Chapter 26: chapter 26

Billionaire's Dark DesireWords: 30118

   अग्निहोत्री मेंशन......     वेदिका इस वक्त हाल में इधर से उधर टहलते हुए त्रिहांश के रूम की तरफ देख रही थी | उसकी चेहरे पर टेंशन ही टेंशन नजर आ रहा था |   वही सोफे पर उर्मी ,इशा और दिया बैठ कर बस एक टक वेदिका को देख रहे थे |   तभी वेदिका बड़बड़ाते हुए बोली,""_ दुपहर का वक्त हो गया है ... फिर भी यह दोनो अब तक रूम से बाहर नही आए ? दोनो का तबियत तो ठीक है ना ? "    त्रिहांश और राज्ञा,ना ब्रेकफास्ट करने नीचे आए थे और नाही लंच करने ....और उनके रूम के तरफ कोई सर्वेंट भी नही गया था |     वेदिका ऐसे ही टेंशन में टहल ही रही रही थी की उसे अचानक से याद आ गया की वह दोनो अब शादीशुदा है और कल रात उनकी मिलन का रात था |       वह रुक कर फिर से त्रिहांश के रूम की तरफ देखने लगी,वह टेंशन में यह सब भूल ही गई थी |    रूम में.....     राज्ञा की नींद खुल गई थी | और वह एक टक त्रिहांश को देख रही थी जो ना जाने कब से उस पर अपने नजरे गड़ाए बैठा था | राज्ञा फिर कसमसाते हुए उससे बोली,""_ मुझे भूख लगी है त्रिहांश आह्ह्हह...| "       राज्ञा उठने को हुई ही थी ,की तभी उसके बदन में से तेज दर्द मेहसूस हुआ | वह करहाते हुए त्रिहांश के ऊपर गिर गई |  वही त्रिहांश बिना भाव के राज्ञा को देख रहा था | उसके दिमाग में अभी भी राज्ञा की बाते गुंज रही थी जो रात में उसने कहा था |       वही दर्द से राज्ञा की आंखे भींच गए थे | और उसका पकड़ भी त्रिहांश के बाजू में कस गया था | वह त्रिहांश को कोसते हुए बोली,""_ आ आपने तो मुझे उठने की भी लायक नहीं छोड़ा , आआह्ह्हह्ह बहुत दर्द हो रहा है त्रिहांश | "        राज्ञा करहाते हुए त्रिहांश को देखी ,त्रिहांश अब भी वैसे ही बैठा था | वह कुछ रिएक्ट ही नही कर रहा था | राज्ञा उसे ही देखने लगी की तभी त्रिहांश ने कुछ ऐसा कहा जिससे राज्ञा की सर अपने आप नीचे झुक गया |     राठौड़ निवास......     हाल में रखे हुए सोफे पर बैठ कर आर्यांश कुछ सोच रहा था | उसके दिमाग में बस राज्ञा चल रही थी | जब से सुधर्व ने कहा था की वह लड़की जिसकी तस्वीरों को संभाल कर माया ने रखा रूम में रखा था वह उसकी बड़ी बहन है | तब से वह ज्यादा ही डिस्टर्ब हो गया था |    अर्यांश राज्ञा से एक बार मिलना चाहता था | आर्यांश यही सब सोच ही रहा था की तभी उसे सुधर्व बाहर जाते हुए दिखा |   " डैड..... डैड रुकिए... | "     आर्यांश उठ कर उसके पास जाते हुए उसे आवाज लगाया |सुधर्व मुड़ कर उसे ना समझी में देखने लगा | तभी अर्यांश बोला,""_ डैड.. मैं..मुझे दी से मिलना है ,वह भी आज ही | "    सुधर्व की आंखे छोटी हो गई | वह घूर कर अर्यांश को देखने लगा तो आर्यांश बोला,""_ डैड बस एक बार...