Chapter 23 of 59

chapter 23

Billionaire's Dark Desire3,142 words~16 min read

  अग्निहोत्री मेंशन.....,    हाल में माहोल इस वक्त काफी गंभीर हो गया था | मलहोत्रा परिवार,और सारे घरवाले हैरानी से कभी त्रिहान्श को देखते तो कभी राज्ञा को | माया और सुधर्व तो अपने जगह में जम गए थे | क्यों की उनमें से किसी को भी भनक तक नहीं लगा था की त्रिहांश और राज्ञा शादी कर आएंगे |     वही राज्ञा अपने आंखे छोटे कर त्रिहांश को देख रही थी | उसने उससे शादी ऑफिस में बने हुए एक सीक्रेट रूम में की थी तो त्रिहांश ने यह क्यों कहा की वह कोर्ट में शादी कर आए है ?    वही त्रिहांश की चेहरे पर बेहद शातिर मुस्कान बिखर गया था | उसकी गहरी काली नजर सिर्फ माया पर टिकी थी | माया धीमी आवाज में राज्ञा को ऊपर से नीचे तक देखते हुए बेहद दबी हुई आवाज में बोली,""_तुम्हे यह शादी नही करना चाहिए था बच्चा,नही करना चाहिए था अब मैं तुम्हे इसकी कैद से कैसे निकालू ?,वह तुम्हे इस्तमाल कर रहा है,सिर्फ तुमसे अपने desire को अंजाम दे रहा है | "     माया की धीमी आवाज में कही हुई एक एक लफ्ज राज्ञा को सुनाई तो नही दिया था लेकिन अजीब सा कश्मश था जो राज्ञा को उसके तरफ देखने के लिए मजबूर्तकार गया था | वह ना समझी में अचानक से मुड़ कर माया को देखने लगी | कुछ तो ऐसा था जो वह उसके तरफ खिंचे जा रही थी |    वही अजय को त्रिहांश पर बहुत गुस्सा आ रहा था | वह गुस्से से लगभग चिल्लाते हुए बोला ,""_ हम यहां तुम्हारी शादी की बात चीत कर रहे है और तुम इस .........| "       अजय अपनी बात पूरा करता ,उससे पहले ही त्रिहांश गुस्से से वही रखे हुए एक वास को ले कर नीचे फर्श को दे मारा | अचानक से हाल में एक दम से सन्नाटा फसर गया | वही त्रिहांश गुस्से से अजय को घूरने लगा था | क्यों की उसे अच्छे से पता था ,की अभी अभी अजय आगे राज्ञा के बारे में ही उल्टा सीधा बोलने वाला था |       त्रिहांश फिर राज्ञा को देखा राज्ञा तो उसका गुस्सा देख कर अपने जगह में ही जम गई थी | वह बोला ,""_ तुम रूम में जाओ | "     राज्ञा एक नजर सबको देखी फिर धीमी कदमों के साथ अपने रूम के तरफ जाने लगी तो त्रिहांश ने उसे रोकते हुए बोला,""_ उधर नही बीवी | "  राज्ञा मुड़ कर ना समझी में त्रिहांश को देखने लगी लेकिन त्रिहांश के मुंह से बीवी नाम सुन कर वह दिल ही दिल अजीब सा सुकून मेहसूस कर रही थी | वह उसकी थी और राज्ञा खुद अब खुद को त्रिहांश की समझती थी |     तभी त्रिहांश उसके बेहद करीब आ कर बोला ,""_ तुम अब से मेरे... i  mean हमारे कमरे में रहोगी ,जाओ | "    त्रिहांश के कहने पर राज्ञा अपने रूम में जा रही थी जहा वह मेंशन के पहले दिन से रह रही थी | लेकिन अब त्रिहांश की बात सुन कर उसके आंखे हैरानी से बड़ी बड़ी हो गई थी | वह हैरानी से उसे देखने लगी थी वही त्रिहांश उसे अपने रूम के तरफ जाने का इशारा कर रहा था |       राज्ञा को अच्छे से पता था की इस शादी का कोई मतलब नहीं है | तो त्रिहांश ऐसा क्यों कह रहा है की उसका रूम अब उन दोनो का है ?     