Chapter 3: chapter 3

Billionaire's Dark DesireWords: 38349

  खुराना निवास .......     राज्ञा रेडी हो कर बाहर आई | उसके रूम के बाहर ही इस वक्त गौरव,वानी और 25 साल का एक लड़का जो राज्ञा का बड़ा भाई मानव था वह उनके साथ खड़ा था |     उन तीनों को अपने रूम के बाहर देख कर राज्ञा बोली,""_ क्या हुआ आप तीनों.....? "      राज्ञा अभी बोल ही रही थी की गौरव ने उस पर चिल्लाते हुए बोला,""_ कर लिया आराम की नींद ? अब कुछ काम का चीज़ भी करोगी ? "    गौरव की बात सुन राज्ञा वानी और मानव को देखी जो उसके लिए बुरा फील तो जरूर कर रहे थे लेकिन उसके लिए स्टैंड नही ले रहे थे | राज्ञा ने एक गहरी सांस लिया फिर अपने पापा गौरव से बोली,""_ शादी पहले मंदिर में होगी फिर कोर्ट में...आप सब सीधे कोर्ट पहुंच जाइएगा | "        राज्ञा इतना बोल कर घर से बाहर निकल गई | वही वानी बस जाता हुआ राज्ञा को देख रही थी | वह फिर गौरव से बोली,""_ गौरव मैं भी मंदिर.....| "    " कोई जरूरत नहीं है वानी ,चलो हम कोर्ट चलते है | " गौरव वानी कि बात को बीच में ही रोक कर कहता है तो वानी लाचारी में कभी मानव को देखती तो कभी गौरव को | वही गौरव उसे आगे कुछ भी कहने का मौका दिए बगैर ही उसे ले कर घर से बहार चला गया |     मन्दिर में.......       मंदिर के सामने एक ऑटो आ कर रुक गई | ऑटो से राज्ञा बहार आ कर ऑटो वाले को बिल देने को हुई की तभी उसकी कान में चिराग की आवाज सुनाई दी |    "  राज्ञा.....!!!! "     राज्ञा अपना सर ऊपर कर चिराग को देखी जो मंदिर के सीढियों के पास खड़ा था | राज्ञा को वह जल्दी जल्दी आने को कह रहा था | राज्ञा ने अपना सर हा में हिलाया फिर जल्दी से ऑटो वालो को बिल दे कर मंदिर में जाने लगी |         राज्ञा की कदम बहुत ही धीमी धीमी से आगे बढ़ रहे थे क्यों की आज उसके जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था l वह शादी के बंधन में बंध रही थी और हर लड़की को यह दिन बहुत ही खास होता है लेकिन इस शादी में राज्ञा की कोई मर्जी नही थी लेकिन हा इसे मजबूरी का शादी कह सकते थे |      राज्ञा को इस तरह धीरे धीरे चलता देख चिराग जल्दी से नीचे आया फिर राज्ञा का हाथ पकड़ कर उसे जल्दी जल्दी से ऊपर ले जाते हुए बोला,""_ जल्दी करो राज्ञा हमे कोर्ट भी जाना है | "         चिराग जल्दी से राज्ञा को ले कर मंदिर में गया | मंदिर में पहले से ही चिराग की फैमिली और उसके दोस्त खड़े थे | राज्ञा उन सबको एक नज़र देखी फिर आस पास किसी को ढूंढने लगी तभी चिराग बोला,""_ तुम्हारी दोस्त राशी,पंडित के बताए हुए कुछ चीज़े लाने गई है आ जाएगी | "     राज्ञा ने बस हा में सर हिला दिया | तभी चिराग की मां रमा राज्ञा के तरफ एक बड़ा सा थाल बढ़ाते हुए बोली,""_ जा कर जल्दी से चेंज कर आओ | "   राज्ञा एक टक थाल को देखने लगी थी | जिसमे शादी की साड़ी, चूड़ियां, गहने सब रखा गया था | राज्ञा थाली ले कर जाने को हुई की तभी उसके पास उसकी दोस्त राशि आई |      राशि ने एक नज़र राज्ञा की चेहरा देखा फिर उसके हाथ से थाल ले कर ,उसे मंदिर में बनाए हुए एक रूम में ले गई | वही उन दोनो को देखते हुए रमा चिराग के पास आ कर बोली,""_ बहुत अच्छी लड़की ढूंढा है तुमने चिराग,इससे हमारा काम हो जाएगा | "     चिराग टेढ़ी स्माइल करते हुए एक नज़र राज्ञा और राशि को जाता हुआ देख फिर जा कर मंडप मैं बैठ गया |       वही रूम में आते ही राज्ञा कसके राशि के गले लग कर रोने लग गई | वही राशि की भी आंखे नम थे क्यों की राज्ञा का क्या हालत है उसे अच्छे से पता था | राशि बोली,""_ चिंता मत कर राज्ञा बस कुछ दिन की बात है उसके बाद तुम ....!!! "    " वह लौट आया है राशु | " राज्ञा रोते हुए बोली तो राशि की हैरानी से आंखे चौड़ी हो गई | वह थोड़ा अटकते हुए बोली,""_ त्रि...त्रिहांश अग्निहोत्री ? "   राज्ञा रोते हुए हा में सर हिलाई तो राशि थोड़ी देर चुप रही | फिर वह बोली,""_ फिर वह इस शादी को रोक देगा राज्ञा| "  बोलते हुए राशि की आंखो में अजीब सी उम्मीद का भाव नज़र आ रहा था ऐसा बिलकुल नहीं था की राशि को त्रिहांश राज्ञा के लिए सही लगता है |,वह बस इतना चाहती थी की राज्ञा चिराग से शादी ना करें बस किसी भी तरह से यह शादी रुक जाए |      तभी राज्ञा बोली,""_ नही राशू,उसे इस शादी से कोई एतराज़ नहीं,वैसे होगा भी क्यों? उसे सिर्फ मेरे जिस्म से मतलब है ? वह कल मेरे पास आया सोया और चला गया that's it | "   दर्द भरी मुस्कान लिए हुए राज्ञा ने इतना कहा फिर थाल में रखे हुए साड़ी को ले कर पहनने लगी |     " क्या कल रात तुम दोनो के बीच ...? " राशि हैरानी से राज्ञा को पूछी तो राज्ञा एक दर्द भरी गुंट घटकते हुए बोली,""_कल उसने मुझे हर जगह छुआ है राशु,मेरे जिस्म के हर एक हिस्से को देखा और छुआ ,अब कोई पर्दा ही नही रहा | ,""_   बोलते हुए राज्ञा की आंखे नम हो गए वह जल्दी से अपने आंसू पोछ कर साड़ी के प्लेट्स बनाने लगी तो राशि ने फिर पूछा ,""_ मतलब तुम दोनो के बीच वह सब कुछ .....!!! "     राज्ञा ने अपना सर ना में हिलाया | राशि को समझ नही आया ,वह वह उसे सवालिया नजरों से देखने लगी | वही राज्ञा बोली,""_ वह बस मुझे छूना चाहता था और छु लिया ,कल रात उसने सिर्फ मुझे छूने का अपना desire पूरा किया है राशु इससे ज्यादा कुछ नही हुआ | "   राशि को राज्ञा की बात समझ नही आ रही थी वह अपना मुंह खोल कर बस उसे देख रही थी |      राज्ञा कह रही थी की त्रिहांश ने उसे छुआ लेकिन वह सब कुछ नही किया जो राशि समझ रही थी | राशि थोड़ा इरिटेट होते हुए राज्ञा से फिर पूछी,""_  क्या बोल रही हो तुम ? वह छु तो गया लेकिन कुछ नही किया ? क्या मतलब है इसका राज्ञा ? "      राज्ञा ने एक गहरी सांस लिया फिर उसके गाल पर हाथ रख कर धीमी आवाज में बोली,""_ जाने दो राशु,मेरे साथ जो होना है वह हो कर रहेगा कुछ भी मेरे बस में नही है जाने दे | "    राज्ञा ने इतना कहा फिर अपने हाथो में चूड़ियां पहनने लगी | वही राशि थोड़ी देर उसे देखी फिर उसे तयार करने लगी |     दूसरी तरफ....,      कार के पैसेंजर सीट पर बैठे हुए त्रिहान्श अपने आंखे बंद कर अपने माथे को रब कर रहा था उसका चेहरा बेहद गुस्से से भरा था और उसके हाथ गुस्से से हल्के से कांप भी रहा था | तभी उसका फोन बजने लगा | उसने जल्दी से कॉल पिक किया तो उधर से उसका असिस्टेंट बोला,""_ बॉस ,राज्ञा खुराना की शादी शहर के पुराने मंदिर में हो रही है | "      त्रिहांश ने ड्राइवर को पुराने मंदिर जाने का इशारा कर अपने असिस्टेंट से बोला,""_  Court जाओ,और ध्यान रखना की शादी की कोई कागजाज नही बनना चाहिए | "   त्रिहांश इतना बोल कर कॉल काटा | उसका कार इस वक्त हाव को चीरते हुए आगे बढ़ रही थी क्यों की त्रिहांश को शादी होने से पहले ही राज्ञा तक पहुंचना था |        मन्दिर में .....     