प्लीज डैड मुझे उन्हे एक बार देखने दो | "     " किसे देखना है भाई ? " आहिरा उनके पास आते हुए पूछी तो आर्यांश और सुधर्व मुड़ कर उसके तरफ देखने लगे |       वही आर्यांश फिर सुधर्व को देखते हुए बोला,""_ प्लीज डैड, मैं बस उन्हें दूर से ही देख कर आऊंगा | "  सुधर्व लाचारी में उसे देखने लगा | राज्ञा इस वक्त अग्निहोत्री मेंशन में रहती थी और उससे मिलना आसान भी नहीं था |   वही आहिरा ना समझी में कभी अर्यांश को देखती तो कभी सुधर्व को ,उन दोनो ने उसे पूरा इग्नोर कर दिया था | अहिरा का मुंह बन गया,वह फिर उन दोनो को घूर कर देखने लगी |         वही आर्यांश पूरी तरह जिद्द पर अड़ गया था | वह आज राज्ञा से मिल कर ही रहेगा चाहे कुछ भी हो जाए | सुधर्व बोला,""_ वह इस वक्त अग्निहोत्री मेंशन में है | "      सुधर्व इतना बोल कर घर से बाहर निकल गया | वही आर्यांश बुदबुदाते हुए बोला ,""_ अग्निहोत्री मेंशन...hmmm |         आर्यांश कुछ सोचते हुए मुड़ा तो उसे अहीरा का किसी गुब्बारे की तरह फूला हुआ चेहरा दिखा | वह गुस्से से उसे ही घूर रही थी |    अर्यांश ना समझी में उसे देखते हुए पूछा,""_ क्या हुआ बच्चा ? "  अहीरा की आंखे छोटी हो गई | वह गुस्से से लगभग चिल्लाते हुए बोली,""_ आपकी और डैड की हिम्मत कैसे हुई मुझे इग्नोर करने की ? मैं .... मैं आप दोनो से अब कभी बात नही करूंगी जाइए | "     अहीरा गुस्से से अपने रूम के तरफ जाने को मुड़ी तो आर्यांश उसका हाथ पकड़ कर अपने साथ बाहर ले जाते हुए बोला ,""_ अरे...!! तुम गलत समझ रही हो, मैं बताता हु आ जाओ | "     अहीरा उससे गुस्से से अपना हाथ छुड़वाने लगी थी लेकिन आर्यांश उसे मनाते हुए अपने साथ ले कर बाहर चला गया |   अग्निहोत्री मेंशन....     " मुझसे प्यार करने का हक किसने दिया था तुम्हे ? क्यों मुझसे अपना दिल लगा बैठी हो ? "     त्रिहांश की यह गुस्सैल बात सुनते ही राज्ञा ने बिना कुछ कहे अपना सर झुका लिया था | वही त्रिहांश राज्ञा को घूर कर देख रहा था,वह फिर से बेहद सख्त लहजे में बोला,""_ मैं कुछ पूछ रहा हु तुमसे, राज्ञा? "    त्रिहांश को सख्त लहजे में बात करता देख राज्ञा थोड़ा सहम गई | वह थोड़ा उससे पीछे हटते हुए बोली,""_ मेरे पास कोई जवाब नही है त्रिहांश "    त्रिहांश को गुस्सा आ गया,वह एक ही झटके में उसे अपने करीब खींच कर गुस्से से कहा ,""_ seriously....! "  राज्ञा अब थोड़ा चीड़ गई | अब उससे प्यार हो गया है ,तो हो गया | वह इसमें क्या कर सकती है ? उसका कोई बस में नही था | वह गुस्से से उसे देख बोली,"" _ हा.....!! आपसे कोई मजाक भी कर सकता है ? "     राज्ञा ने झट से अपने दोनो हाथो से मुंह बंद कर लिया,उसे पता ही नही चला की उसने चीड़ कर त्रिहांश को जवाब कैसे दिया ? वही त्रिहांश का जबड़ा सख्त हुआ था |     वही राज्ञा रोनी से शक्ल बना कर उससे बोली,""_ आपको क्या लगता है मैं कोई इंसान नही हु? मेरे पास कोई दिल नही है ? अब मुझे आपसे प्यार हो गया है तो हो गया, कोनसा गुनाह कर दिया मैंने ? "      त्रिहांश उसे अब भी वैसे ही घूर रहा था | वही राज्ञा की आंखे हल्के से नम हो गए | वह जानती थी त्रिहांश उससे प्यार नही करता और त्रिहांश ने खुद उसे कहा भी था की वह उससे दिल ना लगाए ? लेकिन दिल.. यह उसका सुना ही नहीं |    वह धीरे से अपना सर नीचे कर अपने हाथो को आपस में उलझा कर रब करते हुए बोली,""_ मुझे पता ही नही चला की, मैं कब आप जैसे खडूस इंसान से दिल लगा बैठी ? मैं आपसे कुछ नही चाहती त्रिहांश,कुछ भी नही ,आपको भी नही...