Chapter 10 of 20

chapter 10

क्यूट कपल1,707 words~9 min read

(दो साल पहले)                  "क्या बात है, आज कुछ खास है क्या?" दानियाल ने नासिर के हाथ में चाय का कप देखा,जो वो उसकी तरफ बढ़ाए खड़ा था, तो हैरत से बोला।"जब आप हमारे घर आए हो तो हर दिन खास ही है हमारे लिए" नासिर ने कहा, जो उसके मिजाज़ के खिलाफ था।"ओके, मुद्दे पे आओ" दानियाल ने चाय की चुस्की ली और बोला। वो समझ गया था कि ये चिकनी चुपड़ी बातें यूहीं नहीं थी।"हे... हे...", उसने अपनी चोरी पकड़े जाने पर एक बनावटी हसीं हसी और बेशर्म की तरह मतलब की बात पर आ गया " भाई, आप एयरपोर्ट जा रहे है" नासिर ने हुक्म के लहज़े में कहा।"वो क्यों", दानियाल ने कंधे उचकाए।"क्यों की मैं नहीं जा सकता,  मुझे किसी से मिलने जाना है" नासिर ने कार की चाभी उसे थमाई और दौड़ चला, " उसकी फ्लाइट तीस मिनट में लैंड होजाएगी। You should go now" उसने पीछे मुड़ कर कहा और दानियाल की आंखों से ओझल होगया।     वो पिछले आधे घंटे बैठा उसका इंतजार कररहा था। उसने इधर उधर नज़रें दौड़ाई और उसका इंतजार खत्म हुआ।उसे किसी शर्ट पैंट या स्कर्ट की उम्मीद थी। लेकिन वो हिंदुस्तानी तहज़ीब में लिपटी उसकी तरफ चली आ रही थी। काला सूट, सुर्ख दुपट्टा और आंखों पर काला बड़ा चश्मा।उसने दूर से हवा में हाथ लहराया शायद वो उसे पहचान गई थी और करीब आकर सलाम किया।"तुम्हारा सामान कहां है समीरा", दानियाल ने सलाम का जवाब देने के बाद पूछा।"पीछे", समीरा ने काले कोट पैंट में दो अमेरिकन गोरे मुस्तंडों की तरफ इशारा किया। जो उसके सामान के साथ उसके पीछे आ खड़े हुए थे।"ये दोनों कौन है" दानियाल ने धीमी आवाज़ में पूछा।"ये, ये रॉबिन के गार्ड्स हैं, उसने इन्हे मेरी सेफ्टी के लिए भेजा है।" समीरा ने कहा।"Oh, ये तो गुंडे और जासूस जायदा लगते हैं। तो क्या ये हमारे साथ घर जाएंगे" दानियाल ने कहा।"नहीं, ये होटल में रुकेंगे" समीरा ने धीमी आवाज़ में कहा और दानियाल को चुप रहने का इशारा किया।समीरा पांच साल की उम्र से ही अमेरिका में पढ़ रही थी।वो अपने मामू मामी यानी दानियाल के पैरेंट्स के साथ रहती थी। बचपन से ही समीरा और रॉबिन दोस्त थे, लेकिन जवानी में उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई थी।और ये रिश्ता खुफिया या किसी से छुपा नहीं था।हर कोई इस रिश्ते के हक़ में था। दानियाल को भी इस रिश्ते का इल्म था। लेकिन वो कभी रॉबिन से मिला नहीं था इसलिए उसने अभी कोई राय कायम नहीं की थी।  वो बात करते करते गाड़ी तक पहुंच गए। उसने समीरा के लिए गाड़ी का दरवाज़ा खोला और वो अंदर बैठ गई।"तुम रॉबिन से मुझे कब मिलवा रही हो", दानियाल ने गाड़ी में बैठते हुए पूछा।दानियाल की ख्वाहिश ने समीरा को परेशान कर दिया।"क्या हुआ तुम्हारी लड़ाई हुई है", दानियाल उसके चेहरे पर परेशानी के आसार को भांप चुका था।"नहीं, ऐसा कुछ नहीं है भाई",  समीरा ने कहा।"कोई परेशानी है तो तुम मुझे बेझिझक बता सकती हो",दानियाल ने उसके सर पर हाथ फेरा और कहा।उसके आंखों में आंसू आ गए।"समीरा क्या हुआ प्लीज़ मुझे बताओ, अपना बड़ा भाई समझ के बताओ मुझे", दानियाल ने पूछा। समीरा का रोना उसे परेशान कर रहा था।"मैं प्रेगनेंट हूं" समीरा के इन वजनी अल्फाज़ ने दानियाल को ज़ोरदार धचका दिया और उसने अचानक से गाड़ी रोक दी।"