Chapter 42 of 59

chapter 42

Billionaire's Dark Desire2,997 words~15 min read

   अब आगे ....,    पुश्तैनी हवेली....      " आसान हो या मुश्किल ...हमे हमारे बच्ची चाहिए मतलब चाहिए बाबा सा....!!! " उस बूढ़े आदमी की बात को बीच में ही काटते हुए माया गुस्से से बोली |      माया की बात सुन कर वह बूढ़ा आदमी और सुधर्व एक टक माया को देखने लगे थे | वही माया का चेहरा गुस्से से भरा हुआ था और यह गुस्सा सिर्फ और सिर्फ त्रिहांश के लिए था |        वह बूढ़ा आदमी अपने जगह से उठ कर माया के बेहद करीब आ कर उससे बिल्कुल उसी के लहजे में कहा,""_ भुलो मत सालों पहले गलती तुमने ही की थी ...तुम्हारी उस गलती की नतीजा है यह सब....... उस लड़के को तुमने ही तो ऐसा बनाया था और अब उससे अपनी अमानत लेना है उसके रास्ते में चलना होगा.....| "     माया और सुधर्व एक टक हैरानी से उस बूढ़े आदमी को देखने लगे, वह आदमी जो कह रहा था वह उन्हें पूरा समझ ही नही आया था |    माया ने कहा ,""_ क्या मतलब ? "    उस बूढ़े आदमी की होंठो मुड़ गए | वह अपने स्टिक के सहारे वापस जा कर सोफे पर बैठ गया | माया उसे ही उसके जवाब का इंतजार करते हुए देख रही थी |      तभी वहा एक सर्वेंट आ कर उस बूढ़े आदमी के कान में कुछ कहा तो उस बूढ़े आदमी की नजर door के तरफ गई |      सामने इस वक्त अजय,विनोद ,वेदिका,अराव,वेदिका,दिया,उर्मी,इशा और इशान सब खड़े थे |   इशा और उर्मी को कुछ समझ नहीं आया था की वह यहां क्यों आए है ? और उन्हे जानने का भी कोई इंटरेस्ट नहीं था तो पूरे महल को देखते हुए आगे बड़े | वही बाकी सबकी नजर  कभी उस बढ़े आदमी पर जाती तो कभी माया और सुधर्व पर .....|     लेकिन वही माया की नजर उन पर ही था लेकिन वह अपनी बेटी रव्या को ढूंढ रहे थे जो उनके बीच नही थी | माया गुस्से से उनके पास जाने को हुई की तभी सुधर्व ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया |   त्रिहांश का विला .....        त्रिहांश अपने लैपटॉप में कुछ काम करते हुए बैठा था | उसका चेहरा बेहद सीरीयस लग रहा था | तभी वाशरूम का door खुला | त्रिहांश ने अपना सर ऊपर कर देखा, राज्ञा अपने पेट पकड़ कर बाहर आ रही थी | और उसके चेहरे पर हल्के दर्द का भाव नजर आ रहा था |     त्रिहांश उठ कर उसके पास गया | राज्ञा उसे एक नजर देखी फिर उसके बाहों में लिपटते हुए बोली,""_ त्रिहांश मुझे बहुत weak फील हो रहा है....मुझे भूख भी लगी है लेकिन कुछ भी खाने का मन नही है | "     राज्ञा की बात सुन त्रिहांश उसे अपने गोद में उठा कर बेड के पास गया | फिर उसे बेड पर बैठा कर उसे स्वेटर से कवर करते हुए कहा,""_ मैने डॉक्टर को कॉल किया है वह आते ही होंगे ....