राज्ञा ready हो कर राशि के साथ बाहर आई | वही चिराग मंडप में बैठ कर पंडित जो कह रहा था वह करते हुए शादी के विधि विधान पूरा कर रहा था |   "  कन्या को बुलाइए..!!! " पंडित ने जैसे ही यह कहा चिराग और उसकी मां रमा राज्ञा को देखने लगे | लाल कलर की साड़ी में राज्ञा इस वक्त बला की खूबसूरत लग रही थी लेकिन उसकी चेहरे पर खुशी का कोई भाव नही था उसका चेहरा भी एक दम से मुरझा हुआ था |       राशि राज्ञा को चिराग के बगल में बैठा कर पीछे हट गई | राज्ञा ने एक नज़र चिराग को देखी जो स्माइल करते हुए उसे ही देखे जा रहा था |      राज्ञा ने फिर उससे नजरे हटा ली | तभी पंडित बोला,""_ कन्यादान करने के लिए वधु के मां बाप आगे आ जाए | "    राज्ञा की चेहरे पर व्यंग भरी मुस्कान आ गई | उसके मां बाप थे और शादी के खबर से वह लोग अंजान भी नही थे फिर भी वह वहा शामिल नहीं हुए थे | या यू कहे की उसकी शादी में आना जरूरी नही  समझे |    रमा बोली,""_ राज्ञा बेटा तुम्हारे मां बाप कहा है ? "     राज्ञा ने उन्हें एक नज़र देखा फिर राशि को देखी | राशि को समझ आ गया था की राज्ञा उसे क्यों देख रही है | वह रमा से बोलीं,""_ अचानक से मंदिर में शादी करने का फैसला किया तो राज्ञा की मां बाप आ नही पाए ,वह लोग सीधे कोर्ट आ जायेंगे | "    राशि की बात सुन रमा ने आगे कुछ नही कहा | तभी पंडित  राशि से बोला,""_ कोई नही बच्चा आप ही करदो कन्यादान | "       राशि ने हा में सर हिला कर सामने आई | फिर वह झुक कर राज्ञा की साड़ी की पल्लू  उठाने को हुई की तभी वहा फायरिंग होने की आवाज गूंजने लगी |     अचानक से ऐसा होने से सब हड़बड़ा गए | वही राज्ञा को भी कुछ समझ नही आया था | वह राशि को सवालिया नजरों से देखने लगी उसे ऐसा लग रहा था की वहा त्रिहांश ही आया हुआ है | तभी राशि आगे जा कर देखी तो उसकी आंखे चमक उठी | वह फिर राज्ञा के पास आ कर धीरे से बोलीं,""_ वह आ गया | "    " क्या ....? " राज्ञा हैरानी से राशि को देख पूछी फिर वह टेंशन से सामने देखती तो उसकी सांसे एक दम से अटक गए |     वही चिराग़,उसकी मां रमा ,चिराग का पूरा फैमिली और दोस्त ना समझी में त्रिहांश को देख रहे थे | त्रिहांश के हाथ में गन था और वह बेहद रौबदार अंदाज में, हवा में गन चलाते हुए उनके तरफ आ रहा था |     " यह कोन है चिराग....? " रमा चिराग को देख पूछी | चिराग अपना कंधा उचका कर राज्ञा को देखा जो घबराहट से त्रिहांश को ही देख रही थी |       चिराग की आंखे छोटी हो गई | वह एक नज़र त्रिहांश को देखा फिर राज्ञा से पूछा ,""_ क्या तुम इस आदमी को जानती हो ? "    " अच्छे तरह से ....!!! " चिराग की जवाब देते हुए त्रिहांश बेहद गुस्से से भरी हुई भारी आवाज में बोला तो चिराग ना समझी में त्रिहांश को