Chapter 14 of 59

chapter 14

Billionaire's Dark Desire2,762 words~14 min read

    अग्निहोत्री मेंशन....,      Ragya इस वक्त हाफ़ते हुए त्रिहांश को देख रही थी | जो बिना रुके उसके पूरे चेहरे पर किस कर रहा था | राज्ञा के मुंह से हल्के हल्के से आह निकल रही थी | और उसकी धड़कने भी तेज हो गए थे क्यों की त्रिहांश के करीब आने से उसके दिल और जिस्म दोनो ही रिएक्ट करने लगती थी |     पता नही क्यों उसका टच राज्ञा को गलत नही लग रहा था | वह जानती थी की इस वक्त त्रिहांश उसे अपने सिर्फ desire पूरा करने के लिए छू रहा है | त्रिहांश को उससे कोई मतलब नहीं है और वह उसे कभी भी छोड़ सकता है ? लेकिन उसका वह चूवन कुछ तो ऐसा था जिसमे राज्ञा कभी कभी खुद को खोने से रोक नही पाती थी |    राज्ञा का आज भी ऐसा ही हाल था | वह उससे गुस्सा थी लेकिन जैसे ही उसे पता चला की उसके साथ यह सब कुछ त्रिहांश ने नही अदा ने किया तो उसका गुस्सा अचानक से शांत हुआ था | लेकिन उसे समझ नही आया था की अदा उसे इस हद तक नफरत कैसे करने लगी ? बस एक ही मुलाकात में उससे उसकी बहस हुई थी |      अअह्ह्ह्ह...!!! " राज्ञा त्रिहांश को देखते हुए उसके ही बारे में सोच रही थी की तभी त्रिहांश ने उसके होंठो पर काटा जिससे उसके मुंह से आह निकल गई |     वह फिर गुस्से से अपने होंठ ढक कर त्रिहांश को घूर कर देखने लगी | त्रिहांश बिना भाव के उसे ही देख रहा था लेकिन उसके uppar lip हल्के से ऊपर मुड़ा था | उसकी चेहरे पर ना दिखने वाली स्माइल था |       वही राज्ञा मुंह बनाते हुए बोली,""_ आप कितना बेरहम है ? मेरी तबियत ठीक नहीं है फिर भी आपको मुझे तंग करना है ? "      यह सब बोलते हुए राज्ञा का चेहरा बेहद क्यूट और पिल्ला जैसा हो गया था | जिसे देख त्रिहांश चाह कर भी उससे थोड़ी देर अपनी नजरे नही हटाया | वह बस बिना पलके झपकाए राज्ञा को देखने लगा था |     राज्ञा एक टक त्रिहांश को देख रही थी | त्रिहांश को इस तरह देखता देख वह जल्दी से उससे अपने नज़रे हटा ली,क्यों की त्रिहांश की इंटेंस नजरे बरदाश्त करना उसके बस में नही था |       राज्ञा जल्दी से अपने नजरे इधर उधर दौड़ाते हुए उससे बोली,""_ त्रिहांश...आ आप ऐसे क्यों ummmm....!! "   राज्ञा बोल ही रही थी | की त्रिहांश ने एक ही झटके में उसके होंठो पर हमला कर दिया | राज्ञा को उसकी उम्मीद नहीं थी वह तो हैरान हो गई थी |      वही त्रिहांश बड़े ही शिद्दत से उसके होंठो को अपने मुंह में भर कर kiss करने लगा था | राज्ञा बस अपने पलके झपकाते हुए त्रिहांश को देख रही थी | त्रिहांश का एक हाथ उसके कमर में आ गया था तो दूसरा राज्ञा के गाल पर | वह उसके कमर और गाल को सहलाते हुए किस कर रहा था |     थोड़ी देर deep kiss करने के बाद त्रिहांश खुद ही उसके होंठो को रिहा कर उसके पूरे चेहरे पर किस करने लगा | वही राज्ञा तेज तेज सांस लेते हुए त्रिहांश को देख रही थी | त्रिहांश तो इस वक्त अलग ही मूड में लग रहा था | वह धीरे धीरे राज्ञा के चेहरे को चूमते हुए उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपाता तभी door knock हुआ |   Door knock होने के साथ साथ वह किसी की खांसने की आवाज भी गूंजी थी | जिसे सुन त्रिहांश की कसके आंखे भींच गए थे | वही राज्ञा हड़बड़ा गई थी | वह अपने आप को टिक करने इधर उधर हिलने को हुई की तभी उसकी मुंह से दर्द भरी आह निकल गई |        अह्ह्ह्ह्ह्.....!! "       त्रिहांश जल्दी से अपने आंखे खोल कर Ragya