Chapter 3 of 20

chapter 3

क्यूट कपल1,011 words~6 min read

Recapeदानियाल गार्डन में छाताई करते वक़्त माहीन के घर से धुआं निकलता देखा, तो घर कि तरफ दौड़ा आया था। ____________________________________    दानियाल ने मेन गेट का कलच हटाया और गार्डन में दाखिल होगया। घर का दरवाज़ा खुला देख कर दानियाल के घबराहट की इंतहा न रही, वो घर में दाखिल होते ईधर उधर देखता किचेन में जा पहुंचा। जहां  हैरान ओ परेशान माहीन चूल्हा बन्द करने की कोशिश कर रही थी।दानियाल ने माहीन को झट से पीछे खींचा, चूल्हे को बन्द किया। चूल्हे पे रखे पैन और बेकिंग ग्लवज़ में लगी आग को बुझा के उससे मुखतीब हुआ।"क्या, कर रही थी।""मै नाश्ता बना रही थी।" घबराई हुई माहीन अपना पसीना साफ करते हुए बोली।"तुम इसे नाश्ता बनाना कहती हो" वो वाकई परेशान था।" बैठ जाओ" दानियाल उसका हाथ पकड़  के उसे सोफे तक लाया और किचेन में चला गया। "लो पानी पियो" दानियाल उसकी तरफ पानी का ग्लास बढ़ा के बोला।घबराती हुई माहीन का हाथ दानियाल के हाथ टकराया और लम्हा थम गया। उसकी नशीली आंखी पे पहरा देती घनी पलके दानियाल की तरफ उठी और झुकना भूल गई, दानियाल उसकी झील सी नशीली आंखी में खोना चाहता था लेकिन उसने ग्लास लेलिया और अपने होठों लगा लिया।"थैंक्यू" माहीन ने कहां अब उसकी जान ने जान आई।दानियाल ने उसके लिए नाश्ता बनाया, टेबल भी सजाया और चला गया। वो उसे ये सब करते हुए देखती रही, उसे नाश्ते के लिए भी न पूछ पाई।माहीन शॉपिग  लिए निकल ही रही थी कि दादी और फिज़ा  आगाई।"माहीन बेटा ...माहीन तुम ठीक तो हो न", दादी ने उसका सर से पांव तक जाएंजा लेते हुए कहा। "भाई ने बताया कि किचेन में आग लग गई थी" फिज़ा नेकहा।"हां, मै ठीक हूं।"  माहीन ने कहा।"कहीं जारही हैं" फिज़ा ने उसके हाथ में बैग और सुल्तान को देख के पूछा।"हां, शॉपिग।"माहीन ने कहा।"अरे हां, दानियाल गाड़ी निकाल रहा था। उसके साथ चली जाओ।" दादी ने कहा"और हा हमारे साथ खाना खाना" दादी उससे दोबारा मुखतिब हुई माहीन कुछ कह न सकी और दादी के पीछे चल पड़ी।दादी के इसरार पर दोनों को न चाहते हुए भी साथ में जाना पड़ा। दानियाल अपनी बिल्ली लिसा के साथ ड्राइव पे जाना चाहता था लेकिन अब उसे माहीन और सुल्तान के साथ शॉपिंग भी जाना पड़ेगा।कार में चार लोग थे फिर भी काफी सन्नाटा था।माहीन और दानियाल की गोद में बैठे सुल्तान और लिसा एक दूसरे को देख रहे थे।जैसे ही माहीन की नज़र दोनों पर पड़ी उसने सुल्तान को अपने हंड बैग से कवर के लिया।"सुबह मुझे हेल्प करने ,और नाश्ता बनाने के लिए थैंक्यू सो मच",माहीन न चाहते हुए भी खामोशी तोड़ गई।"ओह! तो तुम्हे शुक्रिया कहना भी आता है" दानियाल ने उसकी तरफ देखते हुए तंज़ किया।माहीन ने सुलग कर उसकी तरफ देखा।लिसा, दानियाल की गोद में उछाल कूद कर रही थी।सुल्तान भी नवाबजादे कि तरह माहीन की गोद में बैठा लिसा को देख रहा था। जैसे वो उसके पास जाना चाहता    हो लेकिन माहीन के डर से न गया।