Chapter 32: chapter 32

मुक्ति (The end)Words: 11871

 सच्चाई उजागरएक घंटे की ड्राइव के बाद, काले पोर्शे ने एक पांच सितारा होटल के सामने रुककर ठहराव लिया। ड्राइवर ने व्हीलचेयर निकालकर ट्रेसी को उसमें बिठाने में मदद की और फिर कार पार्क करने चला गया। ट्रेसी ने खुद व्हीलचेयर को धक्का देकर अंदर प्रवेश किया। दोनों ने नकाब पहन रखा था, और उन्होंने देखा कि पार्टी में और भी लोग नकाब में थे। उनकी नीली पोशाकें रात के आसमान में तारों की तरह चमक रही थीं, पार्टी की रोशनी में और भी खास नजर आ रही थीं।ट्रेसी ने अभी तक रुद्र की सूट पर ध्यान नहीं दिया था, क्योंकि उसका ध्यान प्रकाश पर था, जिसने वादा किया था कि वह पार्टी में आएगा। पार्टी में सभी ने रंग-बिरंगी पोशाकें पहनी हुई थीं, लेकिन वह नीले फूलों की डिजाइन वाली पोशाक, जो वह देखना चाह रही थी, कहीं नहीं दिखी। रुद्र वित्तीय निवेशकों के साथ सौदे में व्यस्त था, और उसकी सचिव के रूप में ट्रेसी ने सही ढंग से नोट्स लिए। कुछ समय बाद, थककर वह रुद्र से दूर हट गई और एक जगह बैठ गई।अचानक, एक हाथ उसे जूस का गिलास थमाता है। उसने जल्दी से जूस पी लिया और और मांगा। इस बार एक परिचित हाथ ने उसे गिलास दिया—वह प्रकाश था। जब उसे अहसास हुआ कि रुद्र ने उसे यह गिलास दिया था, तो उसने उसे गले लगा लिया और कहा, "मैं तुम्हें हर जगह ढूंढ रही थी! तुम इतने समय से गायब हो, और मैं उस बॉसी आदमी के साथ फंसी हुई हूं, जिसने मुझे रातभर काम करवाया।"रुद्र, जो प्रकाश बनने का दिखावा कर रहा था, मुस्कुराया और बोला, "तुम ठीक हो न? चलो डिनर कर लेते हैं, फिर मैं तुम्हें घर छोड़ दूंगा।" वह उसे व्हीलचेयर में डिनर टेबल तक ले गया, लेकिन जल्दबाजी में उसने खुद के लिए भी व्हीलचेयर ही चुनी, जो उसने पहले ही बैठने के लिए लिया था। ट्रेसी ने यह देखा और अचानक महसूस किया कि रुद्र वही नीला सूट पहने हुए था, जो उसने प्रकाश को उपहार में दिया था। उसे यह भी याद आया कि वह परफ्यूम, जो उसने कार में सूंघा था, वही था। उसके भीतर गुस्से की लहर उठी, लेकिन उसने चुप रहना बेहतर समझा और तय किया कि वह पार्टी के बाद उसे टोकेंगी।जैसे ही रुद्र ने अपना नकाब ठीक किया, ट्रेसी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने गुस्से में खाना शुरू किया और गलती से उसका गला फंस गया। घबराहट में उसने रुद्र के पास रखी व्हिस्की का गिलास उठा लिया और पी गई। रुद्र ने देखा कि ट्रेसी कहीं कोई तमाशा न कर दे, तो उसने ड्राइवर को तुरंत बुलाया और कहा कि उसे कार में बैठा दे, ताकि उसकी असलियत उजागर न हो। ड्राइवर ने तेजी से उसे कार में बिठाया और रुद्र का इंतजार करने लगा।