तुम यह बताओ तुम्हे क्या खाना है ? "      राज्ञा थोड़ी देर सोची लेकिन उसे कुछ भी नही सूझा | वही त्रिहांश को समझ आ रहा था की उसकी बीवी को मूड स्विंग हो रहे है | वह अपने फोन में किसी को मैसेज कर फोन को साइड में फेंका फिर राज्ञा के करीब बैठने को हुआ लेकिन तभी राज्ञा उठते हुए बोली,""_ मैं उर्मी और इशा से मिल कर आती हु अब तक वह लोग आ भी गए होंगे ? "        त्रिहांश के चेहरे के हाव भाव बदल गए | वह बिना भाव के उसे देखते हुए बोला,""_ वह लोग मानली आ गए होंगे लेकिन वह सब यहा नही रुक सकते | "    राज्ञा रुक कर ना समझी में त्रिहांश को देखने लगी थी | वह फिर उससे पूछी,""_ लेकिन क्यों त्रिहांश ....?   " क्योंकि मैं चाहता हूं | " बोलते हुए त्रिहांश गुस्से से जा कर सोफे पर बैठ गया | राज्ञा उसे ना समझी मैं देख रही थी, वह उसे कभी समझ ही नहीं आता था | वह बेहद कॉम्प्लिकेटेड और हद से ज्यादा दिमाग खिसका हुआ इंसान था |    राज्ञा का चेहरा एक दम उदास हो गया, उसे लगा था कि उसके साथ यहां ईशान ,ईशा और उर्मी होंगे और उनके साथ वह पुरे मनाली घूमेगी लेकिन अब उसे हर वक्त त्रिहांश के साथ ही रहना पड़ेगा बिल्कुल उसके हिसाब से..... राज्ञा का मुंह बन गया |        सोफे पर बैठे हुए त्रिहांश की नजर राज्ञा पर ही था जो  मूह बनते हुए किसी सोच में डूबी हुई लग रही थी | राज्ञा की चेहरे के एक्सप्रेशंस देख कर त्रिहांश को अंदाज़ हो गया था कि उसकी बीवी अपने मन में उसका ही बुराई कर रही है |    मुझे कोसने से कुछ नही होगा lovey..,,!! " त्रिहांश अपने लैपटॉप में काम करते हुए राज्ञा से कहा | वही त्रिहांश के मुंह से lovey नाम सुन राज्ञा उसे ही ना समझी में देखने लगी | जब भी वह यह नाम सुनती उसे ऐसे लगता था की उसे ही इस नाम से बुलाते है और यह किसी और का नही उसका ही नाम है |      राज्ञा त्रिहांश के पास जाते हुए पूछी,""_ lovey.... यह किसका नाम है त्रिहांश ? आप और सुधर्व राठौड़ इस नाम को ऐसे क्यों बुलाते है जैसे यह नाम मेरा ही है और मुझे ही बुला रहे है | "   राज्ञा की मुंह से सुधर्व की नाम सुन त्रिहांश का औरा साख हो गया था | वह गुस्से से राज्ञा का बाजू पकड़ कर अपने तरफ खींचते हुए बोला,""_सुधर्व राठौड़ के बारे में तुम्हे कैसे पता चला ? "    राज्ञा थोड़ी देर चुप हो गई | फिर वह अपना बाजू उससे छूडवाते हुए बोली,""_ मैने google की तो .... ? "      राज्ञा इतना बोल कर त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश उसे खा जाने वाली नज़रों से देखने लगा था | वह फिर अपना सर झुका कर बोली,""_ उर्मी ने कहा था की वह अर्यांश राठौड़ से प्यार करती है तो मैंने आर्यांश नाम सर्च किया तो ......!! "   त्रिहांश का जबड़ा सख्त हुआ | वह अपने मन में गुस्से से बड़बड़ाते हुए बोला,""_ कभी इशान तो कभी उर्मी....माया राठौड़ का पूरी जिन्दगी हम अग्निहोत्री से निपटाने में ही गुज़र जाएगा | "      तभी रूम का door knock हुआ | त्रिहांश ने कहा,""_ come in ...