लेकिन वो बच्चा नहीं चाहता" समीरा ने कहा और रोने लगी।एक गैरतमंद भाई के ज़मीर पर ज़ोरदार तमाचा पड़ा था। दानियाल को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे।"उसका दिमाग खराब हो गया है क्या?" माथा पकड़े बैठे हुए दानियाल ने कहा।समीरा रोती रही।"क्या मैं उसकी क्लास लू"दानियाल ने बोबारा कहा।"प्लीज़ रोना बंद करो" वो झुझलाहट में बोला"क्या मै बात करू रॉबिन से"दानियाल ने खुद को संभाला और समीरा को चुप कराते हुए बोला।"नहीं भाई, इससे और मुश्किल हो जायेगी" समीरा ने कहा।"मुश्किल क्यों होगी मैं उसे समझाऊंगा, वो समझ जाएगा" दानियाल ने कहा।"नहीं भाई, नहीं समझेगा वो" समीरा ने बेबसी में दानियाल के हाथ पकड़ते हुए कहा। जैसे उसे यकीन था वो नहीं समझे गा।"क्यों,..क्यों नहीं समझेगा। क्या तुम कुछ छुपा रही हो" दानियाल ने सिर्फ अंधेरे में तीर फेंका था।"नहीं भाई, आप और सब लोग जैसा समझते हैं वो वैसा नहीं है" समीरा ने कहा।सायद दानियाल का तीर निशाने पर था।"उसके डैड जो कहेंगे, वो वही करेगा" समीरा ने कहा"क्यों, उसका बाप गुंडा है क्या" दानियाल ने कहा।तभी समीरा का  फोन बजने लगा।  रॉबिन की कॉल थी और दानियाल ने उठा ली। वो कार से निकाल आया।थोड़ी देर बात करने के बाद वो वापिस कर में आया और मुस्कुराते हुए बोला " तुम ओवर रिएक्ट कर रही थी।अब सब ठीक है, चलो जल्दी घर चलते है सब इंतजार कर होंगे" दानियाल ने गाड़ी स्टार्ट कर दी और उसे कुछ बोलने का मौका न दिया।दानियाल ने कहां सोचा था जो वो करने जा रहा है था वो उसके जिंदगी की सबसे खौफनाक खता होगी।     "वेलकम होम ये....." वेलकम होम.....  वेलकम होम।।नासिर के बाद एक एक कर के घर में मौजूद सब ने समीरा का वेलकम किया।दानियाल भी हैरान था। इतनी जल्दी इतना सब कुछ कैसे हुआ। फिर अचानक उसे नासिर का एयरपोर्ट न जाने का बहाना याद आया।हॉल में हल्की फुल्की सजावट और कुछ खास मेहमानों की रौनक लगी थी।समीरा के बचपन के दोस्त और कजिन भी जश्न में शरीक थे। जिन्हे देख कर वो अपने सारे गम भूल गई थी।सब ने बहुत मज़े किए और जश्न का सिलसिला रात के खाने के साथ खत्म हुआ।उसे इंडिया आए एक हफ्ता हो चला था।सब हैरान थे कि वो वापिस जाने की बात नहीं कर रही थी। "जल्दी बाहर आओ मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं " दानियाल ने समीरा को फोन करके उसे बाहर बुलाया।"क्या हुआ हम कहीं जा रहे है" समीरा ने उसे कार में बैठे देखा तो पूछा।"हां" दनियाल ने कहा।"कहां" समीरा ने कार में बैठते हुए पूछा।"सरप्राइज है" दानियाल मुस्कुराया।"ओहो भाई, आप को पता है न मुझे सरप्राइज़ बिलकुल पसंद नहीं " समीरा ने कहा और जानने की जिद्द की तो उसने बता दिया कि वो रॉबिन से मिलने जा रहे हैं।एक पल के लिए वो घबराई लेकिन दानियाल की मौजूदगी  ने उसे हिम्मत दी।समीरा को जिस खतरे का अंदेशा था वही हुआ। रॉबिन दानियाल और समीरा से बड़ी मोहब्बत से मिलने के बाद  उन्हें अपनी प्रॉपर्टी दिखाने के बहाने से किसी सुनसान और अंडर कंट्रक्शन इमारतों के दरमियान ले गया।समीरा के मना करने के बावजूद दानियाल रॉबिन के साथ आया, उसे कहां पता था की रॉबिन ने जो धमकी समीरा को दी थी वो उसे अंजाम भी दे सकता था।