वह थोड़ी देर उसे ऐसे ही देखती रही फिर बिना कुछ कहे रूम के तरफ जाने लगी | उसे वह इंसान समझ ही नही आता था क्यों की हर पल त्रिहांश का अलग ही मूड होता था |      " रुको lovey...? " सुधर्व ने राज्ञा को आवाज लगाया | राज्ञा अपने जगह में रुक गई | यह वही नाम था जिसे पहली बार वह लड़की त्रिहांश के मुंह से सुना था | वह फिर आस पास देखते हुए सुधर्व के तरफ मुड़ गई | उसे लगा था की lovey नाम की लड़की जिसे वह त्रिहांश की गर्लफ्रेंड समझती थी वह यहा आई है |    सुधर्व उसे ही देख रहा था | वह उसके तरफ जाते हुए कुछ कहता उससे पहले ही त्रिहांश सुधर्व के सामने आते हुए राज्ञा का नाम गुस्से से लिया ,""_ राज्ञा.....| "    त्रिहांश की आवाज बेहद सर्द और गुस्से से भरा था | राज्ञा को भी समझ आ गया था की त्रिहांश कहना क्या चाहता है ? वह बिना देर किए ही त्रिहांश के रूम में गई | क्यों की आज भी त्रिहांश का गुस्सा सामना करने का हिम्मत उसके पास बिलकुल नही था |     वही माया और सुधर्व की हाथों की मुट्ठी बन गई थी | तभी वेदिका त्रिहांश के पास आते हुए पूछी,""_ त्रिहांश ,राज्ञा ही....| "   त्रिहांश ने अपना सर थोड़ा टेढ़ा किया फिर वेदिका को देख बोला ,""_ हां वेदू,जिसकी तलाश में मैं तिल तिल तड़प रहा था,जिसे सालो पहले इन लोगो ने मुझसे छुपाया था वह राज्ञा है urf रव्या सुधर्व राठौड़ है..वह मेरी lovey है वेदु | "       राज्ञा.... राज्ञा की असली मां बाप सुधर्व और माया थे | अतीत के कुछ ऐसे राज थे जो राज्ञा को खुद उसके मां बाप ही अपने आप से अलग किया था | राज्ञा का असली नाम रव्या था और उसे lovey नाम से भी बुलाया करते थे लेकिन अफसोस इन सारे राज़ो से राज्ञा अंजान है |    वेदिका मुड़ कर माया को देखी ,माया गुस्से से त्रिहांश को घूर रही थी | वह आगे आ कर उससे बोली,""_ तुम्हे क्या लगता है ? इस so called शादी की वजह से मैं अब अपनी बच्ची को तुम्हारे पास रहने दूंगी ? उसे तुमसे तलाक दिलवा कर मैं हमेशा के लिए उसे तुमसे आजाद कर के ही रहूंगी |"      त्रिहांश की होंठ मुड़ गए | वह जोर जोर से हंसते हुए माया के चारो और घूमने लगा | माया गुस्से से उसे घूर रही थी | वही अजय,विनोद आरव तीनो अपने जगह में जम गए थे | उन्हे त्रिहांश से इस तरह की उम्मीद बिलकुल नहीं थी | यह शादी उन अब सबके लिए एक सदमा जैसा था |    वही मलहोत्रा परिवार धीरज,पलक,रूहान और उसकी बीवी देवी ,सारे वही खड़े थे | हाल में इस वक्त क्या हो रहा है यह उनके पल्ले नहीं पड़ रहे थे | वह ना समझी में कभी त्रिहांश को देखते तो कभी अजय को |        वही अचानक से त्रिहांश अपने हंसी को रोक कर माया के सामने रुक गया | माया उसे अपनी जलती निगाहों से देख रही थी | तभी त्रिहांश बेहद धीमी मगर ठंडे लहजे में बोला ,""_जब तक उसकी सांसे नही रुकेंगे तब तक वह मुझसे अलग नहीं होगी,जिस दिन उसकी सांसे रुक जाएंगे उस दिन मैं खुद उसे कब्र में लेटा कर आऊंगा लेकिन आप लोगो का साया तक उस पर पड़ने नही दूंगा सासुमा| "   बोलते हुए त्रिहांश का चेहरा बेहद गुस्से से जलने लगा था | वही त्रिहांश की एक एक बात माया की दिल को जला रहा था | वह गुस्से से लगभग त्रिहांश का कालर पकड़ कर खींचते हुए चिल्ला कर बोली,""_ वह मेरी बेटी है त्रिहांश, मैं उसे ऐसे ही तुम्हारी बाहों में बरबाद होते हुए नही देख सकती ,तुम इतना खुदगर्ज क्यों हो त्रिहांश ? तुम उसे इस्तेमाल कर रहे हो सिर्फ इसीलिए की तुम्हे अपने डिजायर पूरा करना है ?"      