो की मुट्ठी बन गई | वही त्रिहांश अपनी हंसी को रोकते हुए व्यंग भरी लहजे में बोला,""_ मौत का खेल बेशक खेलना है लेकिन मौत से डर भी लगता है... Hmmm तुम तो कच्ची खिलाड़ी निकली मिसेज मल्होत्रा.| "      देविका गुस्से से फोन के स्क्रीन को घूर कर देखने लगी | उधर से त्रिहांश बेहद ठंडे लहजे में उससे बोला,""_ त्रिहांश अग्निहोत्री का मौत देखना इतना आसान नहीं है मिसेज मलहोत्रा,और तुमने तो यहां बेवकूफी कर दी,जब मैं अपनी जान के साथ रहता हु तब मैं बेहद अलर्ट रहता हु,अगली बार सोच समझ कर प्लान करना और हा अगर में गलती से भी बच गया न तो तुम्हे उसी वक्त बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी जो अभी अभी मुझसे मिस हुआ है ....| "    त्रिहांश ने बेहद sarcastic वे में बोला था लेकिन उसका निशान सुहास और देविका का बेटा विराज था | उधर से त्रिहांश ने कॉल कट कर दिया | वही देविका,सुहास और विराज ,तीनो का गुस्से से जबड़ा सख्त हुआ था |    अग्निहोत्री मेंशन......      राज्ञा इस वक्त त्रिहांश के स्टडी रूम के सामने खड़ी थी | उसे त्रिहांश से बात करना था लेकिन त्रिहांश के डर से वह स्टडी रूम में कदम तक नही रख पा रही थी |      थोड़ी देर बाद त्रिहांश रूम का door खोल कर बाहर जाने को हुआ की तभी उसकी नजर राज्ञा पर गई,जो door के पास ही अपने दोनो हाथो को आपस में उलझा कर रब करते हुए खड़ी थी |     त्रिहांश का एक आईब्रो रेंज हुआ | वह एक टक राज्ञा को देखने लगा ,वही राज्ञा अपना चेहरा पिल्ला जैसा बना कर उसे ही देख रही थी | वह फिर अपना सर नीचे कर हकलाते हुए उससे बोली,""_ मुझे आपसे बात करनी है  ? " " हा, कहो ..? "  त्रिहांश अपने जेब में दोनो हाथ डाल कर एक टक राज्ञा को देखते हुए सख्ती से बोला |    राज्ञा अपना चेहरा ऊपर कर उसे देखी,फिर अपने हाथो की उंगलियां से खेलते हुए उससे बोली,""_ मुझे मिस्टर गौतम को अखरी बार देखना है |       राज्ञा इतना बोल कर त्रिहांश का जवाब का इंतजार करने लगी | थोड़ी देर बाद भी उसे त्रिहांश का कोई जवाब नही मिला तो वह अपना सर ऊपर  कर सामने देखी ,त्रिहांश उसके सामने नही था |    राज्ञा फिर उसे ढूंढते हुए अंदर गई तो उसे त्रिहांश सोफे पर बैठा हुआ दिखा | त्रिहांश का औरा बेहद सख्त और कोल्ड एक्सप्रेशन के साथ भरा था | त्रिहांश अपने होंठो के बीच सिगरेट रख कर लाइटर से जला रहा था |          त्रिहांश की थीकी नजरे उस पर ही टिका था | वही राज्ञा उसके पास आते हुए उससे बोली,""_ त्रिहांश...आप समझते क्यों नहीं ? आपको उन्हे नही मारना चाहिए था ,पता नही मम्मा का हालत कैसा हुआ होगा इस वक्त ? प्लीज उन्हे मेरी जरूरत है ,उनसे एक बार मिल कर आती हु त्रिहांश ,प्लीज....| "   त्रिहांश सिगरेट का धूंआ उड़ाते हुए बस राज्ञा को देख रहा था | राज्ञा जिसका फिकर कर रही थी, वह उसकी मां नही थी | और उसने कभी मां होने का फर्ज तक नही निभाया था लेकिन हा राज्ञा के लिए बुरा फील करते हुए उसे गौतम की हर एक बात मानने पर मजबूर जरूर किया करती थी  | राज्ञा का मन गौतम के लिए नही दुख रहा था, क्यों की उसकी जिंदगी में किसी ने हद से ज्यादा तकलीफ दिया हो तो वह सिर्फ गौतम था | वह बस वाणी के लिए वहा जाना चाहती थी |       त्रिहांश ने राज्ञा