| "   बोलते हुए उसने अपना सर ऊपर कर त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश बिना भाव के बस उसे देख रहा था | तभी राज्ञा आगे बोली,""_ मैं आपसे प्यार करते रहूंगी और इस बार आप चाह कर भी मुझे ऐसा करने से रोक नही सकते ,क्यों की यह आपके बस में नही है और इसे रोकना मेरे बस में भी नही |    राज्ञा इतना बोल कर खुद को पूरी तरह ब्लैंकेट से कवर कर नीचे उतरने लगी की तभी उसे त्रिहांश की बात बेहद सख्त आवाज सुनाई दी,""_ दुनिया में ऐसी कोई बात ही नही होगी, जो त्रिहांश अग्निहोत्री के बस में नही होता राज्ञा,अगर तुम्हारे दिल में प्यार जगा है तो मैं उसे आसानी से मिटा भी सकता हु | "       राज्ञा हैरानी से मुड कर त्रिहांश को देखने लगी | वह त्रिहांश के मुंह से इस तरह का जवाब सुनेगी ? उसने सोचा नहीं था | यह आदमी....? क्या है यह ? पागल इंसान ... |    राज्ञा को इस वक्त उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था | वह जल्दी से त्रिहांश के करीब जा कर उसके बाजू कसके पकड़ कर चिल्लाते हुए बोली,""_ क्या दिक्कत है आपको ? क्यों कर रहे है आप ऐसा ? हा , मैं आपसे प्यार करती हू जिसका फायदा उठा कर मैने आपसे कुछ मांगा ,नही ना ? नाही कोई चाहता रखा ? फिर आपको इतना तकलीफ क्यों हो रहा है ? वैसे भी मैं अपने पति से प्यार कर रही हूं किसी पराए मर्द से नही समझे....? "     राज्ञा गुस्से से बिना रुके बोले जा रही थी | वही त्रिहांश को उसकी लास्ट लाइन सुन कर गुस्सा आ गया था | लेकिन उसने अपने गुस्से को दबाया,फिर उसे अपने आप से चिपका कर गुस्से से बोला ,""_ बड़ी जुबान चल रही है आज तुम्हारी ? कही यह प्यार का ताकत तो नही ..? "   बोलते हुए त्रिहांश ने कसके राज्ञा की कमर को दबा दिया | वही राज्ञा की मुंह से दर्द भरी आह निकल गई |   " अअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्.... | "     त्रिहांश एक टक राज्ञा को देखने लगा | दर्द से राज्ञा की आंखो से आंसू बहने लगे थे | वह छटपटाते हुए अपने कमर से त्रिहांश का हाथ हटाने को हुई लेकिन त्रिहांश का पकड़ बहुत मज़बूत था |       वह रोते हुए त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश उसे घूर रहा था | पता नही क्यों ? वह इस वक्त राज्ञा के साथ किस तरह का बर्ताव कर रहा है उसे समझ नही आ रहा था |    वही राज्ञा को अपने कमर में बहुत दर्द मेहसूस हो रहा था | वह रोते हुए उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपा कर उससे लिपट गई तो त्रिहांश का पकड़ अपने आप ही ढीला हो गया |     वही राज्ञा की आंसू अब उसके गर्दन में गिर रहे थे ,जिससे त्रिहांश को अजीब सी बेचैनी मेहसूस हो रही थी |       त्रिहांश का पकड़ ढीला होते ही राज्ञा की पकड़ उसके गर्दन