जब रुद्र ने अपने व्यावसायिक सौदे पूरे कर लिए, तो उसने एक और बियर पी, आखिरी जाम किया और अपने व्हीलचेयर में तेजी से कार की ओर बढ़ गया। पार्टी में मौजूद सभी लोग उसकी अचानक विदाई से हैरान रह गए, लेकिन पार्टी आधी रात तक चलती रही। जब ट्रेसी की तबीयत बिगड़ने लगी, तो रुद्र उसे अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने आश्वासन दिया कि वह ठीक है, इसलिए वह उसे अपने घर ले आया।उस रात आसमान में तारे चमक रहे थे, जैसे अंधेरे में दिए गए वादों की तरह। रुद्र भी बहुत थक चुका था, इसलिए वह सोफे पर ही सो गया, जबकि ट्रेसी बिस्तर में लेटे-लेटे सपनों में रुद्र को डांट रही थी। उसकी ये मासूम नाराजगी देख रुद्र मुस्कुराया और गहरी नींद में चला गया।जब सुबह हुई, ट्रेसी एक आरामदायक बिस्तर में जागी और उसने खुद को अनजान माहौल में पाया। रुद्र की नौकरानी ने उसे कॉफी दी और कहा कि वह नहा-धोकर नाश्ते के लिए आए। उसने ट्रेसी को नए कपड़े भी दिए। उलझन में ट्रेसी ने पूछा, "मैं कहां हूं? यह किसका घर है?"नौकरानी ने जवाब दिया, "सर रुद्र आपको रात में यहां लेकर आए थे। आप काफी नशे में थीं और चल नहीं पा रही थीं।" ट्रेसी चौक गई। "वो अभी कहां हैं?""सर ऊपर तैयार हो रहे हैं। आप यहां बाथरूम का इस्तेमाल कर सकती हैं।"ट्रेसी बाथरूम में गई, जो एक शानदार रेन शॉवर और हेयर ड्रायर से सुसज्जित था। जब उसने अपने बाल सुखाए, तो शीशे में खुद को देखा और रात की सारी बातें याद करने लगी। उसे याद आया कि आज शनिवार है, वही दिन जब प्रकाश ने उसे बाहर ले जाने का वादा किया था, और वह यहां फंस गई थी। उसे वह नीला कोट भी याद आया, जो उसने प्रकाश को दिया था, और अब सब कुछ स्पष्ट हो गया।उसका गुस्सा फिर से भड़क उठा, लेकिन उसने खुद को काबू में रखा। जब वह ताजे कपड़े पहनकर बाहर आई—काले स्कर्ट और सफेद टॉप में—तो उसने देखा कि उसका पर्स और वह नीला कोट अलमारी में रखा हुआ था। अब उसकी शंका पूरी तरह से पुख्ता हो चुकी थी। वह खाना खाते हुए भीतर ही भीतर गुस्से में उबल रही थी, लेकिन कुछ नहीं बोली। नौकरी खोने के डर से वह रुद्र से भिड़ नहीं सकती थी।रुद्र ने उसकी परेशानी को महसूस किया और खुद पर पछताया कि उसने पहले सच क्यों नहीं बताया। उसे एहसास हुआ कि अब सब कुछ स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि उनके जीवन आपस में इस कदर जुड़े हुए थे कि वे बिना सच्चाई के शांति और समृद्धि नहीं पा सकते थे।अपनी हिम्मत जुटाकर रुद्र ने कहा, "तुम इस ड्रेस में बहुत सुंदर लग रही हो। चलो आज बाहर चलते हैं, जैसा मैंने वादा किया था। मैं तुम्हें सब कुछ समझाना चाहता हूं।"वह अभी भी अपनी व्हीलचेयर में बैठा था और नकाब पहने था, उसकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा था। लेकिन ट्रेसी ने उसे अनदेखा कर दिया, गुस्से में कुछ नहीं बोली। जब नौकरानी सब्जी लेने के लिए बाहर गई, तो रुद्र अचानक अपनी व्हीलचेयर से उठ खड़ा हुआ और ट्रेसी को अपने पास खींच लिया, जिससे वह चौंक गई। आगे क्या होगा? क्या ये दोनों कभी अपनी गलतफहमियां दूर कर पाएंगे?