देखने लगा |    वही त्रिहांश इस वक्त बेहद पागलों की तरह राज्ञा को देखने लगा था | उस लाल साड़ी में राज्ञा की खूबसूरती देख कर त्रिहांश चाह कर भी उससे नजरे नही हटा पा रहा था | वही राज्ञा का मकमली जैसा गोरा बदन इस वक्त उस शादी के जोड़े में बेहद अट्रैक्टिव लग रहा था | त्रिहांश इस वक्त कभी घबराहट से भरी हुई राज्ञा का चेहरा देखता तो कभी उसकी बदन को ,उसे राज्ञा को छूने की इस वक्त अजीब तलब उठ गई थी |     "  कोन हो तुम ?......!!! "चिराग का एक दोस्त त्रिहांश को सवाल करते हुए उसके सामने आया तो त्रिहांश एक टक राज्ञा को देखते हुए उस लड़के सीने पर सीधे गन रख देता है | "  उस लड़के की सांसे अटक गए | वही चिराग जल्दी से मंडप से उठ कर त्रिहांश से बोला,""_ कोन हो तुम ? क्यों तमाशा कर रहे हो यहां आ कर .....| "     त्रिहांश की नजर सिर्फ राज्ञा की जिस्म पर था | चिराग की बात उसके दिमाग में घुसा ही नहीं | वह धीरे से राज्ञा की तरफ अपने कदम बढ़ा दिया | वही त्रिहांश को इस तरह खोए हुए अंदाज में अपने तरफ आता देख राज्ञा अपने जगह से उठ कर पीछे जाते हुए बोली,""_ तू...तुम यहां.... क्यों..की क्यों आए हो | "     त्रिहांश एक हाथ में बंदूक पकड़ कर सबको निशान बनाते हुए बस राज्ञा के तरफ बढ़ रहा था | राज्ञा की बात भी उसके दिमाग में नही घुसी क्यों की उसका पूरा ध्यान सिर्फ राज्ञा का जिस्म पर था |      वह धीरे धीरे उसके करीब बढ़ रहा था तो वही राज्ञा आस पास जमा हुए लोगो को देखते हुए पीछे जा रही थी | उसे इस वक्त बहुत uncompertable फील हो रहा था | वह हकलाते हुए त्रिहांश से कुछ कहती उससे पहले ही त्रिहांश ने उसे कमर से कसके पकड़ कर एक कंबे को सटा कर उसके होंठो को अपने मुंह में ले लिया |       राज्ञा छटपटाने लगी लेकिन उस गेंडे जैसे आदमी को हटाना उसके बस में नही था | वह जोर जोर से उसके सीने में मारते हुए उससे छुटने की कोशिश करने लगी लेकिन त्रिहांश उसे हिलने तक का भी मौका नहीं दे रहा था |     वह एक हाथ से अभी भी गन को सबके तरफ प्वाइंट किया था और दूसरे हाथ से राज्ञा को कसके पकड़ कर कम्बे को सटा कर खड़ा किया था | वह बस उसके गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठो को चूम रहा था |       राशि हैरानी से यह सब देख रही थी | उसे राज्ञा के लिए बहुत बुरा लग रहा था वह जल्दी से आ कर त्रिहांश को हटाने को हुई की तभी एक लड़के ने उसका हाथ हटा कर पीछे खींच ली |      अचानक से ऐसे होने से राशि कुछ समझ नही पाई थी | वह फिर गुस्से से अपना सर ऊपर उठा कर उस आदमी को देखती जो अभी अभी अपने तरफ खींचा था | वह लड़का त्रिहांश का असिस्टेंट समर था |        राशि गुस्से से समर को खुद से दूर धकेलने को हुई की तभी समर कसके उसके दोनो हाथो को पकड़ कर बोला,""_ बॉस,को किसी भी चिज़ में रुकावट बिलकुल पसंद नहीं है लड़की,इसीलिए बेहतर होगा अपने जगह में खड़ी रहो....!! "   बोलते हुए समर गुस्से से राशि को दकेल देता है तो राशि दडाम से नीचे फर्श पर गिर गई |  जैसे त्रिहांश बेरहम और बद्तमीज़ था बिल्कुल उसी तरह उसका असिस्टेंट था |    राज्ञा खड़े खड़े रोते हुए सबको देख रही थी | चिराग, उसकी मां,उसका पूरा