को देखा जो दर्द से कराह रही थी | त्रिहांश फिर उसके हाथ को देखा ,Ragya के हाथ में जहा गोली लगी हुई थी वही सी हल्के हल्के खून बहने लगा था | यह देख त्रिहांश के दांत भींच गए |     " यह क्या किया तुमने ? ध्यान नहीं रख सकती बेवकूफ लड़की ? " त्रिहांश डांटते हुए उसका हाथ ले कर हल्के हल्के से फूंकते हुए उसके चोट को साफ करने लगा |        वही door के पास इशान,इशा और उर्मी खड़े थे | वह सब हैरानी से कभी त्रिहांश को देखते तो कभी राज्ञा को | त्रिहंश को कभी किसी को केयर करता हुआ आज पहली बार देख रहे थे | उनके लिए यह एक दम से शॉकिंग भरा नजारा था |         वह तीनों फिर एक दूसरे को देखने लगे | वही राज्ञा की नजर भी इशान ,इशा और उर्मी पर गई थी |  वह धीरे से त्रिहांश से अपना हाथ पीछे लेने को हुई तो त्रिहांश अपना चेहरा ऊपर कर राज्ञा को देखा फिर उसके चोट साफ करते हू बेहद सख्ती से बोला,""_ अगर तुम तीनो को यहा कोई काम नही है तो तुम लोग जा सकते है | "    राज्ञा हैरानी से त्रिहांश को देखने लगी थी | उसे समझ नही आ रहा था की त्रिहांश बिना देखे कैसे समझ गया कि वहा तीन लोग खड़े है |वही इशान ,इशा, उर्मी भी हैरान थे लेकिन उनके लिए यह कोई पहली दफा नही हुआ था | उन्हे अपने भाई की पॉवर के बारे में पता था | वह तीनो अंदर आए |    वही राज्ञा अभी भी त्रिहांश को देख रही थी | उसका मुंह हल्के से खुला हुआ था ,यह देख त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह उसके मुंह बंद करते हुए बोला ,""_ Rest करो तुम ....!!"        त्रिहांश इतना बोल कर वहा से उठा | फिर उन तीनो को देखा | उर्मी की नजर राज्ञा पर ही टिकी थी | त्रिहांश बोला,""_ तुम्हारी तरह ही इंसान है,ऐसे अजीब तरह से उसे क्यों देख रहे हो ? "       त्रिहांश की सवाल सुन कर उर्मी जल्दी से राज्ञा से नजरे हटा कर त्रिहांश को देखी फिर वह बोली,""_ भाई बस ऐसे ही देख रही थी ....मेरी होने वाली भाभी.......!!! "     उर्मी की बात को त्रिहांश बीच में ही काटते हुए कहता है," " _आ आ तुम तीनो इसे अपनी भाभी समझने की गलती मत करना ,यह यहा कुछ दिन की मेहमान है that's it| "  कितनी व्यंग भरी बात था यह | उन तीनो ने अभी अभी अपने आंखो से देखा था की त्रिहांश राज्ञा के साथ क्या कर रहा था ? किस तरह उस पर प्यार लूटा रहा था ? तो इस बात का क्या मतलब ?          उर्मी ,इशान, इशा तीनो एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे | वही राज्ञा की चेहरे पर भी अजीब सा स्माइल आ गया था | वह खुद पर हंस रही थी या यू कहे की वह अपने हालत पर हंस रही थी |     त्रिहांश ने एक नजर राज्ञा को देखा जो अपना सर नीचे झुकी थी | लेकिन उसकी चेहरे पर बिखरी हुई स्माइल उससे छुपा नही था | त्रिहांश थोड़ी देर बिना भाव के उसे देखा फिर इशान को देख पूछा ,""_ तुम लोग यहा क्यों आए ? "     इशान बोला ,""_ भाई ..वह हमे राज्ञा से मिलना था ? "  त्रिहांश का एक आईब्रो रेंज हुआ | वह घूर कर इशान को देखने लगा तो इशान बोला,""_ भाई , राज्ञा से हमारी अच्छी बात चीत हुई है ,वह अब हमारी फ्रेंड ग्रुप में शामिल है तो हमे....!!! "      इशान अपनी बात अधूरा ही छोड़ा क्यों की त्रिहांश उसकी सफाई सुन कर भी उसे घूर कर देख रहा था | त्रिहांश एक गहरी सांस ले कर राज्ञा को देखा जो मासूमियत से सबको देख रही थी |      त्रिहांश बिना कुछ कहे रूम से बाहर चला गया | उसके जाते ही मानो सबमें सांस आई हो | वह एक दूसरे एक राहत भरी सांस लेते हुए देखने लगे थे |           राज्ञा उर्मी को देख रही थी जो उसके लिए अंजान थी | तभी इशा राज्ञा के बगल में बैठते हुए बोली,""_ यह उर्मी दी है त्रिहांश भाई की छोटी बहन | "    राज्ञा ने बस हलका सा स्माइल किया फिर चुप हो गई | वही उर्मी उसके दूसरे साइड में बैठते हुए बोली,""_ भाभी....!!! "     बोलते बोलते उर्मी रुक गई | क्यों की उसे अचानक से याद आ गया था की त्रिहांश राज्ञा को भाभी कहने से मना किया है तो वह कैसे कहती ?    