त्रिहांश का चेहरा तपने लगा था | माया का चिल्लाना इस तरह गुस्सा करने से उसे कोई फरक नही पड़ा |      वही सुधर्व ,वेदिका और दिया सामने आ कर माया को त्रिहांश से अलग करने लगे तो माया की नजर वेदिका पर गई |   वेदिका उससे नजरे नही मिला रही थी | तभी माया बोली,""_ मेरी बच्ची को अपने बेटे का खिलौना बना दिया न ? भूलो मत तुम भी एक बेटी की मां हो बददुआ दे सकती हु तुम्हे ? लेकिन तुम लोगो की तरह मैं गिरी हुई नही हु |"     वेदिका नम आंखों से माया को देखने लगी | वही सुधर्व विनोद के पास जा कर बोला ,""_ जा रहा हु मैं बाउजी के पास जो जवाब देना आ कर उन्हे दिजिए | "    विनोद की चेहरे के हाव भाव बदल गए | वह सुधर्व को कुछ कहता उससे पहले ही सुधर्व गुस्से से माया को ले कर वहा से निकल गया |       त्रिहांश चुपचाप उन दोनो को जाता हुआ देख रहा था | वही मलहोत्रा परिवार अभी भी वही मौजूद था | वेदिका उनके सामने हाथ जोड़ कर बोली,""_ आप जा सकते है | "   धीरज को अजय पर बहुत गुस्सा आ रहा था | क्यों की उसकी वजह से उसने अपनी बेटी की दिल में त्रिहांश के किए फीलिंग्स जगाया था | और अब ....त्रिहांश राज्ञा से शादी कर आया था |        धीरज उस पर चिल्लाना चाहता था लेकिन त्रिहांश का गुस्सा और खौफ कैसा है उसे अच्छे से पता था तो वह कुछ भी ना कहना ही सही समझा | वही पलक नम आंखों से त्रिहांश को देख रही थी क्यों की वह उसके लिए ही वहा आई थी | धीरज पलक को ले कर घर से बाहर चला गया वही उसके पीछे रूहान और उसकी मां भी चले गए |      वही त्रिहांश बिना किसी को देखे ही अपने रूम के तरफ चला गया |   वही विनोद,अजय और आरव अपने जगह में ही खड़े थे | उन सबकी नजर त्रिहांश के रूम के तरफ था |    त्रिहांश का रूम....     राज्ञा इस वक्त ड्रेसिंग टेबल के पास खड़ी थी | और वह इस वक्त खुद को ही निहारे जा रही थी | वह आज बिलकुल अलग और सुंदर लग रही थी | कभी कभी उसकी उंगलियां त्रिहांश के पहनाए हुए मंगलसूत्र पर जाती तो कभी अपने मांग में..उसके गाल हल्के हल्के लाल होते जा रहे थे | क्यों की वह इस वक्त किसी दुल्हन से कम नहीं लग रही थी |     वही त्रिहांश डोर को टिक कर उसे ही देख रहा था | राज्ञा के चेहरे पर मासुमियत से बिखरी हुई वह मुस्कान उसकी वजह से ही तो था | लेकिन यह कब तक खाएं है ,त्रिहांश खुद नही जानता था क्यों की उसके दिल में राज्ञा के लिए फीलिंग्स नही थे या यू कहे की उसने अपने फीलिंग्स को कभी अपने दिल पर हावी होने ही नही दिया था तो उसे प्यार वाली फीलिंग्स कैसे होते है ? क्या है ? इसका समझ उसे बिलकुल नही था |     रूम में राज्ञा की चूड़ी और पायलों की शोर ही सुनाई दे रहा था | त्रिहांश रूम का door close कर वाशरूम के तरफ चला गया |    राज्ञा door का आवाज सुन कर मुड़ कर देखी ,त्रिहांश तेज़ी से वाशरूम के तरफ जा रहा था | राज्ञा को कुछ समझ नही आया वह अपना कंधा उछकाते हुए door के पास गई | क्यों की वह चेंज करना चाहती थी लेकिन त्रिहांश के रूम में उसकी कोई चीज़ नहीं थे |    Door लॉक हो गया था | यह देख राज्ञा वाशरूम के तरफ देखने लगी | वाशरूम से उसे शॉवर ऑन होने का आवाज भी