Chapter 18 of 20

chapter 18

क्यूट कपल835 words~5 min read

                           माफ़ी चाहूँगी। भाग ज़रा देर से प्रकाशित करने के लिए। आपलोग पढ़ते हो पर बताते नहीं  की कहानी कैसी लग रही है। तहे दिल से गुज़ारिश है की कॉमेंट में  बताया करे की  आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।"वाह! दानियाल खान तुमने मुझे इम्प्रेस कर दिया।" उस अँधेरे और बड़े से शटर वाले गोदान में तालियों के साथ एक भारी भरकम आवाज़ गूंजी।दानियाल ने अपना फोन पीठ पीछे कर के इधर उधर नजरें दौड़ाना शुरू की। अँधेरे में कुछ भी देख पाना मुश्किल था। दानियाल अँधेरे में कोई मशक्क्त करता उससे पहले अँधेरे को  चीरती हुई एक लाइट जल उठी जो एक कुर्सी पर फोकस कर रही थी। दूर से दानियाल के लिए उस हाल में भी फिज़ा को पहचानना मुश्किल न था। बहेन कि बिखरी जुल्फें, चेहरे की उदासी और खौफ से सूखे होंठ  दानियाल को तड़पा गए। वो फिज़ा को देख उसकी तरफ दौड़ा पर अफ़सोस उसे अपनी बहन तक पहुंचने से पहले दो मुस्टंडों ने जकड़ लिया। उसे माहीन के भी वहाँ होने की उम्मीद थी। देखते ही देखते उस घनघोर अँधेरे में डुबी गोदान में जगह जगह लाइटें जलने लगी। इसके बवाजूद वहाँ कि मनहुसियत बरकरार थी। और माहीन के वहां होने की उमीद पर पानी फिर गया क्यों की माहीन का वहां कोई अता पता नहीं था।कफी हल्कि रौशनी में कदमो कि आहट के साथ साथ सिगार के धुएँ की महेक दानियाल को अपनी तरफ बढ़ते महसूस हो रहे  थे। पर अफ़सोस अंधेरे से उभरता अधेड़ उम्र चेहरा उसके लिए अनजान था। दानियाल हैरत और सांवलिया नज़रों से उसे देखने लगा। उसके मन में सवालों के तूफ़ान उमड़ रहे थे। वो कौन है ???उसने  माहीन और फिज़ा को अगवाह क्यों किया???  और बहुत कुछ ।"कैसे ...कैसे पहुंचे तुम यहाँ तक???" उस अधेड़ उम्र सख्श ने दानियाल को बेदार किया। उसके लहज़े में बेचैनी और हैरत थी।जवाब में  दानियाल ने पूछा "माहीन कहाँ है?" तुम कौन हो?  तुम्हें हम से क्या लेना देना. ..?एक के बाद देगर सवालों ने उस अधेड़ उम्र सख्श को बेशक़ गुस्सा दिला दिया था।उसने अपनी सिगार ज़मीन पर फेकी और पैरों से मसालता हुआ बोला"मै कौन हूँ? क्या तुमने मुझे नहीं पहचाना। मुझे लगा तुम्हें याद होगा दो साल पहले हुआ वो हादसा। जब तुम्हारी वजह से मुझे अपने एकलौते बेटे को अपने हाथों से क़त्ल करना पड़ा। तुम्हें क्या लगा मै तुम सब को छोड़ दूंगा।" उसके लहज़े में  बेटे को मरने का गम और दानियाल के लिए नफरत साफ थी।अधेड़ उम्र सख्श रॉबिन का बाप था। जिसने रॉबिन के गिरफ़्तारी की ख़बर  सुनते ही उसका क़त्ल करवा दिया था। उसे डर था कि कही रॉबिन अपनी रिहाई के लिए अपने बाप के काले करतूतों का चिट्ठा न खोल दे।"तुम्हारे बेटे ने क़त्ल किया था मेरी बहन का" दानियाल गुस्से से गुर्राया।दानियाल के ऊँचे लहज़े ने उसे पछतावे मे डाल दिया। रॉबिन के बाप ने माहीन को बुलवाया उसकी भी हाल फ़िज़ा से कम न थी।  हिम्मत बान्धे अपने रब से  दुआएँ करते करते उसके होंठ रूखे होगये  और गले में कांटे की चुभन महसूस कर रही थी। दानियाल के दीदार ने मानो उसके बेजान जिस्म में जान डाल दी हो। दोनों  ने सूकून की सांस ली।                         (अठारह घंटे पहले)माहीन और फ़िज़ा के लापता हुए करीब आठ से दस घंटे गुज़र चुके थे।खमोश माहौल में सिसकियों की आवाज़ थमने का नाम नहीं ले रही थी। फ़िरोज़ साहब और अहमद साहब बच्चों की लापता होने की खबर सुनते ही इंडिया पहुँचे थे। इंडिया आते ही उन्होंने उन्हें  ढूंढने की जीतोड़ कोसिस शुरु कर दी थी। फ़िरोज़ साहब ने अपने सारे बड़े लोगों से कांटेक्ट खंगाले दिए। पुलिस के साथऔर भी लोग उन्हें ढूंढने में लगे थे लेकिन अब तक कोई कामयाबी का इमकान न दिखा था।फोन कि रिंग बजी। दानियाल के ठंडे पड़ते वजूद ने उसे फोन उठाने की इजाज़त नहीं दी। नासिर ने उसका फ़ोन उठाया। शायद बात ज़रूरी थी वो फोन लेकर ज़रा परे चला गया।वो फोन नहीं दानियाल के तड़पते दिल को करार आने के लिए  अल्लाह की मदद थी।फोन ज्वेलरी शॉप से था। दानियाल ने फ़िज़ा और माहीन  के लिए पेडेंट बनाने का ऑर्डर दिया था। पर जो पेंडेंट दानियाल  को डिलीवर हुआ था वो सेम डिज़ाइन का कोई और पेंडेंट था।दरअसल वो पेंडेंट किसी ख़ुफ़िआ मकसद को अंजाम देने के लिए ट्रैकिंग डिवाइस लगा के बनाया गया था। जो गलती से दानियाल को मंगनी वाले दिन ही सुबह को डिलीवर हुआ था।लगे हाथ दानियाल ने फ़िज़ा और माहीन को दे दिया था की वो पहने।नासिर ने जब दानियाल को बताया तो मानो उसे एक उम्मीद सी मिली हो। उसने ओनर को कांटेक्ट किया और उन्हें ट्रैक करता वहां पहुँच गया था ।उसे सेफ्टी देने के लिए और किडनैपर को गिरफ़्तार करने की पुरी तैयारी के साथ पुलिस की टीम उसके पीछे पीछे थी।(आगे अगले पार्ट में)

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