| "    रूम का door खुला | और समर एक लेडी डाक्टर के साथ रूम में आया |     वही त्रिहांश राज्ञा को ले कर बेड के पास आया | राज्ञा फिर लेट गई | वही डाक्टर राज्ञा को चेक करने लगी | पीरियड्स के वजह से ही राज्ञा को वीकनेस हो रही थी | डॉक्टर को यही बताते हुए राज्ञा के लिए दवाई लिख कर,उसे दे कर चली गई |     उसके पीछे ही समर जाने को हुआ लेकिन उसे त्रिहांश को कुछ अपडेट देना तो वह रुक कर त्रिहांश को देखा | त्रिहांश की नजर राज्ञा पर था और वह राज्ञा के करीब बढ़ने लगा की तभी राज्ञा उसे समर की तरफ इशारा की |       " बॉस....!! " समर ने आवाज लगाया तो त्रिहांश अपना सर घुमा कर उसे देखा | फिर वह राज्ञा को देख सख्ती से बोला,""_ तुम रेस्ट करो मैं आता हूं | "     त्रिहांश ,समर के साथ रूम से बाहर चला गया | वही उसके जाते ही राज्ञा ने उर्मी को कॉल लगाया |     पुश्तैनी हवेली .....            वह बूढ़ा आदमी चुपचाप उन दोनो परिवार को देख रहा था जो अब एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए थे | उस बूढ़े आदमी का नाम धीरांश था |      धीरंश की नजर त्रिहांश को तलाश रही थी | लेकिन उस आदमी को ना आया देख उसके होंठो पर बेहद तिरछी स्माइल आ गई थी |वह अपने जगह से उठ कर एक नजर वेदिका को देखा ,फिर अपने रूम के तरफ चल पड़ा |    वेदिका की चेहरे पर बेचैनी के साथ डर भी था | और इसकी वजह उसका बेटा था ....उसके डिजायर का था | माया वेदिका के पास जा कर गुस्से से राज्ञा के बारे में पूछी,""_ मेरी रव्या कहा है वेदिका ?      इशान की आइब्रोज सिकुड़ गए थे | वह ना समझी में माया को देखते हुए अपने मन में बोला,""_ रव्या... रव्या दी के बारे में यह बड़ी मां से क्यों पूछ रहे है ? "   माया की सवाल सुन कर वेदिका ने कहा,""_ त्रिहांश उसे ले कर अभी आता ही होगा दी ...!!! "       वेदिका और पूरा घरवाले को इतना ही पता की त्रिहांश राज्ञा को ले कर मनाली ही आया है लेकिन वह हवेली ना आ कर कहीं और रुका है यह उन्हे अभी तक नहीं पता था |    तभी सुधर्व अजय को गुस्से से घूरते हुए उसके पास आया ,फिर माया को ले कर रूम के तरफ चल पड़ा | सुधर्व को देख कर अजय के चेहरा भी गुस्से से भरा था वह रूम के तरफ चला गया |       वही विनोद धीरांश के पास गया | तभी इशान वेदिका के करीब जा कर धीमी आवाज में पूछा,""_ बड़ी मां...आंटी आपसे रव्या दी के बारे में क्यों पूछ रही है ? रव्या दी तो.....| "   " त्रिहांश के साथ है | " इशान अपने सवाल को पूरा करता उससे पहले ही वेदिका ने उसे जवाब दिया | इशान उसे बस हैरानी से देखने लगा की तभी वेदिका ने कहा,""_ राज्ञा ही रव्या है इशान |     इतना बोल कर  वेदिका रूम के तरफ चल पड़ी | और वही वेदिका की बात इशान की आंखे हैरानी से बड़ी हो गई थी |     त्रिहांश का विला....       "  बॉस...मलहोत्रा फैमिली भी मनाली आई हुई है | " रेलिंग को टिक कर सिगरेट का कश ले रहे त्रिहांश को देख समर ने कहा |     समर की बात सुन त्रिहांश का पकड़ रेलिंग में कस गया | वही समर और भी अपडेट्स देते हुए त्रिहांश से कहा ,""_ गौतम खुराना के मरने के बाद उसकी वाइफ और मानव दोनो ही वापस मुंबई लौटे है |    यह सुन त्रिहांश ने कुछ नही कहा | लेकिन समर को वहा से जाने का इशारा किया तो वह चला गया |  त्रिहांश सिगरेट का लंबे लंबे कश भरते हुए कुछ देर ,दुर तक अपने नज़रे गड़ाए वही खड़ा रहा |     थोड़ी देर बाद वह त्रिहांश रूम