वही राज्ञा उसे ही हैरानी से देख रही थी | वह बोली,""_ राज्ञा नाम से बुलाओ....!!! "     उर्मी अपना सर हा में हिलाते हुए बोली,""_ राज्ञा..... राज्ञा भाभी.......!!!! "    उर्मी को फिर से भाभी कहता देख राज्ञा लाचारी में इशान और इशा को देखने लगी ताकि वह दोनो उर्मी से कह के की उसे भाभी ना बुलाए। ? लेकिन उन दोनो ने उसे ignor किया|   तभी  उर्मी बोली,""_ राज्ञा भाभी,भाई और आपके बीच कोई झगड़ा चल रहा है क्या ? "   राज्ञा ना समझी में उर्मी को देखने लगी | वह कुछ कहती उससे पहले ही इशा बोली,""_ अरे भाभी,भाई थोड़ी देर पहले प्यार से पता नही आपके साथ क्या क्या कर रहे थे लेकिन जैसे ही हम आए तो उनका चेहरा गुस्से से भर गया और उन्होंने यह भी कहा की आप हमारी भाभी नही बनने वाली ? ऐसे अचानक से कैसे बदल सकते है भाई ? "     ईशा की सवाल सुन कर इशान और उर्मी घूर कर इशा को देखने लगे | क्यों की वह लड़की अपनी उम्र से भी बड़ी वाली सवाल पूछ रही थी | इशा की नजर राज्ञा को देख रही थी |      राज्ञा अजीब नजरो से इशा को ही देख रही थी | उसे समझ नही आ रहा था की वह उसे क्या जवाब दे ? क्यों की जिस तरह इशान,इशा और उर्मी उससे सवाल कर रही थी, उससे तो यही लग रहा था की उन तीनो ने त्रिहांश की बात को सीरियसली नही लिया है |       दूसरी तरफ.....    त्रिहांश अपने फोन में कुछ स्क्रोल करते हुए बाहर जा ही रहा था | की तभी उसकी कान में किसी की जोर जोर से बजने वाली ताली की साउंड सुनाई दी तो वह रुक गया |    हाल में इस वक्त अजय खड़ा हो कर जोर जोर से ताली बजाते हुए त्रिहांश को गुस्से से देखा रहा था | त्रिहांश के चेहरे पर टेढ़ी मुस्कान आ गया | वह फोन को अपने जेब में रख कर बड़े ही रौबदार अंदाज में चल कर अजय के बेहद करीब आया  |     अजय बस अपने बिगड़े हुए बेटे को देख रहा था | जो उसके दुश्मनों से भी ज्यादा टॉक्सिक लग रहा था | त्रिहांश फिर उसे इग्नोर कर जा कर वही सोफे पर फसर कर बैठ गया |    वही विनोद और आरव लाचरी में कभी त्रिहांश को देखते तो कभी अजय को | तभी वहा वेदिका और दिया भी आए | क्यों की वह दोनो किचन में ही रुक कर अजय और त्रिहांश को देख रहे थे | जब उन्हें ठीक नही लगा तो वह दोनो आ गए थे क्यों की हाल का माहौल बिलकुल सन्नाटा भरा था जैसे कुछ अनहोनी होने की अंदेशा हो |       अजय गुस्से से त्रिहांश पर बिपरते हुए बोला,""_ नितिन और उसकी बेटी कहा है त्रिहांश...? "      अजय का इतना पूछना ही था की त्रिहांश बेहद खतरनाक तरीके से जोर जोर से हंसने लगा | उसकी हंसी इस वक्त पूरे हाल में भयानक तरीके से गूंजने लगा था | त्रिहांश का हंसना किसी की भी रूह कांपने पर मजबूत कर सकता था |       दूसरी तरफ.....           