की किसी भी बात का जवाब नही दिया वह बस उसे देखने लगा था | राज्ञा का चेहरा रोनी जैसा हो गया था | वह बिना कुछ कहे वापस बाहर जाने को मुड़ी की तभी स्टडी रूम का door क्लोज हुआ |            यह देख राज्ञा मुड़ कर त्रिहांश को देखी, त्रिहांश बिना एक्सप्रेशन के साथ अभी भी उसे देख रहा था | राज्ञा गुस्से से उसके पास आते हुए उससे बोली,""_ आ आपने door क्यों क्लोज किया ? मुझे अपने रूम में जाना है door खोलिए | "    त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह सिगरेट को ऐश बॉक्स में बुझा कर उसे अपने तरफ आने को इशारा किया | राज्ञा अपने आंखे छोटी कर उसे देखी,फिर वह दूसरी तरफ मुंह फेर कर खड़ी हो गई |    तभी त्रिहांश बोला,""_ अगर तुम जाना चाहती हो तो ठीक है बीवी तुम जा सकती हो | "    राज्ञा की चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गई | लेकिन त्रिहांश की आगे की बात सुन उसके चेहरे पर आई हुई स्माइल गायब हो गया |   " लेकिन तुम्हे पहले मुझे satisfied करना होगा " त्रिहांश अपना सर सोफे पर टिका कर एक टक उसे ही देखने लगा था | राज्ञा का मुंह बन गया था | अभी दोपहर का वक्त था तो वह कैसे यह सब करे ? यह कोई वक्त भी है ?    त्रिहांश बेहद भारी आवाज में मगर मदहोश भरी आवाज में उसे बुलाया ,""_ राज्ञा....|      राज्ञा उसे घूरते हुए जा कर उसके बगल मे बैठ गई | त्रिहांश ने उसे एक नजर देखा फिर अपने और उसकी बीच की दूरी को देख गुस्से से बोला,""_ तुम मुझसे इतना दूर बैठ कर ,मुझे satisfied करोगी ? हा ? "   राज्ञा की बाहें तन गए थे | वह त्रिहांश को उंगली दिखाते हुए बोली,""_  मै आपको कोई सैटिस्फाईड नही कर रही और आप मेरे करीब भी मत आइए ,मुझे ना कही जाना है और नाही अब आपके करीब आना है समझे आप | "    राज्ञा गुस्से से इतना बोल कर,उठ के विंडो के पास चली गई | उसे अच्छे से पता था त्रिहांश उसे रोकने के लिए यह सब बकवास कर रहा है | पूरा दिन क्या रात भी कम पड़ जाएगा उसे satisfied करने और वह खुद ही थक जाती |        राज्ञा त्रिहांश को मन ही मन हजार गाली देते हुए बाहर की तरफ देख रही थी | तभी उसे अपने गर्दन में त्रिहंश की गरम सांसे मेहसूस होने लगे तो वह जल्दी से मुड़ कर देखने लगी |       वही त्रिहांश अपना सर थोड़ा टेढ़ा कर उसके गर्दन में झुक कर उसकी फ्रेगरेंस को इनहेल कर रहा था | राज्ञा उससे पीछे सरकती उससे पहले ही त्रिहांश ने उसके कमर को पकड़ा फिर अपने आपसे चिपकाते हुए उसके गर्दन को चूमने लगा |     अचानक से ऐसा होने से राज्ञा की आंखे हैरानी से बड़ी हो गई थी | वह तेज तेज सांस लेते हुए त्रिहांश के सीने में अपने दोनो हाथ रख कर उसे खुद से दूर करने लगी लेकिन त्रिहांश जरा भी हिला नही |     वही राज्ञा अपना सर थोड़ा पीछे करते हुए त्रिहांश का नाम लेते हुए बोली,""_ मैने कहा ना आपको मेरे करीब नही आना है  आह...| "    त्रिहांश के चुवन से सिहरते हुए राज्ञा उसका नाम लिए जा रही थी | लेकिन त्रिहांश उसे जरा भी खुद से दूर नही कर रहा था | वह बिना रुके राज्ञा के गर्दन को चूमते हुए अपने होंठो को राज्ञा की होंठो तक ले आया जो आह भर रही थी |     To be continued........

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