में कस गया था और वह सुबक कर रो रही थी |त्रिहांश ने उसे कुछ नही कहा |     थोड़ी देर बाद राज्ञा धीरे धीरे से अपने नाक रगड़ते हुए त्रिहांश के इयरलोब पर किस की तो त्रिहांश ने उसे कसके अपने बाहों में भर लिया | त्रिहांश के आंखे कसके बंद हो गए थे |   वही राज्ञा धीरे से अपने होंठ को उसके गर्दन से हो कर उसके गाल तक ले गई | तभी त्रिहांश धीरे से अपने आंखे खोल कर राज्ञा को देखा , राज्ञा अपने आंखे बंद कर उसमे खो गई थी | उसके मुलायम सी होंठ को त्रिहांश अपने छोटे छोटे बियर्ड पर मेहसूस कर रहा था |       राज्ञा फिर उसके पूरे गाल पर किस करते हुए त्रिहांश के होंठो के किनारे गई | वही त्रिहांश की हाथ अब राज्ञा की कमर में सरकने लगे थे | और वह राज्ञा को अपने आपसे चिपका भी रहा था |    वही राज्ञा धीरे से अपने होंठो को त्रिहांश के होंठो पर रख कर स्मूच की, फिर उसके होंठो के किनारे बेहद सिद्दात से चूमी तो त्रिहांश की होंठ हल्के से खुल गए |   " आह.....!!! " त्रिहांश ने आह भरा |      राज्ञा जल्दी से उसके होंठो को अपने होंठो के गिरफ्त में ले कर kiss करने लगी | त्रिहांश हैरानी से उसे ही देख रहा था | आज यह राज्ञा उसे कुछ अलग सी ही लग रही थी | वह फिर उसे अपने बाहों में उठा कर वाशरूम के तरफ चला गया |        राज्ञा अभी भी उसके होंठो को जी भर कर चूमते जा रही थी | तभी त्रिहांश ने उसे बाथटब में फेंक कर बोला,""_ लगता है मैने रात को तुम्हे पुरी तरह satisfied नही किया है,mmm ? "   बोलते हुए त्रिहांश राज्ञा के ऊपर आ गया | राज्ञा हैरानी से उसे ही देखने लगी थी | वह दोनो इस वक्त बिना लिबास के थे|   वही राज्ञा डरते हुए उसे कुछ कहने को हुई उससे पहले ही त्रिहांश उसके होंठो को अपने मुंह में ब्लॉक किया ,फिर उसके अंदर खुद को समाते हुए वही सब दुबारा करने लगा जो उनके बीच रात में हुआ था |    राज्ञा का चेहरा पूरा लाल रंगत में बदल गया था | उसे समझ नही आ रहा था की उसका यह पति किस तरह का जानवर था ? जरा भी रहम नहीं खा रहा था उस पर ? उसने बस दो तीन बार उसे kiss क्या कर लिया त्रिहांश ने यह समझा की वह कल रात उससे satisfied नही हुई है ?     राज्ञा छटपटाते हुए अपने होंठ छुड़वा कर बोली,""_ नही त्रिहांश..नही मै बहुत थकी हूं आ आप.....| "         राज्ञा रोनी सी शकल बना कर उसे कह ही रही थी की तभी त्रिहांश ने उसके होंठो पर उंगली रख कर,अपने हरकत और तेज़ी से जारी रखते हुए ही बोला,""_ शशश....!!! मुझे पता है wifey ,तुम थकी हुई हो.... लेकिन तुमने मुझे seduce करने की गलती कि है और अब तुम्हें उस गलती की सजा मिल रही है | "       राज्ञा की हालत बहुत खराब हो रहा था | वह बिलकुल फूल जैसी थी और त्रिहांश कल रात से उसे दबोच कर खाने लगा |       करीब दो घंटे बाद त्रिहांश रुक कर राज्ञा को देखा | राज्ञा अब एक दम से बेजान सी हो गई थी | उसकी चेहरे पर इस वक्त ना सिर्फ थकान नजर आ रहा था बल्कि अब वहा बेहिसाब सा दर्द भी नजर आ रहा था | उसका पूरा बदन टूट हुआ मेहसूस होने