सुनाई दे रहा था | वह फिर कुछ सोचते हुए आ कर बेड पर बैठ गई |      थोड़ी ही देर में वाशरूम का door open हुआ तो राज्ञा उस तरफ देखने लगी | त्रिहांश बाथरोब पहन कर वाशरूम से बाहर आ रहा था | वह क्लोसेट रूम के तरफ जाने को हुआ तो राज्ञा ने आवाज लगाया ,    त्रिहांश...!! "    त्रिहांश रुक कर उसे देखने लगा | तभी राज्ञा बेड से नीचे उतर कर उसके पास जाते हुए बोली,""_ door का lock खोलिए ना त्रिहांश? मुझे अपने रूम में जाना है | "      त्रिहांश का चेहरा एक दम से सख्त हो गया | वह गुस्से से राज्ञा को देखने लगा | उसने उसे कहा था की वह अब यही रहेगी फिर भी राज्ञा अपने रूम में जाने की बात कर रही थी |     वही त्रिहांश को गुस्से से घूरता देख राज्ञा अपने जगह में ही रुक गई | फिर वह धीरे से बोली,""_ मुझे चेंज करना है त्रिहांश और यहा मेरे कपड़े नही है | "    राज्ञा की बात सुन त्रिहांश थोड़ा शांत हुआ फिर उसके करीब आ कर उसके टुडी को पकड़ कर उसके चेहरे को ऊपर उठाया | राज्ञा उसे ही देख रही थी | वह फिर जल्दी से अपने नजरे झुका कर इधर उधर देखने लगी | उसे आज कुछ ज्यादा ही अलग एहसास हो रहा था |       वही त्रिहांश थोड़ा झुक कर उसके कान हल्के से बाइट करते हुए बोला,""_ hmmm आज रात तुम तयार हो ना बीवी ? "   राज्ञा का रोम रोम कांप उठा ,वह हैरानी से त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश की बात सुन उसकी तो होश उड़ गए थे | वह बोली,""_क ..क्या...क्या कहा आपने ..? "       त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह धीरे धीरे उसके तरफ अपने कदम बढ़ाते हुए राज्ञा के बेहद करीब जाने लगा तो राज्ञा की कदम अपने आप ही पीछे जाने लगे | त्रिहांश बस घबराहट से भरी हुई उसकी मासूम चेहरे को देख रहा था | राज्ञा पीछे जाते जाते बेड पर गिर गई | वही त्रिहांश उसके ऊपर आने लगा तो राज्ञा उठ कर पीछे सरकते हुए बोली,""_ त्रिहान्श आ आप यह क्या आह....| "     राज्ञा आगे कुछ भी कहती उससे पहले ही त्रिहांश उसे अपने आप से चिपका कर उसके गालों पर बेहद शिद्दत से चूमा तो राज्ञा की मुंह से आह निकल गई | उसकी धड़कने एक दम से तेज हो गए थे | वह त्रिहांश को देखने लगी | वही त्रिहांश उसके चेहरे को अपने हाथो में थामते हुए उसके टुडी पर kiss करा |   वही राज्ञा की बदन में सिहरन सा दौड़ रहा था |उसके दोनो हाथ अब त्रिहांश के चेस्ट पर था | वह धीरे से उसके गले में अपने दोनो हाथ लपटते हुए थोड़ा अटक कर बोली,""_ त्रिहांश .....| "    त्रिहांश उसके पूरे चेहरे पर चूमने लगा था | वह यह सब बेहद सॉफ्टली कर रहा था जो राज्ञा को बहुत सुकून दे रहा था | कल रात जिस तरह उसने उसे दर्द दिया था आज वही उसके सुकून की वजह बना था |       राज्ञा धीरे से अब उसके बाहों में फस गई थी | वही त्रिहांश धीरे धीरे अपने होंठो से उसका पूरा चेहरा गिला कर रहा था | तभी राज्ञा को कुछ याद आया तो वह त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश नशे से उसे ही देख रहा था | राज्ञा धीमी आवाज में उससे पूछी,""_ lovey कोन है त्रिहांश ? वह अंकल किसे आवाज लगा रहे थे ? "    त्रिहांश के होंठ रुक गए जो उसके चेहरे में चल रहे थे | उसका चेहरे का हाव भाव भी अचानक