लिसा और सुल्तान बड़े हो चुके थे।लिसा अपने लिए पार्टनर ढूंढ़ रही थी तभी सुल्तान कि एंट्री हुए थी, सुल्तान भी उसको पसंद करने लगा था अपने पार्टनर के तौर पर, लेकिन माहीन को ये पसंद न था।दानियाल ने कार एक मॉल के आगे रोकी। दोनों ने शॉपिंग की और वापिस लौट आए।वापसी में  माहीन ने कई बार दानियाल  को लिसा   को समझने की धमकी दी। माहीन की नदानी पर दानियाल गुस्सा भी होता और मन ही मन हसता भी।रात का अंधेरा छा चुका था। माहीन सुल्तान को गार्डन में ढूंढ़ रही थी। तबी उसे दानियाल की आवाज़ सुनाई दी वो        भी लिसा को आवाज़ लगा रहा था। आवाज़ लगाते हुए वो अपने गार्डन से बाहर आ गया था जहां से उसे माहीन नज़र आने लगी थी।"क्या तुम्हारी बिल्ली नहीं मिल रही," माहीन ने दानियाल से पूछा"और तुम्हारा बिल्ला" दानियाल ने पूछा।"उसका नाम सुल्तान है" माहीन ने जल के कहा।"क्या दोनों गायब है, इसका मतलब दोनों साथ हैं।" माहीन ने अपने आप से कहां और परेशानी में और तेज़ आवाज़ में सुल्तान को पुकारने लगी।"बस भी करो, क्यों बेचारो के पीछे पड़ी हो।" दानियाल कहा । वो उसके गार्डन में आ चुका था।"क्यों जाने दूं, तुम्हारी बिल्ली मेरे सुल्तान का फायदा उठाएगी," माहीन ने कहावो चौकी ,दानियाल धीरे धीरे क़दमों से उसके करीब आ रहा था। वो अपने कदम पीछे को करती गई और दीवार से जालगी। वो सहम सी गई और नज़रें झुका ली , क्यों की दानियाल उसके बहुत करीब आकर रुका था। दोनों एक दूसरे की सांसे महसूस कर रहे थे, दोनों के जिस्मों में सिर्फ दो इंच का फासला था।"मेरी लिसा बिल्ली है और तुम्हारा बिल्ला सुल्तान, इतनी नाइंसाफी क्यों" दानियाल ने कहाजवाब में माहीन ने नज़रें उसके चेहरे पे टीका दी।दानियाल नरम पड़ गया था, उसकी धड़कने तेज़ हो गई थी।"दोनों पसंद करते है एक दूसरे को" दानियाल ने दीवार पर अपने दोनो हाथ टिकाते हुए कहा।"तो" उसने धीमी आवाज़ में कहा।वो उसके गिरफ्त में आचुकी थी। दानियाल उसके इतने करीब था फिर भी उसने माहीन को छुआ नहीं था। ये बात माहीन के दिल को ज़रूर छू गई थी।"तो क्या, करने दो जो वो कर रहे हैं" दानियाल ने माहीन के कान में कहा।माहीन की धड़कने तेज़ होने लगी। उसने अपने दोनों हाथों से  दानियाल के सीने पर धक्का दिया लेकिन वो उसे ज़रा सा भी  हिला  न पाई।वो छह फुट का लंबा चौड़ा मजबूत तन जवान था। माहीन भी कुछ कम ना थी।वो अपना हाथ दानियाल के सीने से उसकी गर्दन की तरफ रोमांटिक अंदाज़ में बढ़ाने लगी।दानियाल चौंका और झट से पीछे हटा। "तुम मेरी बिल्ली से कम नहीं हो" दानियाल गहरी मुस्कान अपने होटों पे सजाए हुए बोला ।और दोनों हस दिए।               (See you in next part)                                                   -seema

Contents
Contents

Comments(0)

Join the discussion — sign in to leave a comment

Sign In to Comment

No comments yet. Be the first to share your thoughts!