में गया | राज्ञा बैठे बैठे ही सो गई थी | त्रिहांश उसे देखते हुए उसके बेहद करीब आ कर बैठ गया |        त्रिहांश का औरा बेहद सख्त था लेकिन राज्ञा की मासूम सा चेहरा देख वह थोड़ा नरम पड़ गया था | वह धीरे से राज्ञा के करीब जा कर उसके गोद में अपना सर रख कर लेट गया |    राज्ञा ज्यादा गहरी नींद में नही थी | अपने चेहरे पर किसी की गरम सांसे और अपने गोद में कुछ भारी सा मेहसूस होते ही वह आपने आंखे खोल कर देखी |      त्रिहांश ने अपने आंखे बंद कर रखा था | लेकिन उसे एहसास हो चुका था की उसने राज्ञा को जगा दिया है | वह अपने आंखे खोल कर राज्ञा को देखा |    राज्ञा अपनी आंखे टिमटिमाते हुए उसे ही देख रही थी | यह देख त्रिहांश उसके दोनो हाथो को अपने हाथ में फसा कर उसे थोड़ा अपने करीब खींचा तो राज्ञा की चेहरा त्रिहांश के चेहरे के बेहद करीब झुक गया |      वही राज्ञा उसके हाथो से अपने हाथ छुड़वा कर उसके दोनो गालों को छूते हुए थोड़ा और झुक कर त्रिहांश के माथे पर किस कर गई | राज्ञा का किस फील करते ही त्रिहांश के आंखे सुकून से बंद हो गए |      राज्ञा फिर उसके बालो में उंगली फिराते हुए त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश उसे ही बिना भाव के देख रहा था | तभी राज्ञा उसे कुछ पूछने को हुई की तभी त्रिहांश उसके हथेली को हल्के से दबाते हुए थोड़ा सख्ती से पूछा ,""_ कोई सवाल नही राज्ञा !!  "   राज्ञा का मुंह बन गया | वह उससे नज़रे हटा कर बड़बड़ाते हुए बोली,""_ जवाब तो इनसे दिया नही जाता कम से कम सवाल ही सुन लेते ...? खडूस..| "       त्रिहांश अपने आंखे छोटी कर उसे ही घूर कर देख रहा था | वह फिर उठ कर उसे बेहद कोल्ड लुक देते हुए देखने लगा | राज्ञा भी उसे ही देख रही थी लेकिन त्रिहांश का चेहरे पर कोल्ड एक्सप्रेशन देख कर उसने अपना सर नीचे झुका लिया |      तभी त्रिहांश ने कहा,""_ क्या पूछना था तुम्हे ? "    राज्ञा अपना सर कर उसे देखती की तभी त्रिहांश उसे बेड पर लिटा कर उसके ऊपर आ गया | राज्ञा को कुछ समझ नही आया था | वह हैरानी से उसे देखने लगी |    वही त्रिहांश उसके होंठो को हल्के से काटते हुए बोला,""_ अब तुम बता रही हो या फिर में कुछ और करु ? "     बोलते हुए त्रिहांश उसके कमर को सहलाते हुए राज्ञा के अंदर अजीब सा सनसनाहट पैदा करने लगा | राज्ञा की पकड़ त्रिहांश के बाजू में कस गए थे | वह हल्के से सिहरते हुए बोली,""_मैं....मुझे आपसे बहुत कुछ जानना है ? "    त्रिहांश रुक कर उसे ना समझी में देखने लगा | वही राज्ञा उसके गले में अपने दोनो बाहें डाल कर उसके आंखो में देखते हुए पूछी ,""_ आपको मेरे ही जिस्म को छुने की डिजायर क्यों है त्रिहांश ? क्यों आपको मुझसे नही बस मेरे जिस्म से मतलब है ? आपका राज़ क्या है त्रिहांश ? क्या है आप ? "        त्रिहांश की गहरी काली आंखे बिलकुल बेजान से लग रहे  थे | और वह बिना भाव के बस राज्ञा को देख रहा था | राज्ञा की हर एक सवाल का उसके पास जवाब था लेकिन वह अभी उसे बताना नही चाहता था |          त्रिहांश