फैमिली,और दोस्त सब इस शादी में शामिल थे और सब अपने जगह में खड़े हो कर राज्ञा का तमाशा बनते हुए देख रहे थे | किसी में भी हिम्मत नही था क्यों की त्रिहांश के हाथ में गन था |   त्रिहांश इस वक्त पूरी तरह राज्ञा में खोया हुआ था | वह कभी उसके होंठो को चूमता तो कभी उसके पूरे चेहरे को ,राज्ञा चाह कर भी उस इंसान को रोकना तो दूर कुछ कह भी नही पा रही थी |        उसकी आंखों से बस आंसू गिर रहे थे ऐसा लग रहा था की उसके जिंदगी आज पूरी तरह तबाह हो जाएगी | वह रोते हुए त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश उसे ही देख रहा था | लेकिन उसके होंठ अपने प्यास बुझा रहे थे |      करीब पंद्रह मिनट बाद त्रिहांश रुक कर राज्ञा की लाल आंखो में देखने लगा |  उसका पूरा चेहरा ही लाल हो चुका था | वही त्रिहांश उसके गर्दन में अपना हाथ डाल कर उसके चेहरे को अपने बेहद करीब ला कर धीमी मगर बेहद सख्त आवाज में बोला,""_ तुम्हारी शादी किसी से भी हो मुझे कोई एतराज़ नहीं है लेकिन शादी करने से तुम्हारे इस जिस्म पर मेरा नही किसी और का हक हो जाएगा,वह तुम्हे छुएगा जो मुझे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है | "    राज्ञा रोते हुए उसे ही देख रही थी | वह उसे खुद से दूर धखेलने को हुई उससे पहले ही त्रिहांश अलग हो कर चिराग को देखने लगा | सिर्फ चिराग ही नहीं इस वक्त वहा जमा हुए हर एक इंसान राज्ञा को गिन्न भरी नजरो से देख रही थी | चिराग गुस्से से बोला,""_ राज्ञा खुराना,तुम्हारा एक आशिक भी है ?  "    चिराग़ फिर गुस्से से त्रिहांश को देखा | त्रिहांश बिना भाव के उसे ही देख रहा था | वह फिर गन से अपने आईब्रो कुजाते हुए मुड़ कर राज्ञा से पूछा ,""_ तुम इस चपरी से शादी कर रही हो ? इसकी ना कोई पर्सनेलिटी है और नाही कोई पहचान ..? क्यों कर रही इससे शादी ? "     राज्ञा की आंखो से आंसू बहते हुए उसके गाल से हो कर नीचे गिर रहे थे | वह धीरे से त्रिहान्श के करीब जा कर पूछी,""_ आपको क्या फरक पड़ता है त्रिहांश? मैं किसी से भी शादी कर लूं आपको क्या ...? "    " कुछ नही ...!!! " त्रिहांश बेफिक्री से उसे जवाब देता तो राज्ञा उसे ही देखने लगी |     वह फिर बोली,""_ फिर क्यों आए आप यहां ? "   त्रिहांश का चेहरा एक दम से सख्त हो गया | वह गुस्से से उसके बाजू पकड़ कर अपने आप से चिपकाते हुए बेहद ठंडे लहजे में मगर धीरे से बोला,""_मैं यहां आना नही चाहता था क्यों की मुझे इन सबसे बिलकुल फरक नहीं पड़ता था राज्ञा,लेकिन मुझे बाद में एहसास हुआ की तुमसे कोई भी शादी करले वह तुम्हारे करीब आएगा ,तुम्हे छुएगा और यह मुझे हरगिज बर्दाश्त नही,तुम्हारे जिस्म पर किसी का छूना तो दूर मुझे किसी की नजर भी बर्दाश्त नहीं है सुना तुमने | "      लास्ट लाइन त्रिहान्श बेहद गुस्से से चिल्लाते हुए बोला | राज्ञा हैरानी से उस हैवान को देख रही थी जो अजीबों गरीब शर्त रख रहा था | त्रिहांश बस राज्ञा को देख रहा था वह फिर उसका बाजू झटका कर चिराग को देखा | चिराग गुस्से से राज्ञा को देख रहा था | वह फिर पहने हुए अपने वारामाल फेंक कर मंदिर से बाहर चला गया | राज्ञा बस उसे जाता हुआ देख रही थी |       राशी भी