से गुस्से से भरा था | वही उसे इस तरह गुस्से में आता देख राज्ञा को समझ आ गया की उसने गलत सवाल पूछ लिया है या यू कहे की गलत इंसान से सवाल कर लिया है|      वह हड़बड़ाते हुए बेड से उतरते हुए बोली,""_ बताना जरूरी भी नही है त्रिहांश आ आप इतना गुस्सा मत होइए बिलकुल अच्छे नहीं लगते | "   बोलते हुए राज्ञा वाशरूम में भाग गई | वही त्रिहांश उसका भागने का अंदाज देख हल्के से हंस पड़ा | वह फिर बेड से उठते हुए अपना फोन ले कर किसी को कुछ मैसेज कर क्लोसेट रूम में चला गया |         थोड़ी ही देर में वह ऑफिस वियर सूट पहन कर बाहर आया | उसका औरा इस वक्त बेहद क्लासी और एटिट्यूड से भरा था | वह ड्रेसिंग टेबल के पास जा कर अपने बाल सेट करने लगा ,तभी door knock हुआ | त्रिहांश ने door खोला |     बाहर इस वक्त दो तीन सर्वेंट्स राज्ञा के सारे चीज़े उसके रूम से ले कर आए थे | त्रिहांश ने उन्हें अंदर आने का इशारा किया तो सर्वेंट्स आ कर रूम में राज्ञा के चीज़े सेट कर बाहर चले गए |     वही त्रिहांश को एक फोन कॉल करना था तो वह बालकनी में चला गया | थोड़ी देर में राज्ञा वाशरूम से बाहर आई | वह इस वक्त त्रिहांश के बाथरोब पहनी हुई जिसमें लगभग वह डूब ही गई थी |    वह आस पास त्रिहांश को ढूंढी तो उसे त्रिहांश नजर नहीं आया | यह देख उसका शक्ल रोनी जैसा हो गया | वह बड़बड़ाते हुए बोली,""_ बिना सोचे समझे मैं बाथरूम में कैसे घुस गई ? अब मैं क्या पहनूं ? बाहर कैसे जाऊ ? "       राज्ञा को लग रहा था की उसकी जरूरत के सारे चीज़ अभी भी उसके रूम में ही है | तभी राज्ञा की नजर त्रिहांश पर गई | जो बालकनी में किसी से बात कर रहा था | वह अपने माथे पर चपत मारते हुए बोली,""_ यह यही है | "   राज्ञा त्रिहांश के पास जाने लगी तभी उसे खुद त्रिहांश ही अंदर आता हुआ नजर आया | राज्ञा रुक कर उससे बोली,""_ त्रिहांश मेरे कपड़े ...? "  त्रिहांश उसे एक नजर देखा जो पूरी तरह उसकी ही बाथरोब में दुबक कर खड़ी थी | त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह उसके बेहद करीब जा कर उसका नाट खींचते हुए बोला ,""_ तुम्हारे सारे जरूरत की चीजें रूम में रखवा दिया है मैने ..| "  बोलते हुए त्रिहांश ने लगभग बाथरोब का नॉट खोल देता है तो राज्ञा जल्दी से अपने गिरते हुए बाथरोब को संभालते हुए बोली,""_ Ahhhh त्रिहांश आप यह क्या कर रहे है ? "    राज्ञा जल्दी से क्लोसेट रूम के तरफ जाने लगी लेकिन वह मुड़ कर त्रिहांश को देखते हुए पूछी,""_ आप कही जा रहे है ? "   त्रिहांश ने सर हिला दिया तो राज्ञा की चेहरे पर टेंशन आ गई | वह बिना कुछ कहे जाने को हुई तो त्रिहांश ने उसे अपने तरफ खींच कर पूछा ,""_ क्या हुआ ? परिशान क्यों लग रही हो? "   राज्ञा पप्पी जैसा चेहरा बना कर उससे पूछी,""_ मैं रूम से बाहर निकलू या नहीं ? सारे घरवाले मुझ पर गुस्सा तो..| ""  तुम्हे कोई कुछ नही कहेगा ,ठीक है? " त्रिहांश बेहद सख्ती से उससे बोला तो राज्ञा थोड़ी देर उसे देखी फिर लाचारी में अपना सर हिला कर चुप हो गई | वह थोड़ी देर भूल गई थी की सारे घरवाले उसके डर से उसे कुछ नही कहते है |   To be continued........      Â

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