बिना कुछ कहे राज्ञा के लटो के साथ खेलने लगा | वही त्रिहांश को इस तरह अपने सवालों को इग्नोर करता देख राज्ञा का मुंह बन गया था लेकिन उसके दिल में भी बहुत कुछ चल रहा था | वह अब हर हाल में त्रिहांश के हर एक राज़ को जानना चाहती थी लेकिन उसे बिना त्रिहांश के नजरों में आए ही यह करना था | जिसके लिए उसे डर भी लग रहा था |        राज्ञा एक टक त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश का हैंडसम सा चेहरा किसी को भी अट्रैक्ट कर सकता था , राज्ञा तो उससे चाह कर भी नजरे नही हटा पा रही थी और इस वक्त तो त्रिहांश के माथे पर बिखरे हुए बाल उसके चार्मिंग लुक को और अट्रैक्ट बना रहा था | राज्ञा का मन उसे चूमने को हुआ |          राज्ञा धीरे से उसके माथे पर बिगड़े हुए बालो में उंगलियां फिराने लगी | वही त्रिहांश रुक कर राज्ञा की आंखो में देखने लगा | राज्ञा की खूबसूरत सी नयन इस वक्त बेहिसाब सा मोहब्बत लिए बस त्रिहांश को देख रहे थे | वह धीरे त्रिहांश के चेहरे को अपने हाथो में भर कर उसके माथे पर किस कि |     त्रिहांश बस उसे बिना भाव के उसे देख रह था | वही राज्ञा अपने आंखे बंद कर त्रिहांश के गालों पर भारी भारी से किस करते हुए बोली,""_ i love you त्रिहांश...| "    त्रिहांश अपने थूक निंगलते हुए उसे ही देख रहा था | वही राज्ञा अपने होंठो को त्रिहांश के पूरे चेहरे पर चलाते हुए उसके होंठो तक आ गई |  त्रिहांश चुपचाप उसके किस को फील करते हुए उसे देख रहा था | वही राज्ञा धीरे से त्रिहांश के होंठो को अपने अंगूठे से सहलाते हुए अपने होंठो को उसके होंठो के करीब ले जा कर त्रिहांश को देखी,त्रिहांश के आंखो में अब नशा सा उतर आया था | और उसके हाथ में राज्ञा के गाल को सहलाने लगे थे |    राज्ञा उसके आंखो में देखते हुए उसके होंठो पर अपना होंठ रख कर किस करने लगी | त्रिहांश उसकी हरकत की वजह से पागल होते जा रहा था | वह फिर राज्ञा की किस को रिस्पॉन्स देना चाहा लेकिन राज्ञा ने जल्दी से त्रिहांश के होंठो को रिहा कर उसके सीने में अपना चेहरा छुपा ली | उसे अब शर्म आने लगा था |     यह देख त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह झुक कर उसके माथे पर किस करा तो राज्ञा ने धीमी स्वर में उसका नाम लिया ,""_ त्रिहांश......|    Hmmm....!!! त्रिहांश राज्ञा को लिए ही पलट गया ,जिससे राज्ञा त्रिहांश के ऊपर आ गई | वही त्रिहांश उसके सर को अपने सीने पर टिका कर उसके गाल को सहलाने लगा |      राज्ञा की चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गई थी | भले ही त्रिहांश उससे प्यार नही करता होगा लेकिन वह उसका केयर भी करता था और उसे हर खतरे से बचा भी लेता था |     राज्ञा उसे कसके पकड़ कर उसके ऊपर ही लेटी रही | थोड़ी ही देर में राज्ञा गहरी नींद में चली गई | जब त्रिहांश को अपने सीने पर उसकी गरम सांसे मेहसूस हुई वह राज्ञा को आराम से अपने बगल में लेटाया |    To be continued.......           Â

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