रोते हुए सबको देख रही थी वह शादी को रोकना चाहती थी लेकिन राज्ञा के साथ इतना गलत हो उसने नही चाहा था |   पंडित अभी भी त्रिहांश को हैरानी से देख रहा था | तभी त्रिहांश गुस्से से बोला,""_ लगता है पंडित को अपनी जान प्यारी नही है | "  त्रिहांश अपने दांत पीसते हुए गन को पंडित के तरफ प्वाइंट करने को हुआ तो पंडित हड़बड़ा कर भागते हुए बोला,""_ बिलकुल प्यारी है बिलकुल प्यारी....!! "    पंडित भाग गया | वही राज्ञा रोते हुए दडाम से नीचे गिर गई | वही त्रिहांश मुड़ कर उसे देखा जो एक दम से बेजान सी गिरी थी | त्रिहांश अपने घुटनों के बल बैठ कर उसके टुडी को कसके पकड़ कर गुस्से से बोला ,""_ अब तुम किसी से भी शादी नही करोगी समझी ....!! | "      राज्ञा नम आंखों से उसे ही देख रही थी | वह रूंधली सी आवाज में पूछी,""_ क्या चाहिए आपको ..? "   " तुम्हारा जिस्म...!!! "त्रिहांश उसी के लहजे में जवाब दिया | राज्ञा एक नज़र खुद को देखी उसका जिस्म आज उसका ही दुश्मन बनते हुए नजर आ रहा था |      राज्ञा अभी रोते हुए त्रिहांश को देख ही रही थी की तभी त्रिहांश का फोन बजने लगा | त्रिहांश ने फोन चेक किया कॉल इस वक्त वेदिका का था |     यह देख त्रिहांश ने कॉल पिक कर बोला,""_ हा वेदू...!!! "   "त्रिहांश...तुम कहा चले गए ? सब तुम्हारा इंतजार कर रहे है बेटा ? " उधर से वेदिका बोली तो त्रिहांश एक टक राज्ञा को देखने लगा | वह फिर बोला ,""_ ठीक है, मै अभी आ रहा हु | "        त्रिहांश कॉल काट कर राज्ञा को अपने आप से चिपका कर उसके पीठ सहलाते हुए उसके गालों को चूमा फिर उसे खुद से अलग करते हुए थोड़ा सख्ती से पूछा,""_ तुम्हे मेरी बात समझ आई ना ? "   राज्ञा बस रोते हुए उसे देख रही थी | वही त्रिहांश उससे अलग हो कर समर को कुछ इशारा कर वहा से चला गया | राज्ञा वही पड़ी थी | वही राशि जल्दी से उठ कर उसके पास आई तो राज्ञा कसके उसके गले लग कर रोते हुए बोली,""_ राशु,मिस्टर गौरव और पूरा फैमिली कोर्ट में मेरा इंतजार....!!! "  "  शांत हो जाओ राज्ञा,सब ठीक हो जाएगा तुम पहले शांत हो जाओ | "राशि रोते हुए उसे शांत कराते हुए बोली |   वही राज्ञा जोर जोर से रोते हुए बोली,""_ नही राशु,कुछ ठीक नही राशु,अब तो सब कुछ खत्म हुआ, मिस्टर गौरव मुझे घर से बेदखल....?? " " नही राज्ञा ऐसा कुछ नही होगा ,,तुम ...तुम शांत हो जाओ | " राशि रोते हुए राज्ञा को शांत करने लगी लेकिन राज्ञा शांत नहीं हो रही थी | वह ऐसे ही राशि से लिपट कर रोती रही |    To be continued...... Precap.........( Kal ka scene)         सड़कों के किनारे में रखे हुए एक बेंच पर बैठे हुए राज्ञा के सामने एक ब्लैक कार आ कर रुक गई | राज्ञा नम आंखों से अपना चेहरा ऊपर कर देखी तो उसे त्रिहांश कार में से बाहर आते हुए नजर आया |          वही राज्ञा उसे थोड़ी देर बिना कुछ कहे देखी फिर उठ कर वहा से जाने को हुई की तभी त्रिहांश ने उसे एक ही झटके में कार को टिका कर उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपा कर गुनगुनाते हुए बोला,""_ मैने सुना की तुम्हारे बाप ने तुम्हे घर से बेदखल किया.. राज्ञा... राज्ञा क्या हुआ तुम्हे.... राज्ञा ? !! "    Â