राठौड़ निवास के सामने अर्यांश का कार आ कर रुक गया | अर्यांश के चेहरे पर इस वक्त छोटी सी स्माइल थी क्यों कि उसे बार बार उर्मी को किस करना याद आ रहा था | भले ही उर्मी ने उसके किस की साथ नही दिया था लेकिन उर्मी को चूमते ही पता नही क्यों उसके दिल में अजीब सा हलचल मच गया था | वह चाहता तो था की वह उर्मी के होंठो को जल्दी से रिहा कर देगा लेकिन हर बीतते पल के साथ उसे अजीब सा प्यास लगने लगा | वह उर्मी के होंठो का रस पीते हुए उसे चूमते गया था |   उफ्फ...!! कितना प्यार भर एहसास था यह,जो ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए अर्यांश को पागल बनाए जा रहे थे | वह ना चाहते हुए भी उर्मी और उससे किए हुए किस याद आ रहा था |f उसे तो यह भी ध्यान नही रहा था की वह कब घर पहुंचा है ?     आर्यांश कार तो रोक दिया था | लेकिन वह अभी कार से उतर कर अंदर जाने के मूड में ही नही लग रहा था | उर्मी को वह आज पहली बार देखा था और उस लड़की ने उसे कुछ ही मिनट में पागल कर रख दिया था |    " अगर खयालों में किसी को याद कर ऐसे शर्माना हो गया हो तो कार से बाहर आओगे ? "      उर्मी की यादों में खोए हुए आर्यांश के कान में जैसे ही उसके पापा सुधर्व की आवाज सुनाई दी तो वह हड़बड़ा गया |      वही सुधर्व कब से अर्यांश को देख रहा था | आर्यंश के चेहरे पर बनती बिगड़ती एक्सप्रेशन को देख कर उसे समझ आ गया था की उसका बेटा किसी की प्यार में पड़ा हो ? लेकिन कैसे ? यह उसे समझ नही आया था |    आर्यंश जल्दी से कार से बाहर आ कर सुधर्व से थोड़ा तड़बड़ाते हुए बोला,""_ आ आप कब यहां आए ? "     सुधर्व इस वक्त जल्दी में लग रहा था | तो वह अर्यांश को साइड में कर खुद अर्यांश के कार में चढ़ते हुए बोला ,""_ जब तुम किसी और के ख्यालों में गुम थे | "    बोलते हुए सुधर्व car स्टार्ट करने लगा | वही आर्याश हैरानी से बस सुधर्व को देख रहा था | उसे नही लगा था की सुधर्व इतनी देर तक उसे ही नोटिस कर रहा हो ? अर्यांश अपने सफाई में कुछ बोलना चाहा तो सुधर्व कार स्टार्ट करते हुए बोला,""_ तुम्हारी मां और बहन कब से तुम्हारे wait कर रहे है जा कर उनसे मिल लो | "   सुधार इतना बोल कर वहा से चला गया | वही अर्यांश अपने बालो को उंगलियों से फिराते हुए थोड़ी देर जाता हुआ सुधर्व को देखा फिर अपने आप को कोसते हुए अंदर चला गया |    हाल में .....       माया इस वक्त अपनी बेटी अहीरा से बाते कर रही थी | तभी उसकी नजर अर्यांश पर गई | जो उन दोनो के पास ही आ रहा था |     भाई.....!! अहीरा उठ कर उसके पास जाते हुए आर्यंश को आवाज लगाई | अर्यांश को देख कर उसके चेहरे पर अलग ही स्माइल नजर आ रहा था |    अहीरा जा कर अर्यांश के गले लग गई | वही माया अपने चेहरे पर मुस्कान लिए उन दोनो को देखने लगी | लेकिन अचानक से उसकी चेहरे पर उदासी छाई | और वह अपने मन में बड़बड़ाते हुए बोली,""_ काश मेरा वह अंश भी यहा होता ? मेरा तो कंप्लीट फैमिली होता !!    बोलते हुए उसकी नजर एक रूम के तरफ जाती है जहा उसने कोरियर में आई हुई एक लड़की की तस्वीर लगाया था |   वही अर्यांश आहिरा के सर पर हाथ फेरते हुए माया को देखा तो उसकी नज़र भी उस रूम पर गई | जहा इस वक्त माया देख रही थी | माया का देखना बहुत ही अजीब था | अर्यांश भी उस रूम के तरफ देखने लगा |To be continued........    माया का क्या सच है ? किस अंश के बारे में बात कर रही है ? त्रिहांस का क्या इरादा है अब ? वह कब तक राज्ञा को अपने मतलब के लिए अपने करीब रखेगा ? जानने के लिए पड़ते रहिए , "

Contents
Contents

Comments(0)

Join the discussion — sign in to leave a comment

Sign In to Comment

No comments yet. Be the first to share your thoughts!