लगा था |     त्रिहांश उसके गाल पर हाथ रखा तो राज्ञा धीरे से उसका हाथ झटका कर दूसरी तरफ देखने लगी | वह अब उससे नाराज हो गई थी | इन दो घंटे उसने लगभग चिल्लाते हुए मना किया था लेकिन त्रिहांश रुका ही नही .. बेदील इंसान.!! "       त्रिहांश ने उसे इग्नोर कर बाथटब से उठ कर राज्ञा को देखते हुए बाथरोब पहना | राज्ञा एक दम वही लेटी थी | त्रिहांश उसे धीरे से अपने गोद में उठा कर क्लोसेट रूम में ले गया |     राज्ञा की आंखे बंद हो रहे थे और यह थकान के वजह से हो रहा था और उसे जोरो की भूख भी लगी थी | त्रिहांश उसे क्लोसेट रूम में ले जा कर आराम से एक चेयर पर बैठा दिया,फिर उसके बॉडी को साफ किया |    राज्ञा उसे नाराज़ भरी नजरो से देख रही थी लेकिन वह यह भी जानती थी त्रिहांश उसे कभी मनाता नही | और राज्ञा ने उम्मीद भी नही रखा था |   वही त्रिहांश राज्ञा को एक लूज टी शर्ट और ट्राउसर पहना कर,रूम में ले जाते हुए पूछा ,""_ क्या खाओगी ? "  राज्ञा ने कहा,""_ कुछ नही ..| "    राज्ञा को बहुत भूख लगी थी लेकिन वह नाराजगी से ऐसे बोल रही थी |        त्रिहांश उसे बेड पर बैठा कर उठा तो ,राज्ञा वही लेट गई | वह बहुत ज्यादा थक गई थी ,इतना की उससे उसके आंखे तक खोला नही जा रही थी | वही त्रिहांश उसे ऐसे देख अपना सर ना में हिलाया फिर ड्रॉअर में से एक दवाई ला कर राज्ञा को उठाते हुए बोला,""_यह पैन किलर खालों..| "   राज्ञा उसे घूर कर देखने लगी तो त्रिहांश की भाहे सिकुड़ गए | वह बोला ,""_ शुरुवात तुमने की थी राज्ञा,तुमने मुझे kiss करते हुए सेड्यूस किया तो मैं बेचारा क्या करता ? "    बोलते हुए त्रिहांश उसके बेहद करीब बैठ गया | राज्ञा का शकल रोनी जैसा हो गया था | उसने बिना कुछ कहे दवाई खा ली | वही त्रिहांश उसका मुरझा हुआ सा चेहरा ही देख रहा था | वह धीरे से उसके गाल सहलाते हुए बोला,""_ बहुत दर्द हो रहा है ? "   राज्ञा की आंखो से आंसू लुढ़कने लगे | वह हा में सर हिलाते हुए अपने आंसू पोछी | वही त्रिहांश कुछ लाचारी सा मेहसूस कर रहा था | वह उसके बगल में आ कर उसे अपने सीने से लगाते हुए बोला,""_अभी तुमने दवाई ली है न? अब थोड़ी देर में ठीक हो जाओगी | "   त्रिहांश उसके बालो पर किस करा | तभी रूम का door knock हुआ | त्रिहांश door के तरफ देखते हुए बोला ,""_   Come in...|    Door खोल कर एक सर्वेंट अंदर आया | जिसके हाथ में इस वक्त खाने का ट्रे था | वह खाना coffe टेबल पर रख कर सर्वेंट वहा से चला गया |    वही त्रिहांश एक नजर राज्ञा को देखा जो आंखे बंद कर उससे चिपक कर बैठी थी | त्रिहांश उससे अलग हो कर,काफी टेबल के पास गया, फिर एक प्लेट में खाना सर्व कर राज्ञा के पास आया |       राज्ञा बैठे बैठे ही सो गई थी ,वही त्रिहांश उसे आराम से उठा कर बैठाया, फिर उसे आराम से खाना खिलाने लगा | राज्ञा उसे देखते हुए खाने लगी थी , क्यों की उसे बहुत बुख लगी थी | थोड़ी देर में त्रिहांश उसे पेट भर खिला कर सुलाया फिर रूम से बाहर चला गया |  To be continued.........