जहां उनकी कार रुकी, वहां पहले से ही रॉबिन के गुंडे मौजूद थे। दानियाल को अब मौजूदा हालात समझ आने लगे थे। अंडरकंसट्रक्शन साइट, प्रोफेशनल बॉडीगार्ड की शक्ल में गुंडे और समीरा का रॉबिन से न मिलने की इलतेजा ।अब पछताने का क्या ही फ़ायदा था लिहाज़ा उसने अंजान होने का दिखावा किया।रॉबिन ने उनसे गाड़ी से उतरने की इल्तेजा की और वो दोनो गाड़ी से उतर आए। उनके पास और कोई चारा नहीं था।"यहां हम मॉल बना रहे है" रॉबिन ने एक अधूरी बिल्डिंग की तरफ इशारा कर के कहा था।"अच्छा, अच्छा है" दानियाल ने अपनी घबराहट छुपाने की कोशिश की।"तुम्हारी हिंदी काफी अच्छी है" दानियाल ने रॉबिन को बातों में उलझाने की कोशिश की और वो ज़रा कमियाब भी हुआ।नासिर लॉन में बैठा चाय पी रहा था की उसके फोन पर आए दानियाल के एक मैसेज " Emergancy" ने उसे खौफ और बेचैनी से तार तार कर दिया।    कुछ घंटों पहले के एक वाकिए ने उसके ज़हेन में खौफ की लहर दौड़ा दी। उसने जल्दी से समीरा का चैट खोला और उसकी लोकेशन देखी जो उसने उससे दानियाल के साथ जाने से पहले अपने बड़े भाई होने की शेखी झंडने के लिए सेंड करने को बोला था।वो देख कर उसे वाकई हालात इमर्जेंसी लगने लगे। समीरा के फोन का लोकेशन शहर के ऐसे इलाके में बता रहा था जहां पहले कई कत्ल हो चुके थे।     ये शायद सिर्फ दानियाल की खुशकिस्मती थी की फोन उसके हाथ से गिरने से पहले मैसेज सेंड हो चुका था।"साले साहब होशियारी ट्राय भी मत करना" रॉबिन ने दानियाल के हाथ पर एक वार से फोन गिरते हुए बोला।"What nonsense" दानियाल को गुस्सा आया और उसने रॉबिन को घुसा दे मारा।रॉबिन के गुंडों ने रॉबिन को पीटता देख दानियाल पर एक साथ सैलाब की तरह टूट पड़े। नासिर ने पुलिस को फोन किया उन्हें समीरा का पता दिया और खुद भी फॉलो करने लगा। दस पंद्रह पेशावर गुंडों के आगे दानियाल आखिर कब तक टिकता, उसने जी जान लगा कर उनका मुकाबला किया था।"दानियाल......" मुक्कों और घुसों की अदला बदली के दौरान समीरा की आवाज़ ने दानियाल को सन्नाटे में डाल दिया था। वो आवाज़ की तरफ मुड़ा। रॉबिन ने समीरा को चौथी मंजिल से नीचे को धक्का दे दिया था और वो हवाओं को चीरती हुईं ज़मीन पर धड़ाम से आ गिरी।"समीरा" दानियाल पागलों सा चिल्लाता हुआ गिरता परता उस तक पहुंचा। एक बार वो ऊपर खड़े रॉबिन को देखता और फिर उसकी गोंद में पड़ी खून से लथपथ समीरा को। वो फर्क नहीं कर पा रहा था कभी ये उसे खौफनाक ख्वाब लगता तो कभी नागवार हकीकत। अचानक दानियाल ने अपने सर के पीछे ज़ोरदार वार महसूस किया और बेहोश होकर गिर पड़ा।   रॉबिन हाथ में लोहे का रॉड लिए खड़ा था इतने में पुलिस पहुंच गईं और चारों तरफ अफरा तफ़री मच गई।नासिर ज़मीन पर पड़े दानियाल और समीरा की तरफ दौड़ा और समीरा का खून से लथपथ सर अपनी गोद में लिया और" समीरा आंखें खोलो आंखे खोलो समीरा" चिल्लाया। पुलिस ने मौका ए वारदात से सब को गिरफ्तार कर लिया।रात के दस बजे, समीरा और दानियाल को हॉस्पिटल लाया गया। नासिर अपनी सुद बुद खोए हॉस्पिटल की चेयर पर पड़ा था। उसके घर वाले भी आ चुके थे।      रॉबिन किसी अमरीकी डॉन का बेटा था । गिरफ्तार किए गए सभी मुजरिमों को अमेरिका भेज दिया गया।     अगली सुबह सर पर चोट खाए दानियाल की हालत में  ज़रा सुधार आया और समीरा........(आगे अगले पार्ट में )By-Seema                                   Â

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